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महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को 'गुरुजी' के नाम से जानते हैं यहां के लोग
Tue, 03 Sep 2019 12:42 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
Published by: मुकेश कुमार
Updated Tue, 03 Sep 2019 12:42 PM IST
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भगत सिंह कोश्यारी
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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी का कासगंज से पुराना नाता रहा है। वो 60 के दशक में पांच साल तक यहां एक शिक्षक के रूप में रहे। शहर के बड़े बुजुर्ग आज भी उनको 'गुरुजी' के नाम से जानते हैं।
राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी सन 1965 से 70 तक कासगंज में सरस्वती शिशु मंदिर में प्रधानाचार्य के रूप में तैनात रहे। उस वक्त स्कूल का नाम बाल मंदिर हुआ करता था। लक्ष्मी गंज में एक किराये के मकान में स्कूल चलता था। स्कूल में ही एक कमरे में वो रहते थे।
भगत सिंह कोश्यारी का सरल स्वभाव उस दौर के लोगों को याद है। लोग उनको 'गुरुजी' कहकर पुकारते थे। उनके पढ़ाए गए छात्रों के जहन में 'गुरुजी' का सख्त रूप आज भी है। लोगों कहना है कि कोश्यारी अनुशासन प्रिय थे।
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राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी सन 1965 से 70 तक कासगंज में सरस्वती शिशु मंदिर में प्रधानाचार्य के रूप में तैनात रहे। उस वक्त स्कूल का नाम बाल मंदिर हुआ करता था। लक्ष्मी गंज में एक किराये के मकान में स्कूल चलता था। स्कूल में ही एक कमरे में वो रहते थे।
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भगत सिंह कोश्यारी का सरल स्वभाव उस दौर के लोगों को याद है। लोग उनको 'गुरुजी' कहकर पुकारते थे। उनके पढ़ाए गए छात्रों के जहन में 'गुरुजी' का सख्त रूप आज भी है। लोगों कहना है कि कोश्यारी अनुशासन प्रिय थे।
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कोश्यारी के राज्यपाल बनने पर जताई खुशी
भाजपा नेता श्याम अग्रवाल ने बताया कि जब कोश्यारी प्रधानाचार्य थे तो हमारी मुलाकात शाखा में होती थी। वो रोज वहां आते थे। इसके बाद राम जन्म भूमि आंदोलन के दौरान एक बार अयोध्या में मुलाकात हुई तो इतने साल बाद भी नाम लेकर हमें बुलाया था।
नई पीढ़ी भले ही भगत सिंह कोश्यारी के बारे में ज्यादा नहीं जानती हो, लेकिन पुरानी पीढ़ी के कई लोग हैं, जिन्होंने उनके राज्यपाल बनने की खबर सुनी तो चेहरे पर खुशी चमक आई। किसी की जुबां पर था यह हमारे गुरुजी हैं, इन्होंने हमें पढ़ाया है।
नई पीढ़ी भले ही भगत सिंह कोश्यारी के बारे में ज्यादा नहीं जानती हो, लेकिन पुरानी पीढ़ी के कई लोग हैं, जिन्होंने उनके राज्यपाल बनने की खबर सुनी तो चेहरे पर खुशी चमक आई। किसी की जुबां पर था यह हमारे गुरुजी हैं, इन्होंने हमें पढ़ाया है।