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आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर हैवी ट्रैफिक की नो एंट्री
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर हैवी ट्रैफिक की नो एंट्री
Updated Wed, 12 Apr 2017 12:54 AM IST
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आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर हैवी ट्रैफिक की नो एंट्री
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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फीता कटने के बाद लगभग साढ़े चार महीने बाद भी आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पूरी तरह से नहीं खुल पाया है। सपा सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक इस एक्सप्रेसवे पर अभी भी भारी वाहनों का प्रवेश वर्जित है। 13200 करोड़ की लागत से बने देश के सबसे लंबे इस एक्सप्रेसवे पर फिलहाल सिर्फ कारें ही दौड़ रही हैं।
विधानसभा चुनाव को देखते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आनन-फानन में पिछले साल 21 नवंबर को अधूरे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे का उद्घाटन कर दिया। तब कई जगह रोड निर्माण का काम भी पूरा नहीं हुआ था। अखिलेश यादव का यह ड्रीम प्रोजेक्ट सत्ता जाने के बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। जगह-जगह निर्माण कार्य अभी जारी है। यही वजह है कि बस-ट्रक आदि भारी वाहनों के लिए इसे नहीं खोला गया है। आगरा की ओर से इस एक्सप्रेसवे पर चढ़ने वाले लूप पर ‘लो हाईट बैरियर’ लगा दिए हैं। ऐसा ही बैरियर लखनऊ से आगरा की ओर उतरने वाले लूप पर लगाया गया है। ताकि भारी न तो इस एक्सप्रेसवे पर चढ़ सकें और न ही उतर सकें। बीच में कहीं कट से यदि कोई ट्रक चढ़ भी जाता है तो चालक के पास सिवाय लौटने के दूसरा चारा नहीं है। यानी 22 महीने में इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का दंभ भरने वाले अधिकारी इस पर हेवी ट्रैफिक शुरू नहीं कर सके हैं। इसकी वजह से रोडवेज यात्रियों को भी इस एक्सप्रेसवे का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
हादसों को न्यौता दे रहे अधूरे काम
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाले लूप का कार्य अभी भी अधूरा है। इसकी साइड बैरिकेटिंग अभी तक नहीं लग सकी हैं। इसकी वजह से यहां हादसों का डर बना हुआ है। एक्सप्रेसवे पर भी कई जगह रोड साइड कार्य नहीं हुए हैं। जगह-जगह गिट्टी के ढेर लगे हुए हैं। जंगली जानवरों के अचानक रोड पर आने का खतरा भी बना हुआ है।
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एक्सप्रेसवे पर अभी से बने अवैध कट
इस हाई स्पीड वाले एक्सप्रेसवे पर अभी से अवैध कट बना दिए हैं। कोई भी वाहन एक्सप्रेसवे पर आ सकता है। इसकी वजह से गंभीर हादसा हो सकता है। एक्सप्रेसवे की साइड बैरिकेडिंग इतनी नीची है कि राहगीर अपनी बाइक को उठाकर एक्सप्रेसवे पर उतार देते हैं।
साइनेज के अभाव में लखनऊ से
नोएडा जाने वाले पहुंच रहे आगरा
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर अभी तक दिशा सूचक साइनेज नहीं लगे हैं। इसकी वजह से चालक भ्रमित हो रहे हैं। लखनऊ की ओर से नोएडा जाने वाले लोग लूप देखकर अपनी गाड़ी यमुना एक्सप्रेसवे पर उतार दे रहे हैं। बाद में जब उन्हें पता चलता है कि इस लूप के माध्यम से तो आगरा में प्रवेश कर जाएंगे तो वह इसी लूप पर रॉग साइड से अपना वाहन लौटा ले जाते हैं। यह भी हादसों की एक वजह बन रहा है। दरअसल, लखनऊ की ओर से आने वालों के लिए एक भी ऐसा साइनेज नहीं है, जिससे पता चल सके कि कौन सा रास्ता नोएडा और कौन सा आगरा के लिए है।
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर फिलहाल भारी वाहनों को चलने की अनुमति नहीं दी गई है। यह रोक शासन स्तर से ही है। संभवत: मई तक एक्सप्रेसवे के सभी कार्य पूरे कर लिए जाएंगे।
- केसी जैन, एक्सईएन, यूपीडा
