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खूनी हाईवे पर 12 घंटे में 12 की मौत, मचा कोहराम
खूनी हाईवे पर 12 घंटे में 12 की मौत, मचा कोहराम
Updated Mon, 06 Mar 2017 12:59 AM IST
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खूनी हाईवे पर 12 घंटे में 12 की मौत, मचा कोहराम
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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दिल्ली-आगरा नेशनल हाईवे पर 12 घंटे में 12 लोगों की मौत से कोहराम मच गया। ट्रांसपोर्ट नगर के आईएसबीटी के पास जिस स्थान पर शनिवार रात को हादसा हुआ था, उसी स्थान पर रविवार सुबह भी भीषण हादसे ने सभी को हिला दिया। शनिवार रात को एक हादसे में पांच तो रविवार सुबह हुए दूसरे हादसे में सात लोगों की मौत हो गई।
बता दें, शनिवार रात को साढ़े नौ बजे दिल्ली की ओर से आती इनोवा गाड़ी आईएसबीटी के पास बेकाबू हो गई थी। इनोवा डिवाइडर से टकराने के बाद दूसरे रोड पर आ रही आल्टो से टकरा गई थी। हादसे में आल्टो सवार चार लोगों की मौत हो गई थी, जबकि एक राहगीर महिला की भी मौत हुई थी। मृतकों में हरीपर्वत के सुल्तानगंज पुलिया निवासी राकेश कुमार (50), उनका बेटा ऋषभ (16), भांजा हाकू पुत्र रतनलाल (रोहता), किराएदार का बेटा विवेक कुमार पुत्र सतीश थे। वहीं एक मृतक महिला नीरू शर्मा की रविवार को शिनाख्त हो गई। इनोवा चला रहा युवक घायल हो गया था। इस घटना को 12 घंटे ही बीते थे कि रविवार सुबह 10:30 बजे कंटेनर ने आईएसबीटी के पास ही पांच आटो को जबर्दस्त टक्कर मार दी। हादसे में आटो पीछे से पिचक गए। दो आटो के तो परखच्चे उड़ गए। हादसे में सात लोगों की मौत हो गई। वहीं दस लोग घायल हो गए। घटना के बाद मौके पर पहुंचे लोग यही कह रहे थे कि कुछ ही घंटे में हाईवे खूनी बन गया। हादसे का मंजर देखकर लोगों के दिल दहल गए। आटो पलटने के बाद मृतकों के शव सड़क पर बिखर गए। वहीं घायल आटो में फंसे चीखपुकार मचा रहे थे। पहले राहगीर और वाहन चालकों ने लोगों को बाहर निकाला, बाद में पुलिस के पहुंचने पर सभी को अस्पताल भेजा गया।
उधर, प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि सूचना पर पुलिस तो पहुंच गई, लेकिन एंबुलेंस नहीं आई थी। इसकी वजह से घायलों को अस्पताल पहुंचाने में काफी देर लगी। लोगों में पुलिस के प्रति गुस्सा था। हाईवे पर जाम लगने के कारण वाहनों की लंबी लाइन लग गई। पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए लाठियां भी फटकारीं। इससे हाईवे पर भगदड़ मच गई। बाद में दुर्घटनाग्रस्त सभी आटो को क्रेन की मदद से हटाया गया। तब कहीं जाकर वाहनों का आवागमन सुचारु हो सका।
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पुलिस की लापरवाही से हुआ दूसरा हादसा
आगरा। आईएसबीटी पर शनिवार रात को हुए हादसे के 12 घंटे बाद रविवार को हुई दुघर्टना के पीछे लोग पुलिस की लापरवाही को जिम्मेदार मान रहे हैं। लोगों का आरोप था कि इनोवा से हुए हादसे के बाद भी पुलिस अधिकारियों ने स्थिति को भांपना जरूरी नहीं समझा। एसपी ट्रैफिक भी नहीं आए। रविवार को घटना स्थल पर न तो कोई पुलिस कर्मी तैनात था और न ही किसी तरह के बैरियर लगाए गए।
गैलाना निवासी महेश पिप्पल ने बताया कि हादसे की जानकारी पर वह मौके पर आ गए। उनका आरोप था कि जिस स्थान पर हादसा हुआ वहां पर बड़ी संख्या में बस खड़ी रहती हैं। आटो भी रुकते हैं। यहां पर कट नहीं बना है। सर्विस रोड की ओर से ट्रांसपोर्ट नगर की ओर जाने के लिए लोग रास्ता पार करते हैं। दूसरी तरफ का रोड तकरीबन चार फीट नीचे है। लोगों के जल्दबाजी में रोड पार करने के दौरान ही हादसे होते हैं। धर्मेंद्र सिकरवार ने बताया कि इस मोड़ पर कोई पुलिस कर्मी तैनात नहीं रहता है। बस और आटो को रोकने वाला भी कोई नहीं हैं। आरोप लगाया कि ट्रैफिक पुलिस कर्मी अवैध वसूली करके वाहनों को खड़ा रहने देते हैं। भोलू ने बताया कि वह चाय के खोखे पर बैठा था। हादसा आटो और बस के रोड पर खड़े होने की वजह से हुआ।
