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जोंस मिल आगरा: भटक रहे निवेशक, भूमाफिया के कब्जे में 107 करोड़ की भूमि; जानें क्या है मामला

Sun, 22 Oct 2023 01:51 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला, आगरा
अमर उजाला, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sun, 22 Oct 2023 01:51 PM IST
सार

जोंस मिल में नजूल व शासकीय भूमि को जनहित में कब्जा मुक्त कराने के लिए तीन साल पहले  संस्तुति की गई थी, लेकिन अभी तक प्रशासन खाली हाथ है। 
 

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Jones Mill Agra Investors wandering land worth Rs 107 crore in the possession of land mafia
जोंस मिल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा में निवेशक जमीन के लिए भटक रहे हैं। उन्हें भूमि उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इधर, जोंस मिल में 107.51 करोड़ रुपये कीमत की नजूल व सरकारी भूमि पर भूमाफिया काबिज हैं। तीन साल पहले दिसंबर 2020 में एडीएम प्रशासन ने भूमि को तत्काल कब्जा मुक्त कराने की संस्तुति डीएम को भेजी थी, लेकिन एक इंच भूमि प्रशासन खाली नहीं करा सका।
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ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए जमीन भी बाधा बन रही है। फरवरी 2023 में ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में आगरा के लिए 301 निवेशकों ने 3.35 लाख करोड़ रुपये के करार किए थे। आठ महीने बाद करीब 10 हजार करोड़ रुपये के प्रस्ताव ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के लिए तैयार हो सके हैं। बड़ी संख्या में ऐसे निवेशक हैं जिन्हें अपने प्रोजेक्ट के लिए भूमि नहीं मिल रही। पशुपालन में निवेश के लिए आवेदन करने वाले वीरेंद्र परिहार ने बताया कि उन्हें जमीन नहीं मिल रही। एक अन्य निवेशक रवि बघेल का कहना है कि जमीन नहीं मिलने के कारण उनका प्रोजेक्ट अधर में लटका है।
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इधर, शहर के बीचोबीच जीवनी मंडी में बेशकीमती नजूल व सरकारी भूमि पर भूमाफिया काबिज हैं। वर्तमान सर्किल रेट से भूमि की कीमत करीब 107.51 करोड़ रुपये आंकी गई है। जबकि बाजार मूल्य 250 करोड़ रुपये से अधिक है। जीवनी मंडी स्थित जोंस मिल में वर्ष 1906 में जोंस परिवार को तत्कालीन कलक्टर ने विभिन्न शर्तों व नियमों के तहत नजूल व सरकारी भूमि उपलब्ध कराई थी। 1936 में जोंस की मौत हो गई, जिसके बाद भूमाफिया ने नजूल भूमि कब्जा ली। कूटरचित दस्तावेजों से खरीद-फरोख्त करते हुए अरबों रुपये की संपत्ति अर्जित की। दिसंबर 2020 में तत्कालीन एडीएम प्रशासन निधि श्रीवास्तव ने डीएम को रिपोर्ट भेजी। जिसमें 107.51 करोड़ रुपये भूमि को तत्काल जनहित में कब्जा मुक्त कराने की संस्तुति की गई, लेकिन तीन साल बाद भी प्रशासन भूमाफिया व अवैध कब्जेदारों से एक इंच भूमि वापस नहीं ले सका है।
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जेवर गया 1.54 लाख करोड़ का निवेश
हांगकांग की कंपनी को सेमी कंडक्टर बनाने की फैक्टरी लगाने के लिए 500 एकड़ भूमि प्रशासन उपलब्ध नहीं करा सका। कंपनी को 1.54 लाख करोड़ का निवेश करना था। यह प्रदेश का सबसे बड़ा सेमी कंडक्टर प्लांट होता। जमीन नहीं मिलने से कंपनी ने अब आगरा की जगह जेवर में निवेश की योजना बनाई है। मंडलायुक्त रितु माहेश्वरी ने  बताया कि भूमाफिया का बिंदु समीक्षा में शामिल है। बैठक में प्रगति पर चर्चा होगी। जिला स्तर पर क्या-क्या कार्रवाई की गई, उसकी रिपोर्ट मांगी है। 
 
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