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दो सगे भाइयों को उम्र कैद की सजा
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Justise, Court, punishment
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मैनपुरी। थाना औंछा क्षेत्र में आठ साल पहले सिपाही की हत्या करने के आरोपी दो सगे भाइयों को जिला जज विजेंद्र सिंह ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। उनको 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी देना होगा। सजा सुनाए जाने के बाद उनको जेल भेज दिया गया है।
थाना औंछा के नगला रामसिंह निवासी सिकदार सिंह यादव अलीगढ़ में हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात थे। 14 जून 2011 को वह गांव से ड्यूटी पर जा रहे थे।
मैनपुरी-औंछा मार्ग पर आटपुरा के पास सुबह नौ बजे उनकी गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई। उनके बेटे मनोज कुमार ने गांव के ही राघवेंद्र सिंह, उसके भाई ब्रजेश कुमार, पिता सत्यराम के खिलाफ हत्या करने की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने जांच के दौरान सिकदार की पुत्री मुस्कान उर्फ बेबी को हत्या का षड़यंत्र रचने का दोषी पाकर चारों के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई केे लिए चार्जशीट कोर्ट में भेज दी।
मुकदमे की सुनवाई जिला जज विजेंद्र सिंह की कोर्ट में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से गवाहों ने हत्या करने के समर्थन में गवाही दी। गवाही के आधार पर राघवेंद्र और ब्रजेश कुमार को सिकदार की हत्या करने का दोषी पाया गया। डीजीसी वीरेंद्र कुमार मिश्रा, एडीजीसी अशोक कुमार पंकज ने आरोपियों को कड़ी सजा देने की दलील दी। जिला जज ने उनको आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोनों को 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी देना होगा।
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तमंचा रखने में एक हजार जुर्माना
पुलिस ने हत्यारोपी ब्रजेश की निशानदेही पर हत्या में प्रयोग किया गया तमंचा बरामद किया था। उसके खिलाफ तमंचा रखने का मुकदमा भी चला। तमंचा रखने के आरोप में उस पर एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। उसको एक साल की सजा भी सुनाई गई है।
मुकदमे के दौरान हुई मौत
हत्यारोपी सत्यराम यादव को पुलिस ने जेल भेजा। उसकी हाईकोर्ट से जमानत मंजूर हो गई। मुकदमे की सुनवाई के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने अदालत में सत्यराम की मौत की सूचना देने के बाद उसकी फाइल एक नवंबर 2018 को बंद कर दी थी।
जमानत के बाद नहीं हुई हाजिर
सिकदार की बेटी मुस्कान उर्फ बेबी को पुलिस ने हत्या का षड़यंत्र रचने के आरोप में जेल भेजा। उसकी हाईकोर्ट इलाहाबाद से ही जमानत मंजूर हो सकी। जमानत पर रिहा होने के बाद वह अदालत में हाजिर नहीं हुई। मुकदमे की सुनवाई के लिए उसकी फाइल 28 नवंबर 2016 को अलग कर दी गई।
जेल में रहकर लड़ा मुकदमा
हत्यारोपी ब्रजेश और उसके भाई राघवेंद्र की किसी भी अदालत से मुकदमे की सुनवाई के दौरान जमानत नहीं हुई। उनको पूरा मुकदमा जेल में रहकर ही लड़ना पड़ा। शुक्रवार को निर्णय सुनने के लिए उनको जेल से ही अदालत लाया गया। सजा सुनाए जाने के बाद उनको जेल भेज दिया गया।
प्रेम प्रसंग के चलते हुई थी हत्या
पुलिस की जांच में पता चला कि सिपाही की बेटी के प्रेम संबंध राघवेंद्र यादव से थे। सिकदार की हत्या से एक सप्ताह पहले सिकदार की ब्रजेश, राघवेंद्र और सत्यराम से कहासुनी हुई थी। इसके बाद मुस्कान ने अपने पिता की हत्या करने का षड़यंत्र रचा। वह पूरे घटनाक्रम में सक्रिय रूप से शामिल रही।
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थाना औंछा के नगला रामसिंह निवासी सिकदार सिंह यादव अलीगढ़ में हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात थे। 14 जून 2011 को वह गांव से ड्यूटी पर जा रहे थे।
मैनपुरी-औंछा मार्ग पर आटपुरा के पास सुबह नौ बजे उनकी गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई। उनके बेटे मनोज कुमार ने गांव के ही राघवेंद्र सिंह, उसके भाई ब्रजेश कुमार, पिता सत्यराम के खिलाफ हत्या करने की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने जांच के दौरान सिकदार की पुत्री मुस्कान उर्फ बेबी को हत्या का षड़यंत्र रचने का दोषी पाकर चारों के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई केे लिए चार्जशीट कोर्ट में भेज दी।
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मुकदमे की सुनवाई जिला जज विजेंद्र सिंह की कोर्ट में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से गवाहों ने हत्या करने के समर्थन में गवाही दी। गवाही के आधार पर राघवेंद्र और ब्रजेश कुमार को सिकदार की हत्या करने का दोषी पाया गया। डीजीसी वीरेंद्र कुमार मिश्रा, एडीजीसी अशोक कुमार पंकज ने आरोपियों को कड़ी सजा देने की दलील दी। जिला जज ने उनको आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोनों को 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी देना होगा।
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तमंचा रखने में एक हजार जुर्माना
पुलिस ने हत्यारोपी ब्रजेश की निशानदेही पर हत्या में प्रयोग किया गया तमंचा बरामद किया था। उसके खिलाफ तमंचा रखने का मुकदमा भी चला। तमंचा रखने के आरोप में उस पर एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। उसको एक साल की सजा भी सुनाई गई है।
मुकदमे के दौरान हुई मौत
हत्यारोपी सत्यराम यादव को पुलिस ने जेल भेजा। उसकी हाईकोर्ट से जमानत मंजूर हो गई। मुकदमे की सुनवाई के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने अदालत में सत्यराम की मौत की सूचना देने के बाद उसकी फाइल एक नवंबर 2018 को बंद कर दी थी।
जमानत के बाद नहीं हुई हाजिर
सिकदार की बेटी मुस्कान उर्फ बेबी को पुलिस ने हत्या का षड़यंत्र रचने के आरोप में जेल भेजा। उसकी हाईकोर्ट इलाहाबाद से ही जमानत मंजूर हो सकी। जमानत पर रिहा होने के बाद वह अदालत में हाजिर नहीं हुई। मुकदमे की सुनवाई के लिए उसकी फाइल 28 नवंबर 2016 को अलग कर दी गई।
जेल में रहकर लड़ा मुकदमा
हत्यारोपी ब्रजेश और उसके भाई राघवेंद्र की किसी भी अदालत से मुकदमे की सुनवाई के दौरान जमानत नहीं हुई। उनको पूरा मुकदमा जेल में रहकर ही लड़ना पड़ा। शुक्रवार को निर्णय सुनने के लिए उनको जेल से ही अदालत लाया गया। सजा सुनाए जाने के बाद उनको जेल भेज दिया गया।
प्रेम प्रसंग के चलते हुई थी हत्या
पुलिस की जांच में पता चला कि सिपाही की बेटी के प्रेम संबंध राघवेंद्र यादव से थे। सिकदार की हत्या से एक सप्ताह पहले सिकदार की ब्रजेश, राघवेंद्र और सत्यराम से कहासुनी हुई थी। इसके बाद मुस्कान ने अपने पिता की हत्या करने का षड़यंत्र रचा। वह पूरे घटनाक्रम में सक्रिय रूप से शामिल रही।