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जोंस मिल प्रकरण: संघर्ष समिति ने जिला प्रशासन पर उठाए सवाल, 'रिटायर्ड जज और राजस्व विभाग की टीम करें जांच'
Sun, 24 Jan 2021 10:57 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sun, 24 Jan 2021 10:57 AM IST
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जोंस मिल संघर्ष समिति के पदाधिकारी प्रेसवार्ता के दौरान
- फोटो : अमर उजाला
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जोंस मिल प्रकरण में जिला प्रशासन की कार्यवाही को लेकर शनिवार को जोंस मिल संघर्ष समिति ने मोर्चा खोल दिया। समिति ने प्रेसवार्ता में मांग की कि रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में राजस्व विभाग की टीम मामले की जांच करे। आगरा व्यापार मंडल के अध्यक्ष टीएन अग्रवाल ने कहा कि यह मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज व राजस्व अधिकारियों की कमेटी को इसकी नए सिरे से जांच करनी चाहिए।
जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बृजेंद्र रावत ने कहा कि 1940 में ही इस जमीन का मुंबई हाईकोर्ट ने मालिकाना हक तय कर दिया है। उसी आधार पर बैनामे हुए हैं। प्रशासन को जमीन की जांच का अधिकार नहीं है। संघर्ष समिति ने जिला प्रशासन से 23 खसरों की 128 बीघा भूमि के सरकारी स्वामित्व होने के दस्तावेज सौंपने की मांग की। कहा कि जिलाधिकारी को बैनामे शून्य करने का अधिकार नहीं है। प्रशासन को कोर्ट के फैसले पर कोई आपत्ति है तो कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए नोटिस दें।
अधूरे अभिलेखों के आधार पर जांच को पूर्ण कैसे मान लिया
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि प्रशासन द्वारा की गई जांच के अभिलेख अधूरे हैं। एक ओर नगर निगम से पूरे प्रपत्र जिलाधिकारी को नहीं मिले हैं, वहीं राजस्व विभाग लखनऊ से भी टीम बैरंग लौट कर आई है। फिर अधूरे अभिलेखों के आधार पर जांच को पूर्ण कैसे मान लिया गया है।
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जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बृजेंद्र रावत ने कहा कि 1940 में ही इस जमीन का मुंबई हाईकोर्ट ने मालिकाना हक तय कर दिया है। उसी आधार पर बैनामे हुए हैं। प्रशासन को जमीन की जांच का अधिकार नहीं है। संघर्ष समिति ने जिला प्रशासन से 23 खसरों की 128 बीघा भूमि के सरकारी स्वामित्व होने के दस्तावेज सौंपने की मांग की। कहा कि जिलाधिकारी को बैनामे शून्य करने का अधिकार नहीं है। प्रशासन को कोर्ट के फैसले पर कोई आपत्ति है तो कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए नोटिस दें।
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अधूरे अभिलेखों के आधार पर जांच को पूर्ण कैसे मान लिया
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि प्रशासन द्वारा की गई जांच के अभिलेख अधूरे हैं। एक ओर नगर निगम से पूरे प्रपत्र जिलाधिकारी को नहीं मिले हैं, वहीं राजस्व विभाग लखनऊ से भी टीम बैरंग लौट कर आई है। फिर अधूरे अभिलेखों के आधार पर जांच को पूर्ण कैसे मान लिया गया है।
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जोंस मिल
- फोटो : अमर उजाला
किया जाएगा आंदोलन
दीपक सिंह तोमर ने कहा कि दशकों से हम यहां रह रहे हैं। अगर प्रशासन ने हमारे आशियाने उजाड़े तो हम सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे। जोंस मिल लाइन से गरीब नगर तक जुड़ी बस्तियों में 35 हजार से अधिक लोग निवास कर रहे हैं।
18 साल पूर्व जैन मार्केट का नक्शा हो चुका पास
समिति के अरुण गुप्ता ने बताया कि प्रशासन जीवनी मंडी स्थित जैन मार्केट को पुलिस चौकी को जगह का दावा कर रहा है। 2002 में एडीए ने नक्शा पास किया। ऐसे में प्रशासन का दावा गलत है।
कई संगठन साथ आए
संघर्ष समिति से जुड़े व्यापारियों की इस लड़ाई में नेशनल चैंबर, आगरा व्यापार मंडल और बार एसोसिएशन ने भी अपना समर्थन व्यक्त किया है। इस दौरान व्यापार मंडल के अध्यक्ष टीएन अग्रवाल, चैंबर अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बृजेंद्र रावत एडवोकेट, खाटू श्याम मंदिर के अध्यक्ष अनिल मितल, जोंस मिल संघर्ष समिति के संरक्षक ब्रजमोहन अग्रवाल, दयानंद नागरानी, मुकेश जैन, अतुल बंसल, प्रमोद अग्रवाल, अनिल जैन, विशाल बंसल, हर्ष गुप्ता, पंकज बंसल, मनोज अग्रवाल, मनीष आदि मौजूद रहे।
दीपक सिंह तोमर ने कहा कि दशकों से हम यहां रह रहे हैं। अगर प्रशासन ने हमारे आशियाने उजाड़े तो हम सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे। जोंस मिल लाइन से गरीब नगर तक जुड़ी बस्तियों में 35 हजार से अधिक लोग निवास कर रहे हैं।
18 साल पूर्व जैन मार्केट का नक्शा हो चुका पास
समिति के अरुण गुप्ता ने बताया कि प्रशासन जीवनी मंडी स्थित जैन मार्केट को पुलिस चौकी को जगह का दावा कर रहा है। 2002 में एडीए ने नक्शा पास किया। ऐसे में प्रशासन का दावा गलत है।
कई संगठन साथ आए
संघर्ष समिति से जुड़े व्यापारियों की इस लड़ाई में नेशनल चैंबर, आगरा व्यापार मंडल और बार एसोसिएशन ने भी अपना समर्थन व्यक्त किया है। इस दौरान व्यापार मंडल के अध्यक्ष टीएन अग्रवाल, चैंबर अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बृजेंद्र रावत एडवोकेट, खाटू श्याम मंदिर के अध्यक्ष अनिल मितल, जोंस मिल संघर्ष समिति के संरक्षक ब्रजमोहन अग्रवाल, दयानंद नागरानी, मुकेश जैन, अतुल बंसल, प्रमोद अग्रवाल, अनिल जैन, विशाल बंसल, हर्ष गुप्ता, पंकज बंसल, मनोज अग्रवाल, मनीष आदि मौजूद रहे।
जोंस मिल के अवशेष तोड़कर बनाई गई हैं बिल्डिंगें
आगरा। जोंस मिल का ढांचा तोड़कर भूमाफिया ने अरबों की संपत्ति कमाई। मार्केट, बिल्डिंग, ट्रांसपोर्ट के गोदाम, मैरिज होम, पेट्रोल पंप व अन्य निर्माण हो गए। पुलिस, सिंचाई व नगर निगम जमीन भी नहीं छोड़ी। फिर भी उत्तरादायी विभाग अपनी जमीनों पर कब्जा लेने में ढिलाई बरत रहे हैं।
तहसील सर्वे के मुताबिक घटवासन के गाटा 2087 में 55 निर्माण ऐसे हैं जिनकी दस्तावेज जांच टीम को नहीं मिले। जोंस मिल के अवशेष तक नहीं बचे। मिल के ढांचे को तोड़कर 150 से अधिक दुकानें, मार्केट, व्यावसायिक भवन, पेट्रोल पंप से लेकर मॉल व अन्य निर्माण खड़े कर दिए। दूसरी तरफ गाटा 2078 में 5016.66 वर्ग मीटर नहर भूमि के नामांतरण में भी तहसील प्रशासन की लापरवाही सामने आई है। तत्कालीन तहसीलदार, लेखपाल व राजस्व कर्मियों ने नहर भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में 2008 में बिल्डर के नाम दर्ज कर दिया। फिर आपत्तियां आने पर 2013 में नामांतरण खारिज करना पड़ा।
जल्द लेंगे कब्जा
संबंधित विभागों को अपनी जमीन पर कब्जा लेने के निर्देश दिए हैं। जल्द समीक्षा होगी। कब्जा लेने के लिए प्रशासन फोर्स भी उपलब्ध कराएगा। - प्रभु एन सिंह, जिलाधिकारी
आगरा। जोंस मिल का ढांचा तोड़कर भूमाफिया ने अरबों की संपत्ति कमाई। मार्केट, बिल्डिंग, ट्रांसपोर्ट के गोदाम, मैरिज होम, पेट्रोल पंप व अन्य निर्माण हो गए। पुलिस, सिंचाई व नगर निगम जमीन भी नहीं छोड़ी। फिर भी उत्तरादायी विभाग अपनी जमीनों पर कब्जा लेने में ढिलाई बरत रहे हैं।
तहसील सर्वे के मुताबिक घटवासन के गाटा 2087 में 55 निर्माण ऐसे हैं जिनकी दस्तावेज जांच टीम को नहीं मिले। जोंस मिल के अवशेष तक नहीं बचे। मिल के ढांचे को तोड़कर 150 से अधिक दुकानें, मार्केट, व्यावसायिक भवन, पेट्रोल पंप से लेकर मॉल व अन्य निर्माण खड़े कर दिए। दूसरी तरफ गाटा 2078 में 5016.66 वर्ग मीटर नहर भूमि के नामांतरण में भी तहसील प्रशासन की लापरवाही सामने आई है। तत्कालीन तहसीलदार, लेखपाल व राजस्व कर्मियों ने नहर भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में 2008 में बिल्डर के नाम दर्ज कर दिया। फिर आपत्तियां आने पर 2013 में नामांतरण खारिज करना पड़ा।
जल्द लेंगे कब्जा
संबंधित विभागों को अपनी जमीन पर कब्जा लेने के निर्देश दिए हैं। जल्द समीक्षा होगी। कब्जा लेने के लिए प्रशासन फोर्स भी उपलब्ध कराएगा। - प्रभु एन सिंह, जिलाधिकारी