फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   kasganj a place of tulsidas and amir khusro

कासगंज बवालः तुलसी-खुसरो की जमीन को आखिर किसकी लगी नजर

Thu, 01 Feb 2018 02:06 PM IST
अजय झंवर, अमर उजाला कासगंज
अजय झंवर, अमर उजाला कासगंज Updated Thu, 01 Feb 2018 02:06 PM IST
विज्ञापन
kasganj a place of tulsidas and amir khusro
बाजार में रौनक लौटी - फोटो : अमर उजाला
भक्ति और प्रेम की परंपरा वाले गंगा-जमुना के बीच बसे कासगंज की धरती पर सांप्रदायिक हिंसा की फैलती दुर्गंध ने हर किसी को स्तब्ध कर दिया है। गोस्वामी तुलसीदास और अमीर खुसरो को जन्म देने वाला जनपद पिछले 5 दिनों में हिंसा के लिए बदनाम हो गया है। 
विज्ञापन


इस शहर ने इस जिले ने कई संवेदनशील समय देखे हैं। स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई भी यहां मिल जुलकर लड़ी गई। कासगंज, सोरों, पटियाली, गंजडुंडवारा, सहावर, अमांपुर जैसे सभी कस्बे बिना भेदभाव के अंग्रेजों के विरुद्ध खड़े हो जाते थे। न कोई जात पात थी और न कोई धर्म संप्रदाय। अंग्रेजों के खिलाफ मिलजुलकर जांबाजी के साथ संघर्ष किया। 
विज्ञापन


कई सेनानी शहीद हुए। शहर और जिले ने आजादी को बहुत संभालकर रखा। स्वतंत्रता के बाद कई ऐसे अवसर आए। जब देशभर में दंगे हुए लेकिन कासगंज के नागरिक जिम्मेदारी के साथ एक साथ खड़े रहे। अमांपुर के नगला कटीला में राष्ट्रीय कवि बलवीर सिंह रंग ने जन्म लिया और देशभर को मुहब्बत का पैगाम दिया। 
विज्ञापन
विज्ञापन


उनकी सद्भाव के लिए यह रचना काफी प्रासंगिक है कि मैंने तो गुलशन की खैर मांगी है। वहीं एक अन्य रचना मैं कवि रंग कहते हैं कि मानवता की शपथ मनुज को कृंदनहीन करो। लेकिन 26 जनवरी को तिरंगा यात्रा के विवाद में सौहार्द की मिसाल शहर की फिजा को पलीता लग गया।

ऐसे पड़ा कासगंज नाम

kasganj a place of tulsidas and amir khusro
बच्चे स्कूल गए - फोटो : अमर उजाला
कासगंज जनपद का ज्यादातर इलाका गंगा की तलहटी का इलाका है। पहले गंगा की मुख्यधारा शहर की सीमा से करीब 12 किलोमीटर दूर सोरों में बहती थी। गंगा का क्षेत्र होने के कारण यहां कांस नामक घास का जंगल था। जिस घास से इसे कासगंज शहर का नाम मिला। कासगंज की स्थापना याकूत खान उर्फ खान बहादुर खान ने की थी।

साहित्यकार डा. राधाकृष्ण दीक्षित बताते हैं कि यह जनपद सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक रहा है। संत तुलसीदास ने सोरों ने जन्म लिया तो अमीर खुसरो ने पटियाली में। यहां कभी भी सद्भाव गंभीर रूप से नहीं बिगड़ा सद्भाव हमेशा कायम रहना जरूरी है। इससे प्रगति में बाधा आती है। चाहें कोई भी हो मानवता न भूले यह जरूरी है।
  
कौमी एकता सद्भावना समिति के डा. इस्लाम फारूकी ने कहा कि राष्ट्र और समाज की मजबूती के लिए सांप्रदायिक सौहार्द जरूरी है। कासगंज ने तुलसी और खुसरो जैसे दो रत्न दिए है। देश प्रेम से बढ़कर न कोई धर्म है और न कोई मजहब। जनपद की गंगा जमुनी संस्कृति जिंदा रहनी चाहिए। हम सब को मिलकर इसकी रक्षा भी करनी चाहिए।  
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed