Agra: आइसोलेशन से ‘कोमा’ में पहुंचे रेलवे के 28 कोच, कोरोना काल में 56 लाख की लागत से बनाए गए थे
कोरोना आपातकालीन हालात से निपटने के लिए आगरा में 28 कोचों का आइसोलेशन तैयार किया गया था। प्रत्येक कोच पर करीब दो लाख रुपये का खर्च आया था। अब यह कोच कबाड़ हो रहे हैं।
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कोरोना काल में आपातकाल की स्थिति से निपटने के लिए आगरा रेल मंडल में 28 आइसोलेशन कोच दो साल बाद अब कोमा के हालात में पहुंच चुके हैं। तकरीबन 56 लाख रुपये की लागत से तैयार किए गए यह कोच आगरा में संक्रमण चरम पर होने के बाद भी इस्तेमाल नहीं किए जा सके। दो साल बीतने के बाद अनुपयोगी हो चुके कोच कबाड़ में बदलने लगे हैं। इनके बारे में रेलवे कोई निर्णय नहीं ले पा रहा है।
रेलवे के कैरिज एंड वैगन विभाग ने मार्च 2020 में आपातकालीन हालात से निपटने के लिए देशभर के साथ ही आगरा में भी 28 कोचों का आइसोलेशन तैयार किया गया था। प्रत्येक कोच पर करीब दो लाख रुपये का खर्च आया था। कोच में ऑक्सीजन सिलिंडर, ड्रिप सेट के साथ ही जरूरी उपकरण लगवाए गए थे। खिड़कियों को टेप लगाकर बंद करके इन्हें वार्ड का रूप दिया गया था। आगरा में यह कोच संक्रमण की दो लहरों में प्रयोग में नहीं लाए गए। हालांकि गुजरात और पूर्वोत्तर के राज्यों में इन कोचों का इस्तेमाल दूसरी लहर में किया गया था।
धूल की परतें, कोचों पर ताले
आगरा कैंट स्टेशन के यार्ड के नजदीक यह कोच दो साल बीतने के बाद भी खडे़ हुए हैं। देखरेख नहीं होने के कारण इनकी खिड़कियों के टेप उखड़ चुके हैं। धूल की मोटी परतें जमा हो गई हैं। कोच धूप और बरसात में खराब हो रहे हैं, लेकिन इनका क्या इस्तेमाल किया जाएगा, इस बारे में रेलवे बोर्ड दो साल बाद भी आदेश जारी नहीं कर सका है।