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सौ करोड़ की भूमि हड़प गए भूमाफिया: नहर की जगह पर खड़ी कर दीं बहुमंजिला इमारतें, SC का आदेश भी न हटा सका कब्जा
Thu, 18 Jul 2024 03:32 PM IST
भूपेन्द्र सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
Published by: भूपेन्द्र सिंह
Updated Thu, 18 Jul 2024 03:32 PM IST
सार
आगरा में नहर की सौ करोड़ की भूमि भूमाफिया और बिल्डर हड़प गए। यहां पर बहुमंजिला इमारतें खड़ी कर दीं। SC के आदेश के बाद भी कब्जा नहीं हट सका।
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जीवनी मंडी में नहर भूमि पर लगा बिल्डर का गेट, अंदर नीले रंग में सिंचाई भूमि का बोर्ड
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उत्तर प्रदेश के आगरा में जोंस मिल में भूमाफिया और बिल्डरों ने सिर्फ नजूल और पुलिस महकमे की भूमि ही नहीं बेच खाई बल्कि 100 करोड़ रुपये की नहर की भूमि भी हड़प गए। 48,319 वर्ग मीटर जलमग्न भूमि का स्वरूप बदलकर उस पर बहुमंजिला इमारतें खड़ी कर दी गईं। सिंचाई विभाग और नगर निगम के अफसर मेहरबान रहे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर भी प्रशासन जलमग्न भूमि से कब्जे नहीं हटा सका और न ही उसे पुराने स्वरूप में लौटाया जा सका।
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सदर तहसील के मौजा घटवासन में जीवनी मंडी से वाटरवर्क्स तक बड़ी नहर बहती थी। नावों से माल ढुलाई होती थी। क्षेत्रीय अभिलेखागार के अनुसार 1904 में नौपरिवहन बंद हो गया। 1916 में सिंचाई विभाग के तत्कालीन अधिशासी अभियंता सीएफ विलिकिन्स ने आगरा नगर पालिका को 32.62 एकड़ भूमि हस्तांतरित की।
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जोंस मिल बम विस्फोट कांड के बाद हुई जांच में जलमग्न भूमि का सर्वे हुआ। जिसमें 48,319 वर्ग मीटर भूमि पर अवैध अतिक्रमण व पक्के निर्माण मिले। दिसंबर 2020 में तत्कालीन एडीएम निधि श्रीवास्तव ने डीएम को सौंपी जांच रिपोर्ट में इस भूमि को तत्काल कब्जा मुक्त कराने के लिए पत्र लिखा।
साथ ही सुप्रीम कोर्ट की हिंचलाल तिवारी बनाम कमलादेवी व अन्य के मामले में हुए निर्णय का उल्लेख करते हुए जलमग्न भूमि को पुराने स्वरूप में लौटाने की बात कही। लेकिन, तब भी नगर निगम और सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने 48319 वर्ग मीटर सरकारी भूमि को कब्जा मुक्त कराने की रुचि नहीं दिखाई।
इस भूमि के आंशिक भाग पर वर्तमान में मॉल बना है। एक दर्जन से अधिक अपार्टमेंट, 50 से अधिक शॉपिंग कॉम्पलेक्स व मार्केट और 100 से अधिक अन्य पक्के निर्माण खड़े हैं। वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार इस भूमि की कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक है। जिसे भूमाफिया और बिल्डरों ने नगर निगम और सिंचाई विभाग के अधिकारियों की सांठगांठ से फर्जी व कूटरचित दस्तावेजों से हथिया लिया।
2021 में तत्कालीन डीएम पीएन सिंह ने सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता को भूमि पर कब्जा लेने के आदेश दिए। सिंचाई टीम खानापूर्ति कर लौट आई। तीन साल बाद भी जलमग्न भूमि से कब्जे नहीं हटे।
2007-08 में खारिज कराया था दाखिला
नहर, तालाब व जलमग्न भूमि पर हुए कब्जे के इस खेल में राजस्व कर्मियों ने भी फर्जीवाड़ा किया। सिंचाई विभाग के स्वामित्व वाले गाटा संख्या 2078 में भूमि खरीद के बाद तहसीलदार न्यायालय में राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने के लिए वाद दायर किया। सिंचाई व नगर निगम ने आपत्ति दर्ज नहीं कराई।
कमला नगर निवासी सुनील कुमार अग्रवाल के हक में नामांतरण हो गया। जब यह बात जांच समिति के संज्ञान में आई तो 20 अगस्त 2020 को दाखिला खारिज निरस्त कर वाद फिर से स्थापित किया गया। यह मामला तहसीलदार न्यायालय में अभी तक लंबित है।