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#kabtaknirbhaya: हैदराबाद कांड पर बोलीं महिलाएं, अपराधियों को मिले कठोर से कठोर सजा

Wed, 04 Dec 2019 12:54 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी Published by: मुकेश कुमार Updated Wed, 04 Dec 2019 12:54 AM IST
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kab tak nirbhaya aparajita samvad over Hyderabad case
अपराजिता के कार्यक्रम में महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
हैदराबाद में महिला डॉक्टर की हत्या से मैनपुरी की महिलाओं में भी आक्रोश है। मंगलवार को अपराजिता अभियान के तहत अमर उजाला कार्यालय पर आयोजित संवाद कार्यक्रम में महिलाओं ने बेबाकी से विचार रखे। महिलाओं ने जहां शासन और प्रशासन की धीमी कार्रवाई पर नाराजगी प्रकट की। वहीं अभिभावकों को बेटों को संस्कारवान बनाने की भी नसीहत दी। 
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अपराजिता के संवाद कार्यक्रम में महिलाओं ने कहा कि बेटियों के साथ अत्याचार करने वालों को सजा सुनाने में न्यायालय को ट्रायल करने की कोई जरूरत नहीं है। कानून में बदलाव करते हुए अपराधियों को कठोर से कठोर सजा सुनानी चाहिए। 
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'सजा में न हो देरी' 

बालक कल्याण समिति की सदस्य आराधना गुप्ता ने कहा कि बालिकाओं को सुरक्षित रखने के लिए कानून में बदलाव की जरूरत है। बालिकाओं को घूरने तथा उनके साथ दुष्कर्म जैसी घटनाओं को करने वालों को बीच चौराहे पर सजा देनी चाहिए। ऐसे लोगों के साथ दंड देने में शासन और प्रशासन को देरी नहीं करनी चाहिए। 
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'मोमबत्ती जलाने से नहीं बनेगी बात' 

सभासद मधु यादव ने कहा कि बालिकाओं के साथ अपराध रोकने के लिए मोमबत्ती से काम नहीं चलेगा। इसके लिए अपराध करने वालों को सजा सुनाने में शासन और प्रशासन को देरी नहीं करनी चाहिए। जानकारी होने के 24 घंटे के अंदर अपराधी को कठोर से कठोर सजा सुनानी चाहिए। 
 
बालिकाएं रखें बचाव के साधन 

शिक्षिका रूपाली रस्तोगी ने कहा कि इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए बालिकाओं को भी सजग होने की जरूरत है। वे यात्रा के दौरान मिर्ची स्प्रे या मिर्ची पाउडर जैसे पदार्थों को साथ लेकर चलें। 

इससे कि खतरा होने पर वे अपने बचाव के लिए अपराधी पर प्रयोग कर अपने को सुरक्षित कर सकें। दूसरे देशों में इस प्रकार की व्यवस्था है। हमारे देश में भी बालिकाओं के लिए यह व्यवस्था लागू की जाए। 

बेटियों को बनाएं मजबूत 

मदर टेरेसा स्कूल की प्रबंधक विमला दुबे ने कहा कि आज के समय में जिस प्रकार की घटनाएं हो रही हैं उससे हमें सबक लेते हुए बेटियों को मजबूत करने की जरूरत है। बेटियां यदि मजबूत होंगी तो वे अपराधियों को मुंहतोड़ जवाब दे सकेंगी। 

'पाश्चात सभ्यता पर लगे रोक' 

समाज सेविका गीता रस्तोगी ने कहा कि एक समय था जब भारत की सभ्यता को दुनियां के लोग धारण करना चाहते थे। आज भी पश्चिमी देश भारतीय सभ्यता को धारण कर रहे हैं।  

हमारा समाज पश्चिमी देशों की सभ्यता की ओर बढ़ रहा है। यही कारण है कि हमारे समाज में इस प्रकार की घटनाएं हो रहीं है। समाज के लोगों को चाहिए कि हम अपनी सभ्यता को धारण करें जिससे कि हमारे बच्चों में भी संस्कार पैदा हो सकें। 
 

बच्चों को बनाएं संस्कारवान

समाज सेविका शशिप्रभा ने कहा कि कहीं न कहीं बच्चों में संस्कार की कमी आ रही है। इसके चलते बड़े होकर वे अपराध करते हैं। हम सभी को चाहिए कि चाहे बेटा हो या बेटी सभी में संस्कार पैदा करें। यदि बेटा संस्कारवान होगा तो उसे दूसरे की बेटी भी अपनी बहन नजर आएगी। यदि बेटी संस्कारवान होगी तो वह हमारे समाज को संस्कार देगी। 

अभिभावक भी रखें बच्चों पर नजर 

समाज सेविका सुमन पालीवाल ने कहा कि बेटियों पर हो रहे अत्याचार के लिए कहीं न कहीं अभिभावक भी जिम्मेदार हैं। हम अपने बच्चों की तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं। वे किस समय घर आ रहे हैं और किस समय घर से जा रहे हैं इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है। बच्चों में यदि संस्कार पैदा किए जाएं तो निश्चित ही इस प्रकार की घटनाओं पर रोक लगेगी। 

सख्त कानून की है जरूरत 

योग शिक्षिका रूचि देवी ने कहा कि बेटियों पर हो रहे अत्याचार समाज के लिए बड़ी समस्या बन गए हैं। हमारे समाज में ऐसे नियम स्थापित किए जाएं जिससे कि बेटियों की तरफ कोई आंख उठाकर न देख सके। बेटियों की सुरक्षा को लेकर सख्त से सख्त कानून बने तभी हमारी बेटियां अपने को सुरक्षित महसूस कर सकेंगीं। 
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