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कुपोषित मां बेटे को अस्पताल के गेट के बाहर डालकर चला गया एंबुलेंस चालक
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कासगंज के पटियाली में अस्पताल के गेट के बाहर लेटे मां, बेटे
- फोटो : KASGANJ
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पटियाली(कासगंज)। कोरोना महामारी के इस संकट में लोग जरूरतमंदों की सेवा के लिए अपने हाथ आगे बढ़ा रहे हैं, वहीं एक एबुलेंस चालक ने मानवता को शर्मसार कर दिया। तंगहाली के चलते कुपोषण का शिकार मां बेटे को अस्पताल के गेट के बाहर छोड़कर चला गया। स्वास्थ्य विभाग नेे एंबुलेंस चालक की इस लापरवाही से लेते हुए कार्यदायी संस्था से शिकायत की है।
सुनीता निवासी थाना दरियावगज के पति श्रीकृष्ण जाटव की एक साल पहले मौत हो गई। इसके बाद से परिवार का भरण पोषण की जिम्मेदारी उस पर आ गई। मेहनत मजदूरी करने से उसके जो भी आय आती उसे वह स्वयं व अपने छह बच्चों का पेठ भरने लगी, लेकिन आय अधिक न होने से पूरा परिवार कुपोषण का शिकार हो गया, किसी ने सुध नहीं ली। जब उसकी हालत अधिक बिगड़ी तो ग्राम प्रधान ने एंबुलेंस को बुलाकर सुनीता व उसके छह वर्षीय बेटे नगेंद्र को अस्पताल भिजवा दिया, लेकिन एंबुलेंस चालक ने मां बेटे को अस्पताल में भर्ती न कराकर गेट के बाहर ही यूं ही छोड़ दिया। जब लोगों की नजर मां बेटे पर पड़ी तो मामले की जानकारी अस्पताल पर दी। इसके बाद स्वास्थ्य केंद्र पर मौजूद चिकित्साधिकारी डॉ. अंजू यादव ने स्वयं पहुंच कर मां बेटे को अस्पताल में भर्ती किया। मां बेेटे का प्राथमिक उपचार करने के बाद हालत गंभीर देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
एक माह पहले हो गई मासूम की मौत
पटियाली। महिला के तीन साल के बेटे गोविंद की मौत भी एक माह पहले परिवार की तंग हाली के चलते बीमारी से हो चुकी है। जबकि पति श्रीकृष्ण की मौत एक साल पहले बीमारी से हो गई।
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सरकारी योजनाओं का नहीं मिल रहा लाभ
पटियाली। महिला के परिवार को किसी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल रहा। उसको न तो विधवा पेंशन का ही लाभ मिल रहा और न हीं राशन योजना का। इसके साथ ही परिवार के भरण पोषण के लिए मनरेगा योजना का भी जॉब कार्ड नहीं बना है।
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सुनीता निवासी थाना दरियावगज के पति श्रीकृष्ण जाटव की एक साल पहले मौत हो गई। इसके बाद से परिवार का भरण पोषण की जिम्मेदारी उस पर आ गई। मेहनत मजदूरी करने से उसके जो भी आय आती उसे वह स्वयं व अपने छह बच्चों का पेठ भरने लगी, लेकिन आय अधिक न होने से पूरा परिवार कुपोषण का शिकार हो गया, किसी ने सुध नहीं ली। जब उसकी हालत अधिक बिगड़ी तो ग्राम प्रधान ने एंबुलेंस को बुलाकर सुनीता व उसके छह वर्षीय बेटे नगेंद्र को अस्पताल भिजवा दिया, लेकिन एंबुलेंस चालक ने मां बेटे को अस्पताल में भर्ती न कराकर गेट के बाहर ही यूं ही छोड़ दिया। जब लोगों की नजर मां बेटे पर पड़ी तो मामले की जानकारी अस्पताल पर दी। इसके बाद स्वास्थ्य केंद्र पर मौजूद चिकित्साधिकारी डॉ. अंजू यादव ने स्वयं पहुंच कर मां बेटे को अस्पताल में भर्ती किया। मां बेेटे का प्राथमिक उपचार करने के बाद हालत गंभीर देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
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एक माह पहले हो गई मासूम की मौत
पटियाली। महिला के तीन साल के बेटे गोविंद की मौत भी एक माह पहले परिवार की तंग हाली के चलते बीमारी से हो चुकी है। जबकि पति श्रीकृष्ण की मौत एक साल पहले बीमारी से हो गई।
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सरकारी योजनाओं का नहीं मिल रहा लाभ
पटियाली। महिला के परिवार को किसी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल रहा। उसको न तो विधवा पेंशन का ही लाभ मिल रहा और न हीं राशन योजना का। इसके साथ ही परिवार के भरण पोषण के लिए मनरेगा योजना का भी जॉब कार्ड नहीं बना है।