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बंद हो सकती है जयपुर-आगरा शताब्दी
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Thu, 06 Aug 2015 01:53 AM IST
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जयपुर से आगरा के बीच चलने वाली जयपुर-आगरा फोर्ट शताब्दी का संचालन बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। इस वीवीआईपी ट्रेन को यात्री नहीं मिल पा रहे हैं। इस कारण न तो रेलवे का खर्च निकल रहा और न ही कैटरिंग सुविधा देने वाली कंपनी का। अगर ऐसा ही चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं, जब इसे बंद करने की नौबत आ जाएगी।
दो साल पहले रेलवे ने देश की इस 17वीं शताब्दी को बड़ी उम्मीद के साथ चलाया था, ताकि ताजनगरी से गुलाबीनगरी तक पर्यटकों को एक लग्जरी ट्रेन की सुविधा मिल सके। मगर अब इसके संचालन पर ही संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
छह कोचों (5 चेयर कार और एक एग्जीक्यूटिव कोच) की इस गाड़ी में 892 सीटें हैं, लेकिन प्रत्येक दिन महज 200-250 यात्री (अप-डाउन) की बुकिंग हो रही है। बुधवार को जयपुर से 251 यात्रियों ने ही सफर किया। इस बारे में जयपुर मंडल के एक अधिकारी ने बताया कि इस गाड़ी को सबसे कम यात्री मिल रहे हैं। इससे रेलवे को लाभ नहीं हो रहा।
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टाइम बदलने से घट गए यात्री
ट्रेन स्टाफ की मानें तो यात्री घटने की वजह इसके टाइम में किया गया बदलाव है। ट्रेन शुरुआती दौर में जयपुर से सुबह 7:05 बजे चलती थी, जो आगरा फोर्ट स्टेशन पर 10:35 बजे पहुंचती थी। यहां से शाम 4:20 बजे चलती थी और जयपुर शाम 6:50 बजे पहुंच जाती थी। इसलिए लोगों को जयपुर पहुंचने में भी कोई दिक्कत नहीं होती थी। लेकिन अब इस ट्रेन का टाइम आगरा फोर्ट से शाम 5:40 बजे कर दिया है, जो जयपुर रात 9:20 बजे पहुंचती है। इस कारण पर्यटकों को वहां होटल खोजने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
ट्रेन में स्टाफ
दो लोको पायलट, एक गार्ड, एक डीजल फीडर, दो आरएसी, एक सी एंड डब्ल्यू, दो टीटीई, दो सफाई कर्मी के अलावा 12 से अधिक कैटरिंग स्टाफ चलता है।
भारी है डीजल की खपत
गाड़ी डीजल से संचालित होती है। इसमें छह कोच हैं, जिनमें एसी चलता है। दो जनरेट कार हैं। इंजन एक घंटा में करीब 105 लीटर डीजल की खपत करता है। वहीं दोनों जनरेटर भी दो सौ लीटर डीजल प्रति घंटा खर्च करते हैं।
बसों के कारण भी शताब्दी को नहीं मिल रही सवारियां
आगरा से जयपुर जाने के लिए बहुत साधन हैं। सुबह से रात तक राजस्थान रोडवेज की लग्जरी एसी, नॉन एसी बसें हर आधा घंटा में जाती हैं। वहीं प्राइवेट ट्रेवल से भी स्लीपर, नॉन स्लीपर, एसी बसें जयपुर के लिए चौबीस घंटे चलती हैं। इस कारण लोग ट्रेन से अधिक बसों को प्राथमिकता देते हैं। शताब्दी और बस दोनों से पहुंचने तकरीबन बराबर समय ही लगता है।
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दो साल पहले रेलवे ने देश की इस 17वीं शताब्दी को बड़ी उम्मीद के साथ चलाया था, ताकि ताजनगरी से गुलाबीनगरी तक पर्यटकों को एक लग्जरी ट्रेन की सुविधा मिल सके। मगर अब इसके संचालन पर ही संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
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छह कोचों (5 चेयर कार और एक एग्जीक्यूटिव कोच) की इस गाड़ी में 892 सीटें हैं, लेकिन प्रत्येक दिन महज 200-250 यात्री (अप-डाउन) की बुकिंग हो रही है। बुधवार को जयपुर से 251 यात्रियों ने ही सफर किया। इस बारे में जयपुर मंडल के एक अधिकारी ने बताया कि इस गाड़ी को सबसे कम यात्री मिल रहे हैं। इससे रेलवे को लाभ नहीं हो रहा।
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टाइम बदलने से घट गए यात्री
ट्रेन स्टाफ की मानें तो यात्री घटने की वजह इसके टाइम में किया गया बदलाव है। ट्रेन शुरुआती दौर में जयपुर से सुबह 7:05 बजे चलती थी, जो आगरा फोर्ट स्टेशन पर 10:35 बजे पहुंचती थी। यहां से शाम 4:20 बजे चलती थी और जयपुर शाम 6:50 बजे पहुंच जाती थी। इसलिए लोगों को जयपुर पहुंचने में भी कोई दिक्कत नहीं होती थी। लेकिन अब इस ट्रेन का टाइम आगरा फोर्ट से शाम 5:40 बजे कर दिया है, जो जयपुर रात 9:20 बजे पहुंचती है। इस कारण पर्यटकों को वहां होटल खोजने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
ट्रेन में स्टाफ
दो लोको पायलट, एक गार्ड, एक डीजल फीडर, दो आरएसी, एक सी एंड डब्ल्यू, दो टीटीई, दो सफाई कर्मी के अलावा 12 से अधिक कैटरिंग स्टाफ चलता है।
भारी है डीजल की खपत
गाड़ी डीजल से संचालित होती है। इसमें छह कोच हैं, जिनमें एसी चलता है। दो जनरेट कार हैं। इंजन एक घंटा में करीब 105 लीटर डीजल की खपत करता है। वहीं दोनों जनरेटर भी दो सौ लीटर डीजल प्रति घंटा खर्च करते हैं।
बसों के कारण भी शताब्दी को नहीं मिल रही सवारियां
आगरा से जयपुर जाने के लिए बहुत साधन हैं। सुबह से रात तक राजस्थान रोडवेज की लग्जरी एसी, नॉन एसी बसें हर आधा घंटा में जाती हैं। वहीं प्राइवेट ट्रेवल से भी स्लीपर, नॉन स्लीपर, एसी बसें जयपुर के लिए चौबीस घंटे चलती हैं। इस कारण लोग ट्रेन से अधिक बसों को प्राथमिकता देते हैं। शताब्दी और बस दोनों से पहुंचने तकरीबन बराबर समय ही लगता है।