बता दें, शनिवार रात को साढ़े नौ बजे दिल्ली की ओर से आती इनोवा गाड़ी आईएसबीटी के पास बेकाबू हो गई थी। इनोवा डिवाइडर से टकराने के बाद दूसरे रोड पर आ रही आल्टो से टकरा गई थी। हादसे में आल्टो सवार चार लोगों की मौत हो गई थी, जबकि एक राहगीर महिला की भी मौत हुई थी। मृतकों में हरीपर्वत के सुल्तानगंज पुलिया निवासी राकेश कुमार (50), उनका बेटा ऋषभ (16), भांजा हाकू पुत्र रतनलाल (रोहता), किराएदार का बेटा विवेक कुमार पुत्र सतीश थे। वहीं एक मृतक महिला नीरू शर्मा की रविवार को शिनाख्त हो गई। इनोवा चला रहा युवक घायल हो गया था। इस घटना को 12 घंटे ही बीते थे कि रविवार सुबह 10:30 बजे कंटेनर ने आईएसबीटी के पास ही पांच आटो को जबर्दस्त टक्कर मार दी। हादसे में आटो पीछे से पिचक गए। दो आटो के तो परखच्चे उड़ गए। हादसे में सात लोगों की मौत हो गई। वहीं दस लोग घायल हो गए। घटना के बाद मौके पर पहुंचे लोग यही कह रहे थे कि कुछ ही घंटे में हाईवे खूनी बन गया। हादसे का मंजर देखकर लोगों के दिल दहल गए। आटो पलटने के बाद मृतकों के शव सड़क पर बिखर गए। वहीं घायल आटो में फंसे चीखपुकार मचा रहे थे। पहले राहगीर और वाहन चालकों ने लोगों को बाहर निकाला, बाद में पुलिस के पहुंचने पर सभी को अस्पताल भेजा गया।
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उधर, प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि सूचना पर पुलिस तो पहुंच गई, लेकिन एंबुलेंस नहीं आई थी। इसकी वजह से घायलों को अस्पताल पहुंचाने में काफी देर लगी। लोगों में पुलिस के प्रति गुस्सा था। हाईवे पर जाम लगने के कारण वाहनों की लंबी लाइन लग गई। पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए लाठियां भी फटकारीं। इससे हाईवे पर भगदड़ मच गई। बाद में दुर्घटनाग्रस्त सभी आटो को क्रेन की मदद से हटाया गया। तब कहीं जाकर वाहनों का आवागमन सुचारु हो सका।
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पुलिस की लापरवाही से हुआ दूसरा हादसा
आगरा। आईएसबीटी पर शनिवार रात को हुए हादसे के 12 घंटे बाद रविवार को हुई दुघर्टना के पीछे लोग पुलिस की लापरवाही को जिम्मेदार मान रहे हैं। लोगों का आरोप था कि इनोवा से हुए हादसे के बाद भी पुलिस अधिकारियों ने स्थिति को भांपना जरूरी नहीं समझा। एसपी ट्रैफिक भी नहीं आए। रविवार को घटना स्थल पर न तो कोई पुलिस कर्मी तैनात था और न ही किसी तरह के बैरियर लगाए गए।
गैलाना निवासी महेश पिप्पल ने बताया कि हादसे की जानकारी पर वह मौके पर आ गए। उनका आरोप था कि जिस स्थान पर हादसा हुआ वहां पर बड़ी संख्या में बस खड़ी रहती हैं। आटो भी रुकते हैं। यहां पर कट नहीं बना है। सर्विस रोड की ओर से ट्रांसपोर्ट नगर की ओर जाने के लिए लोग रास्ता पार करते हैं। दूसरी तरफ का रोड तकरीबन चार फीट नीचे है। लोगों के जल्दबाजी में रोड पार करने के दौरान ही हादसे होते हैं। धर्मेंद्र सिकरवार ने बताया कि इस मोड़ पर कोई पुलिस कर्मी तैनात नहीं रहता है। बस और आटो को रोकने वाला भी कोई नहीं हैं। आरोप लगाया कि ट्रैफिक पुलिस कर्मी अवैध वसूली करके वाहनों को खड़ा रहने देते हैं। भोलू ने बताया कि वह चाय के खोखे पर बैठा था। हादसा आटो और बस के रोड पर खड़े होने की वजह से हुआ।