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सीट जिताने के लिए हर बार आए कल्याण सिंह
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वर्ष 1991 में ज्योंती रोड स्थित अपने आवास पर पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का स्वागत करते रामनरेश अ
- फोटो : MAINPURI
मैनपुरी। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का मैनपुरी से पुराना नाता रहा है। विधानसभा से लेकर लोकसभा तक का चुनाव जिताने के लिए न केवल सभाएं की बल्कि 1991 के लोकसभा चुनाव में मैनपुरी में ड़ेरा भी डाल दिया था। कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें करके पार्टी प्रत्याशी रामनरेश अग्रिहोत्री को जिताने की रणनीति बनाई थी।
मैनपुरी के भाजपा नेता कल्याण सिंह को बाबू जी ही पुकारते थे। लोधी बहुल क्षेत्र में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का जादू सिर चढ़कर बोलता था। 1992 के बाद तो कल्याण सिंह की एक झलक पाने और उनके नजदीक पहुंचने के लिए जिले के भाजपा नेता लालायित रहते थे। पहली बार कल्याण सिंह ने वर्ष 1991 में लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी रहे रामनरेश अग्रिहोत्री के चुनाव की कमान तक संभाली थी। रामनरेश अग्रिहोत्री के घर पर रुककर ही चुनाव प्रबंधन भी किया था। 1991 और 1993 के विधानसभा चुनाव में सदर सीट से भाजपा प्रत्याशी रहे नरेंद्र सिंह राठौर के लिए कल्याण सिंह ने कई जनसभाएं तक की। नरेंद्र सिंह राठौर के पिता मलिखान सिंह राठौर और कल्याण सिंह सरकार में एक साथ मंत्री रहे थे। वर्ष 2007 में सदर सीट से भाजपा प्रत्याशी अशोक सिंह चौहान के लिए चुनाव प्रचार किया था। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में अंतिम बार भाजपा प्रत्याशी एसएस चौहान को जिताने के लिए जनसभाएं की थीं। हर चुनाव में कार्यकर्ताओं के साथ सीधे संवाद करके चुनाव जीतने के गुरुमंत्र भी दिए थे।
आबकारी मंत्री रामनरेश अग्रिहोत्री बताते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री की याददाश्त के सब कायल थे। एक बार जिससे मिले उसका नाम और चेहरा उनको याद हो गया। दूसरी बार मिलने पर नाम से ही बुलाते थे।
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पूर्व विधायक अशोक सिंह बताते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह बूथ प्रबंधन में माहिर थे। उनका कहना था कि बूथ मजबूत हो। मतदान के दिन अधिक से अधिक संख्या में वोटर को घर से मतदान केंद्र तक पहुंचाकर मतदान कराया जाए तो हर हाल में सीट जीती जा सकती है।
जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह राठौर बताते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने हमेशा संरक्षक की भूमिका निभाई। चुनाव होने पर जब भी बुलाया गया हर बार आए। चुनाव प्रबंधन में कमियां मिलने पर उनमें व्यापक सुधार करने की सख्त हिदायत देने से कभी नहीं चूके।
पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष अरविंद सिंह तोमर बताते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का मैनपुरी से पुराना नाता रहा है। 1992 में बाबरी विध्वंस के बाद जब वह सरकार छोड़कर आए तो एक ही बात हर जगह कही कि कार्यकर्ता से ही पार्टी की पहचान है कार्यकर्ता का हमेशा सम्मान करें।
भोगांव। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के निधन पर उनके समर्थकों व भाजपा नेताओं ने शोक व्यक्त किया है। रविवार को ग्राम छाछा में ब्लॉक प्रमुख अस्मिता राजपूत की अध्यक्षता में हुई शोक सभा में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि दी गई। ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि कश्मीर सिंह लोधी ने कहा कि उन्होंने श्री राम मंदिर के लिए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। कलक्टर सिंह राजपूत, ग्राम प्रधान पूरन सिंह शास्त्री, ममता राजपूत, आसतेंद्र गुप्ता, सुनील राजपूत, मनोज राजपूत, संजीव राजपूत, पंकज पांडेय, सुरजीत राठौर, राजू लोधी, तेजसिंह वर्मा, रामसेवक वर्मा, शिवचरन लोधी, तारा सिंह मौजूद रहे।