302 किमी लंबा है ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे
13200 करोड़ रुपये लागत है इस प्रोजेक्ट की
22 महीने में बनकर तैयार हुआ यह एक्सप्रेसवे
3,500 हेक्टेयर जमीन का किया गया था अधिग्रहण
30,456 किसानों ने दी है अपनी जमीन
06 लेन का है देश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे
3.30 घंटे में पूरा होगा आगरा से लखनऊ का सफर
21 नवंबर 2016 को हुआ था शुभारंभ
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विधानसभा चुनाव को देखते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आनन-फानन में पिछले साल 21 नवंबर को अधूरे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे का उद्घाटन कर दिया। तब कई जगह रोड निर्माण का काम भी पूरा नहीं हुआ था। अखिलेश यादव का यह ड्रीम प्रोजेक्ट सत्ता जाने के बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। जगह-जगह निर्माण कार्य अभी जारी है। यही वजह है कि बस-ट्रक आदि भारी वाहनों के लिए इसे नहीं खोला गया है। आगरा की ओर से इस एक्सप्रेसवे पर चढ़ने वाले लूप पर ‘लो हाईट बैरियर’ लगा दिए हैं। ऐसा ही बैरियर लखनऊ से आगरा की ओर उतरने वाले लूप पर लगाया गया है। ताकि भारी न तो इस एक्सप्रेसवे पर चढ़ सकें और न ही उतर सकें। बीच में कहीं कट से यदि कोई ट्रक चढ़ भी जाता है तो चालक के पास सिवाय लौटने के दूसरा चारा नहीं है। यानी 22 महीने में इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का दंभ भरने वाले अधिकारी इस पर हेवी ट्रैफिक शुरू नहीं कर सके हैं। इसकी वजह से रोडवेज यात्रियों को भी इस एक्सप्रेसवे का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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हादसों को न्यौता दे रहे अधूरे काम
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाले लूप का कार्य अभी भी अधूरा है। इसकी साइड बैरिकेटिंग अभी तक नहीं लग सकी हैं। इसकी वजह से यहां हादसों का डर बना हुआ है। एक्सप्रेसवे पर भी कई जगह रोड साइड कार्य नहीं हुए हैं। जगह-जगह गिट्टी के ढेर लगे हुए हैं। जंगली जानवरों के अचानक रोड पर आने का खतरा भी बना हुआ है।
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एक्सप्रेसवे पर अभी से बने अवैध कट
इस हाई स्पीड वाले एक्सप्रेसवे पर अभी से अवैध कट बना दिए हैं। कोई भी वाहन एक्सप्रेसवे पर आ सकता है। इसकी वजह से गंभीर हादसा हो सकता है। एक्सप्रेसवे की साइड बैरिकेडिंग इतनी नीची है कि राहगीर अपनी बाइक को उठाकर एक्सप्रेसवे पर उतार देते हैं।
साइनेज के अभाव में लखनऊ से
नोएडा जाने वाले पहुंच रहे आगरा
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर अभी तक दिशा सूचक साइनेज नहीं लगे हैं। इसकी वजह से चालक भ्रमित हो रहे हैं। लखनऊ की ओर से नोएडा जाने वाले लोग लूप देखकर अपनी गाड़ी यमुना एक्सप्रेसवे पर उतार दे रहे हैं। बाद में जब उन्हें पता चलता है कि इस लूप के माध्यम से तो आगरा में प्रवेश कर जाएंगे तो वह इसी लूप पर रॉग साइड से अपना वाहन लौटा ले जाते हैं। यह भी हादसों की एक वजह बन रहा है। दरअसल, लखनऊ की ओर से आने वालों के लिए एक भी ऐसा साइनेज नहीं है, जिससे पता चल सके कि कौन सा रास्ता नोएडा और कौन सा आगरा के लिए है।
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर फिलहाल भारी वाहनों को चलने की अनुमति नहीं दी गई है। यह रोक शासन स्तर से ही है। संभवत: मई तक एक्सप्रेसवे के सभी कार्य पूरे कर लिए जाएंगे।
- केसी जैन, एक्सईएन, यूपीडा
302 किमी लंबा है ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे
13200 करोड़ रुपये लागत है इस प्रोजेक्ट की
22 महीने में बनकर तैयार हुआ यह एक्सप्रेसवे
3,500 हेक्टेयर जमीन का किया गया था अधिग्रहण
30,456 किसानों ने दी है अपनी जमीन
06 लेन का है देश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे
3.30 घंटे में पूरा होगा आगरा से लखनऊ का सफर
21 नवंबर 2016 को हुआ था शुभारंभ