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लेदर कलस्टर को भी मिलेगी एनटीजी में चुनौती
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा
Updated Thu, 17 Dec 2015 02:21 AM IST
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कीठम पक्षी विहार के नजदीक प्रस्तावित मेगा लेदर क्लस्टर को भी एनजीटी में चुनौती देने की तैयारी है। रिवर कनेक्ट अभियान से जुड़े सदस्यों का कहना है कि कीठम पक्षी विहार से 300 मीटर की दूरी पर करीब 109 हेक्टेयर जमीन पर लेदर क्लस्टर डेवलप किया जा रहा है। वन विभाग के अधिकारी इस ओर आंख मूंदे बैठे हैं।
बुधवार को देहली गेट स्थित होटल गोवर्धन में आयोजित पत्रकार वार्ता में रिवर कनेक्ट अभियान के सदस्य डा. देवाशीष भट्टाचार्य ने कहा कि कीठम बर्ड सेंक्च्युरी का ईको सेंसिटिव जोन करीब 10 किलोमीटर था, फिर पांच किलोमीटर कर दिया। अब इसे घटाकर 250 मीटर करने का प्रस्ताव सेंट्रल वाइल्ड लाइफ को भेजा गया है। अभी तक इसको मंजूरी नहीं मिली है। बावजूद इसके लेदर पार्क बनाया जा रहा है।
हैरत की बात है कि फतेहपुर सीकरी रोड पर महुअर के पास यूपीएसआईडी की ओर से बनाए जा रहे लेदर पार्क के निर्माण पर पक्षी विहार के ईको सेंसिटिव जोन के प्रतिबंधों के चलते स्टे लगा हुआ है। पार्क लगभग का काम पूरा हो चुका है।
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ईको सेंसिटिव जोन का दायरा घटाने के प्रस्ताव और लेदर पार्क निर्माण को हाईकोर्ट में चुनौती में दी है। अब इसे एनजीटी में भी उठाया जाएगा।
वन विभाग से सेवानिवृत मुरारीलाल गोस्वामी ने बताया कि कैलाश मंदिर से रामलाल वृद्ध आश्रम तक बनाई गई सड़क में भी वन भूमि अधिनियम 1980 का खुला उल्लंघन किया गया है। बृज खंडेलवाल ने बताया कि ताजमहल और मथुरा रिफायनरी के बीच कीठम ग्रीन बफर जोन के रूप में प्रदूषण नियंत्रित करने का एक बेहतर विकल्प है। इसके प्रभावित होने से सीधा दुष्प्रभाव ताजमहल पर पड़ेगा। 1970 की एक रिर्पोट के अनुसार, हर वर्ष एक किमी रेगिस्तान आगरा की ओर बढ़ रहा है। इसी कारण बाईंपुर रेंज विकसित की गई थी। बाबुरपुर में लगभग 35 हेक्टेअर पंचायत की वन भूमि सरकारी दस्तावेजों से लगभग गायब हो चुकी है। जमीन बिल्डरों को हस्तांतरित हो गई है। जहां अब कालोनियां बन चुकी हैं।
इनबाक्स...
विद्युत शवदाह गृह के प्रयोग को करेंगे जागरूक
20 दिसंबर को एत्माद्दौला व्यू प्वाइंट यमुना आरती स्थल पर शाम पांच बजे रैन बसेरा का उद्घाटन और विद्युत शवदाह गृह को अधिक से अधिक प्रयोग करने के लिए लोगों से घोषणापत्र पर हस्ताक्षर कराने के अभियान का शुभारंभ किया जाएगा। यह जानकारी अभियान से जुड़े श्रवण कुमार व रंजन शर्मा ने देते हुए बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को देखते हुए लोगों से अपील की जाएगी कि विद्युत शवदाह गृह का इस्तेमाल करें और पेड़ बचाएं।
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बुधवार को देहली गेट स्थित होटल गोवर्धन में आयोजित पत्रकार वार्ता में रिवर कनेक्ट अभियान के सदस्य डा. देवाशीष भट्टाचार्य ने कहा कि कीठम बर्ड सेंक्च्युरी का ईको सेंसिटिव जोन करीब 10 किलोमीटर था, फिर पांच किलोमीटर कर दिया। अब इसे घटाकर 250 मीटर करने का प्रस्ताव सेंट्रल वाइल्ड लाइफ को भेजा गया है। अभी तक इसको मंजूरी नहीं मिली है। बावजूद इसके लेदर पार्क बनाया जा रहा है।
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हैरत की बात है कि फतेहपुर सीकरी रोड पर महुअर के पास यूपीएसआईडी की ओर से बनाए जा रहे लेदर पार्क के निर्माण पर पक्षी विहार के ईको सेंसिटिव जोन के प्रतिबंधों के चलते स्टे लगा हुआ है। पार्क लगभग का काम पूरा हो चुका है।
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ईको सेंसिटिव जोन का दायरा घटाने के प्रस्ताव और लेदर पार्क निर्माण को हाईकोर्ट में चुनौती में दी है। अब इसे एनजीटी में भी उठाया जाएगा।
वन विभाग से सेवानिवृत मुरारीलाल गोस्वामी ने बताया कि कैलाश मंदिर से रामलाल वृद्ध आश्रम तक बनाई गई सड़क में भी वन भूमि अधिनियम 1980 का खुला उल्लंघन किया गया है। बृज खंडेलवाल ने बताया कि ताजमहल और मथुरा रिफायनरी के बीच कीठम ग्रीन बफर जोन के रूप में प्रदूषण नियंत्रित करने का एक बेहतर विकल्प है। इसके प्रभावित होने से सीधा दुष्प्रभाव ताजमहल पर पड़ेगा। 1970 की एक रिर्पोट के अनुसार, हर वर्ष एक किमी रेगिस्तान आगरा की ओर बढ़ रहा है। इसी कारण बाईंपुर रेंज विकसित की गई थी। बाबुरपुर में लगभग 35 हेक्टेअर पंचायत की वन भूमि सरकारी दस्तावेजों से लगभग गायब हो चुकी है। जमीन बिल्डरों को हस्तांतरित हो गई है। जहां अब कालोनियां बन चुकी हैं।
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विद्युत शवदाह गृह के प्रयोग को करेंगे जागरूक
20 दिसंबर को एत्माद्दौला व्यू प्वाइंट यमुना आरती स्थल पर शाम पांच बजे रैन बसेरा का उद्घाटन और विद्युत शवदाह गृह को अधिक से अधिक प्रयोग करने के लिए लोगों से घोषणापत्र पर हस्ताक्षर कराने के अभियान का शुभारंभ किया जाएगा। यह जानकारी अभियान से जुड़े श्रवण कुमार व रंजन शर्मा ने देते हुए बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को देखते हुए लोगों से अपील की जाएगी कि विद्युत शवदाह गृह का इस्तेमाल करें और पेड़ बचाएं।