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जन्माष्टमीः सुहागनगरी में द्वारिकाधीश मंदिर में उमड़ेगा भक्तों का सैलाब
Fri, 23 Aug 2019 04:15 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 23 Aug 2019 04:15 AM IST
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द्वारिकाधीश मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
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कृष्णापाडा स्थित द्वारिकाधीश मंदिर 140 वर्ष प्राचीन है। इसकी स्थापना सन् 1879 में की गई थी। सेठ कन्हैयालाल गोइंका ने इस मंदिर की नींव रखी थी। इस मंदिर से हजारों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हैं। सुहागनगरी का इतिहास भी इसी मंदिर से जुड़ा हुआ है। जन्माष्टमी पर भव्य कार्यक्रम इस मंदिर में होते हैं।
द्वारिकाधीश मंदिर में द्वारिकाधीश भगवान की भव्य एवं सुंदर प्रतिमा विराजमान है। जिसे देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो जाते हैं। मंदिर में जन्माष्टमी पर भव्य कार्यक्रम होते हैं।
यहां दर्शन करने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु आते हैं। प्रथम महंत के रूप में द्वारिकाधीश की सेवा पंडित चरनजी लाल गौड़ ने की थी। वर्तमान में सेवा महंत पंडित अभिषेक गौड़ कर रहे हैं।
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द्वारिकाधीश मंदिर में द्वारिकाधीश भगवान की भव्य एवं सुंदर प्रतिमा विराजमान है। जिसे देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो जाते हैं। मंदिर में जन्माष्टमी पर भव्य कार्यक्रम होते हैं।
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यहां दर्शन करने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु आते हैं। प्रथम महंत के रूप में द्वारिकाधीश की सेवा पंडित चरनजी लाल गौड़ ने की थी। वर्तमान में सेवा महंत पंडित अभिषेक गौड़ कर रहे हैं।
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इसी मंदिर से शुरू हुआ रामलीला का मंचन
इसी द्वारिकाधीश मंदिर से ही सनात धर्म रामलीला महोत्सव की शुरुआत हुई थी। करीब सौ वर्ष पूर्व इसी मंदिर से रामलीला के मंचन का आगाज हुआ था। भीड़ जुटना शुरू होने लगी तो रामलीला के लिए कैला देवी मंदिर के निकट मैदान को चुन लिया गया।
इस मंदिर में हुआ शहर का पहला बिजली कनेक्शन
जब सुहागनगरी में बिजली आई थी, चर्चा थी कि पहला कनेक्शन कहां दिया जाए। लोगों ने द्वारिकाधीश मंदिर में पहला विद्युत कनेक्शन कराया। इस मंदिर में विद्युत कनेक्शन संख्या एक है।
द्वारिकाधीश मंदिर के महंत पंडित अभिषेक गौड़ ने कहा कि यह मंदिर आस्था से जुड़ा हुआ है। करीब 140 वर्ष इस मंदिर को हो चुके हैं। त्योहारों पर यहां भक्तों की भीड़ लगती है। प्रति दिन भक्तजन यहां पूजा करने के लिए आते हैं।
जन्माष्टमी पर होंगे कार्यक्रम
महंत अवधेश गौड़ ने बताया कि द्वारिकाधीश मंदिर में शाम को भव्य झांकी मंदिर में सजाई जाएगी। फूल बंगला कारीगरों द्वारा कराया गया। प्रसाद का वितरण कराया जाएगा। रात में दर्शन होंगे।
इसी द्वारिकाधीश मंदिर से ही सनात धर्म रामलीला महोत्सव की शुरुआत हुई थी। करीब सौ वर्ष पूर्व इसी मंदिर से रामलीला के मंचन का आगाज हुआ था। भीड़ जुटना शुरू होने लगी तो रामलीला के लिए कैला देवी मंदिर के निकट मैदान को चुन लिया गया।
इस मंदिर में हुआ शहर का पहला बिजली कनेक्शन
जब सुहागनगरी में बिजली आई थी, चर्चा थी कि पहला कनेक्शन कहां दिया जाए। लोगों ने द्वारिकाधीश मंदिर में पहला विद्युत कनेक्शन कराया। इस मंदिर में विद्युत कनेक्शन संख्या एक है।
द्वारिकाधीश मंदिर के महंत पंडित अभिषेक गौड़ ने कहा कि यह मंदिर आस्था से जुड़ा हुआ है। करीब 140 वर्ष इस मंदिर को हो चुके हैं। त्योहारों पर यहां भक्तों की भीड़ लगती है। प्रति दिन भक्तजन यहां पूजा करने के लिए आते हैं।
जन्माष्टमी पर होंगे कार्यक्रम
महंत अवधेश गौड़ ने बताया कि द्वारिकाधीश मंदिर में शाम को भव्य झांकी मंदिर में सजाई जाएगी। फूल बंगला कारीगरों द्वारा कराया गया। प्रसाद का वितरण कराया जाएगा। रात में दर्शन होंगे।