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कांवड़ मेलाः भोले की भक्ति से सराबोर तीर्थनगरी, सतरंगी हुई छटा

Sun, 07 Mar 2021 11:05 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sun, 07 Mar 2021 11:05 PM IST
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Kanwar Mela: Tirthanagri, drenched in full of devotion to Bhole
कासगंज के सोरों से गुजरती कांवड़ियों की टोली - फोटो : KASGANJ
कासगंज(सोरों)। तीर्थनगरी सोरों और लहरा गंगाघाट आस्था और श्रद्धा से सराबोर दिखाई दे रहे हैं। सतरंगी छटा है तो वातावरण भी भक्तिमय है। बम बम भोले के स्वर के साथ घुंघरू, घंटी की झंकार भक्तिमय वातावरण का अहसास करा रही है। भगवान शिव के प्रति अगाध आस्था दिखाई दे रही है।
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महाशिवरात्रि पर्व के लिए पर भगवान भोले का तीर्थनगरी के गंगाजल से अभिषेक करने के लिए कांवड़िए श्रद्धालुओं का तीर्थनगरी पहुंचना निरंतर जारी है। लहरा घाट से लेकर हरिपदी के घाट तक हर ओर श्रद्धालु दिखाई दे रहे हैं। बम-बम भोले के जयकारे लगाते हुए कांवड़िए अपनी रंग-बिरंगी कांवड़ों पर साज-सज्जा कर भक्ति का रंग गहरा कर रहे हैं।
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लहरा घाट से गंगा जल भरकर कांवड़िए तीर्थनगरी के प्राचीन महादेव मंदिर सोमेश्वर में मत्था टेककर अपनी आगे की यात्रा प्रारंभ करते हैं। तीर्थनगरी हो या लहरा गंगाघाट या फिर कासगंज की सड़कें। चहुंओर बम भोले के स्वर सुनाई देने लगे हैं।
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बोले ज्योतिषाचार्य मंत्रोच्चारण के साथ करें यात्रा
ज्योतिषाचार्य पंडित हेमंत त्रिगुणायत कहते हैं कि साधकों को मंगलकारी मंत्र ऊं नम: शिवाय का जाप करना चाहिए। यह मंत्र इंसान व भगवान के बीच का सेतु है। इस मंत्र से मातृका वर्ण प्रकट हुए हैं। अ, इ, उ, ऋ लृ इस मंत्र के पांच मूलभूत स्वर हैं तथा व्यंजन भी पांच पांच वर्णों से युक्त पांच वर्ग वाले हैं। इसी से शिरोमंत्र सहित त्रिपदा गायत्री का प्राकट्य हुआ है। उस गायत्री से सम्पूर्ण वेद प्रकट हुए हैं और उन वेदों से करोडों मंत्र निकले हैं। इन मंत्रों से भिन्न भिन्न कार्यों की सिद्धि होती है। परम शिव के सकल स्वरूप से संबंध रखने वाले सभी मंत्रराज साक्षात भोग प्रदान करने वाले और शुभकारक मोक्षप्रद है ऊं नम: शिवाय।
श्रद्धालुओं की बात-
- तीर्थनगरी सोरों के प्रति श्रद्धा है। हर बार तीर्थनगरी में देव दर्शन एवं महाशिवरात्रि पर्व से पहले गंगाजल लेने तीर्थनगरी और लहरा घाट आते हैं। हर वर्ष फाल्गुन मास में कांवर उठाने तीर्थनगरी आते हैं। इस वर्ष उनकी टोली में आठ लोग आये हैं। - भरत सिंह, मुरैना।

- भगवान भोले का मनन करते हुए रात दिन पैदल चलकर चार दिन में अपने गांव पहुंच जाते हैं और वहां महादेव मंदिर में गंगाजल चढ़ाकर जलाभिषेक करते हैं। भजन कीर्तन कर मनोरथ पूरी करने की आस करते हैं। भोले बाबा भी प्रसन्न होकर अपनी कृपा बरसाते हैं। - कंपोडर सिंह, मुरैना।
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