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गीतकार गोपालदास 'नीरज' की याद में केंद्रीय हिंदी संस्थान करेगा ये काम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Updated Sat, 21 Jul 2018 05:36 AM IST
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प्रख्यात गीतकार गोपालदास 'नीरज' (फाइल फोटो)
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प्रख्यात गीतकार गोपालदास 'नीरज' पर केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा अपनी पत्रिका में विशेषांक छापेगा। पुस्तिका भी प्रकाशित कर सकता है। केंद्रीय हिंदी संस्थान में संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। उसमें प्रस्तुत होने वाले पेपरों को पत्रिका या पुस्तिका में जगह दी जाएगी।
केंद्रीय हिंदी संस्थान देश और दुनिया में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए काम कर रहा है। साहित्यकारों पर पुस्तकों का प्रकाशन करा रहा है। कवि गोपालदास 'नीरज' का साहित्य जगत में अविस्मरणीय योगदान है। इसको देखते हुए केंद्रीय हिंदी संस्थान ने उन पर विशेषांक छापने की योजना बनाई है।
संस्थान की ओर से 'मीडिया', 'गवेषणा संचयन' और 'गवेषणा' पत्रिकाएं प्रकाशित की जाती हैं। इनमें से किसी एक में जगह दी जाएगी। सामग्री अधिक उपलब्ध हुई तो पुस्तिका भी प्रकाशित की जा सकती है।
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'हिंदी साहित्य को अपूर्णनीय क्षति'
केंद्रीय हिंदी संस्थान के निदेशक प्रोफेसर नंदकिशोर पांडेय का कहना है कि कवि गोपालदास 'नीरज' के निधन से हिंदी साहित्य जगत को अपूर्णनीय क्षति हुई है। उनकी स्मृति में संस्थान की ओर से जल्द संगोष्ठी का आयोजन कराया जाएगा। इसमें प्रस्तुत होने वाले पेपरों को संस्थान की किसी पत्रिका में प्रकाशित किया जाएगा। पुस्तिका भी प्रकाशित की सकती है।
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केंद्रीय हिंदी संस्थान देश और दुनिया में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए काम कर रहा है। साहित्यकारों पर पुस्तकों का प्रकाशन करा रहा है। कवि गोपालदास 'नीरज' का साहित्य जगत में अविस्मरणीय योगदान है। इसको देखते हुए केंद्रीय हिंदी संस्थान ने उन पर विशेषांक छापने की योजना बनाई है।
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संस्थान की ओर से 'मीडिया', 'गवेषणा संचयन' और 'गवेषणा' पत्रिकाएं प्रकाशित की जाती हैं। इनमें से किसी एक में जगह दी जाएगी। सामग्री अधिक उपलब्ध हुई तो पुस्तिका भी प्रकाशित की जा सकती है।
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'हिंदी साहित्य को अपूर्णनीय क्षति'
केंद्रीय हिंदी संस्थान के निदेशक प्रोफेसर नंदकिशोर पांडेय का कहना है कि कवि गोपालदास 'नीरज' के निधन से हिंदी साहित्य जगत को अपूर्णनीय क्षति हुई है। उनकी स्मृति में संस्थान की ओर से जल्द संगोष्ठी का आयोजन कराया जाएगा। इसमें प्रस्तुत होने वाले पेपरों को संस्थान की किसी पत्रिका में प्रकाशित किया जाएगा। पुस्तिका भी प्रकाशित की सकती है।