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यहां भगवान की तरह होती है कारगिल शहीद की पूजा, प्रशासन शहादत ही भुला बैठा

Wed, 25 Jul 2018 12:05 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा Updated Wed, 25 Jul 2018 12:05 PM IST
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kargil vijay diwas Shaheed Layak Singh story in hindi
शहीद लायक सिंह की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
19 साल पहले सरहद पर भारतीय सेना के जांबाजों ने दुश्मनों को खदेड़ कर कारगिल विजय की गौरव गाथा लिखी। इसमें कई वीर सपूतों ने अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। इन शहीदों में आगरा के लाल नायब सूबेदार लायक सिंह का नाम भी शामिल है। 
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15 जुलाई 1999 में लायक सिंह सरहद पर दुश्मनों से लड़ते हुए शहीद हो गए थे। वो आगरा की बाह तहसील के गांव कोरथपुर के रहने वाले थे। उनकी याद में गांव में शहीद स्मारक बनवाया गया है। 
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शहीद की प्रतिमा स्थापित है। परिवार वाले भगवान की तरह पूजा करते हैं। लेकिन सरकार के नुमाइंदे इस स्मारक को भूल चुके हैं। पहले शहादत दिवस पर एसडीएम जरूर श्रद्धांजलि देने आए थे। इसके बाद परिवार का हाल किसी ने नहीं जाना। 
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19 वर्ष बाद भी शहीद के परिवार को पट्टे की जमीन पर कब्जा नहीं मिल सका है। उनकी याद में जो मार्ग बनवाया गया, वो खस्ताहाल है। पेंशन और आवास के इंतजार में शहीद की मां रामश्री दुनिया से चल बसी, लेकिन प्रशासन को इस परिवार की सुध नहीं है।

परिवार को जमीन मिली, कब्जा नहीं

शहीद के भाई सतेंद्र सिंह ने बताया कि 10 बीघा जमीन का पट्टा मिला था। जिसमें से 2 बीघा जमीन पर ही कब्जा मिल सका है। पट्टे की जमीन पर कब्जे के लिए विभिन्न स्तरों पर शिकायत की गयी। लेकिन कब्जा नसीब नहीं हो सका है। 

शहीद लायक सिंह के नाम पर गांव के लिए शहीद मार्ग तो बन गया, लेकिन उखड़ा पड़ा है। मरम्मत की ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया है। शहादत के बाद से परिवार का हाल जानने के लिए प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया है। 

लड्डू गोपाल की तरह लगाते हैं भोग

बच्चों की पढ़ाई के चलते नायब सूबेदार लायक सिंह की पत्नी शकुंतला देवी आगरा में रहती हैं। जबकि शहीद के भाई सतेंद्र सिहं अपने परिवार सहित गांव में ही रहते हैं।

तीन साल पहले तक शहीद की मां रामश्री लड्डू गोपाल की तरह अपने बेटे को भोग लगाती थीं। अब स्मारक पर शहीद की भाभी रजनी देवी हर रोज पूजा करती हैं। बच्चे भी उनके साथ पूजा में शामिल होते हैं। 

शहादत दिवस व अन्य मौके पर पत्नी शकुंतला देवी बच्चों के साथ गांव आती हैं। ज्यादातर वक्त अपने पति की स्मारक पर बिताती हैं। नायब सूबेदार लायक सिंह की शहादत पर परिजनों को गर्व है और गम भी है। लेकिन गुस्सा इस बात है कि प्रशासन उन्हें भुला बैठा है।   
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