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मैनपुरी के भाजपा नेता कल्याण सिंह को बाबू जी ही पुकारते थे। लोधी बहुल क्षेत्र में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का जादू सिर चढ़कर बोलता था। 1992 के बाद तो कल्याण सिंह की एक झलक पाने और उनके नजदीक पहुंचने के लिए जिले के भाजपा नेता लालायित रहते थे। पहली बार कल्याण सिंह ने वर्ष 1991 में लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी रहे रामनरेश अग्रिहोत्री के चुनाव की कमान तक संभाली थी। रामनरेश अग्रिहोत्री के घर पर रुककर ही चुनाव प्रबंधन भी किया था। 1991 और 1993 के विधानसभा चुनाव में सदर सीट से भाजपा प्रत्याशी रहे नरेंद्र सिंह राठौर के लिए कल्याण सिंह ने कई जनसभाएं तक की। नरेंद्र सिंह राठौर के पिता मलिखान सिंह राठौर और कल्याण सिंह सरकार में एक साथ मंत्री रहे थे। वर्ष 2007 में सदर सीट से भाजपा प्रत्याशी अशोक सिंह चौहान के लिए चुनाव प्रचार किया था। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में अंतिम बार भाजपा प्रत्याशी एसएस चौहान को जिताने के लिए जनसभाएं की थीं। हर चुनाव में कार्यकर्ताओं के साथ सीधे संवाद करके चुनाव जीतने के गुरुमंत्र भी दिए थे।
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आबकारी मंत्री रामनरेश अग्रिहोत्री बताते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री की याददाश्त के सब कायल थे। एक बार जिससे मिले उसका नाम और चेहरा उनको याद हो गया। दूसरी बार मिलने पर नाम से ही बुलाते थे।
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पूर्व विधायक अशोक सिंह बताते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह बूथ प्रबंधन में माहिर थे। उनका कहना था कि बूथ मजबूत हो। मतदान के दिन अधिक से अधिक संख्या में वोटर को घर से मतदान केंद्र तक पहुंचाकर मतदान कराया जाए तो हर हाल में सीट जीती जा सकती है।
जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह राठौर बताते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने हमेशा संरक्षक की भूमिका निभाई। चुनाव होने पर जब भी बुलाया गया हर बार आए। चुनाव प्रबंधन में कमियां मिलने पर उनमें व्यापक सुधार करने की सख्त हिदायत देने से कभी नहीं चूके।
पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष अरविंद सिंह तोमर बताते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का मैनपुरी से पुराना नाता रहा है। 1992 में बाबरी विध्वंस के बाद जब वह सरकार छोड़कर आए तो एक ही बात हर जगह कही कि कार्यकर्ता से ही पार्टी की पहचान है कार्यकर्ता का हमेशा सम्मान करें।
भोगांव। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के निधन पर उनके समर्थकों व भाजपा नेताओं ने शोक व्यक्त किया है। रविवार को ग्राम छाछा में ब्लॉक प्रमुख अस्मिता राजपूत की अध्यक्षता में हुई शोक सभा में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि दी गई। ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि कश्मीर सिंह लोधी ने कहा कि उन्होंने श्री राम मंदिर के लिए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। कलक्टर सिंह राजपूत, ग्राम प्रधान पूरन सिंह शास्त्री, ममता राजपूत, आसतेंद्र गुप्ता, सुनील राजपूत, मनोज राजपूत, संजीव राजपूत, पंकज पांडेय, सुरजीत राठौर, राजू लोधी, तेजसिंह वर्मा, रामसेवक वर्मा, शिवचरन लोधी, तारा सिंह मौजूद रहे।