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ईरान-इजराइल युद्ध: आगरा का जूता निर्यात 70% तक गिरा, समुद्र में फंसे कंटेनर; निर्यातकों को हो रहा भारी नुकसान
Thu, 30 Apr 2026 10:33 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Thu, 30 Apr 2026 10:33 AM IST
सार
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण आगरा का जूता निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है और ऑर्डर में करीब 70% तक की गिरावट आई है। समुद्री परिवहन महंगा होने, कंटेनर फंसने और कच्चे माल की कीमत बढ़ने से निर्यातकों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
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आगरा का जूता
- फोटो : संवाद
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विस्तार
पश्चिम एशिया में ईरान-इस्राइल, अमेरिका के बीच युद्ध को दो माह पूरे हो गए हैं। इस युद्ध की आंच से आगरा का जूता निर्यात झुलस रहा है। आगरा से यूएई और सऊदी अरब समेत पश्चिम एशिया के देशों में जूतों का निर्यात अमेरिका और यूरोप जितना नहीं है, लेकिन इसका असर निर्यातकों पर पड़ रहा है। युद्ध की वजह से समुद्री जहाजों का किराया बढ़ गया है, वहीं माल भी समुद्र में फंसा हुआ है। यूएई और सऊदी अरब के फुटवियर ऑर्डर में करीब 70 फीसदी तक की कमी आई है।
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जूता निर्यातक किशोर तेजनानी ने बताया कि आगरा से पश्चिम एशिया के सऊदी अरब, यूएई, इराक, ईरान, कुवैत, बहरीन समेत कई देशों में जूतों का निर्यात होता है। यहां दो महीने से जारी युद्ध के चलते समुद्र में जूतों से लदे कंटेनर फंसे हुए हैं। करीब 70 फीसदी ऑर्डर इन देशों से कम हुए हैं। केवल पेट्रोलियम पदार्थों के कंटेनरों को ही निकालने की अनुमति मिली है। अन्य कंटेनर लंबा रास्ता तय करके पहुंच रहे हैं। इससे मालभाड़ा ज्यादा देना पड़ रहा है तो वहीं माल खराब होने की आशंका भी है। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के कारण दिक्कतें ज्यादा हो गई हैं।
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जूता निर्यातक जितेंद्र त्रिलोकानी ने बताया कि यूएई और सऊदी अरब समेत पश्चिम एशिया के देशों में काम करने वाले भारतीय उपमहाद्वीप के लोग भारत में बना जूता खरीदते हैं। लेदर के साथ सिंथेटिक की मांग है, लेकिन युद्ध के कारण ज्यादातर एशियाई लोग अपने देश आ चुके हैं। जो हैं, वह जूतों की लागत बढ़ने के कारण अभी खरीद नहीं रहे। काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक यूएई और सऊदी अरब में कुल निर्यात का 4 फीसदी फुटवियर निर्यात होता है। आगरा से जूतों का 5 हजार करोड़ रुपये का निर्यात पूरी दुनिया में होता है।
युद्ध के कारण महंगा हुआ कच्चा माल
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण पेट्रोलियम पदार्थों से जुड़े कच्चे माल के दाम बढ़े हैं। करीब 8 फीसदी का इजाफा इनमें हुआ है। टीपीआर सोल, पीयू, एडहेसिव, पैकिंग मैटेरियल और लाइनिंग की कीमतें बढ़ी हैं। इस बीच नोएडा में कर्मचारियों के प्रदर्शन के बाद प्रदेश सरकार ने न्यूनतम मजदूरी भी बढ़ा दी है। इसका असर जूता इकाइयों पर भी पड़ा है। कारीगरों का वेतन बढ़ाने के कारण जूता निर्यातकों को दोहरी मार पड़ी है। एक ओर कच्चा माल महंगा होने और समुद्री परिवहन का भाड़ा बढ़ने से लागत बढ़ी है, वहीं कारीगरों का वेतन भी इसी माह बढ़ाना पड़ा है।
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण पेट्रोलियम पदार्थों से जुड़े कच्चे माल के दाम बढ़े हैं। करीब 8 फीसदी का इजाफा इनमें हुआ है। टीपीआर सोल, पीयू, एडहेसिव, पैकिंग मैटेरियल और लाइनिंग की कीमतें बढ़ी हैं। इस बीच नोएडा में कर्मचारियों के प्रदर्शन के बाद प्रदेश सरकार ने न्यूनतम मजदूरी भी बढ़ा दी है। इसका असर जूता इकाइयों पर भी पड़ा है। कारीगरों का वेतन बढ़ाने के कारण जूता निर्यातकों को दोहरी मार पड़ी है। एक ओर कच्चा माल महंगा होने और समुद्री परिवहन का भाड़ा बढ़ने से लागत बढ़ी है, वहीं कारीगरों का वेतन भी इसी माह बढ़ाना पड़ा है।
सरकार को करना होगा सहयोग
एफमेक अध्यक्ष गोपाल गुप्ता ने बताया कि पश्चिम एशिया में युद्ध का असर पड़ा है। आने वाले महीनों में इसकी भरपाई की जा सकती है, पर इसके लिए सरकार को सहयोग करना होगा। कच्चा माल महंगा होने और मजदूरी बढ़ने के कारण लागत बढ़ी है। इसकी भरपाई के उपाय सरकार को करने होंगे, तब इस युद्ध के असर से निपटा जा सकता है।
एफमेक अध्यक्ष गोपाल गुप्ता ने बताया कि पश्चिम एशिया में युद्ध का असर पड़ा है। आने वाले महीनों में इसकी भरपाई की जा सकती है, पर इसके लिए सरकार को सहयोग करना होगा। कच्चा माल महंगा होने और मजदूरी बढ़ने के कारण लागत बढ़ी है। इसकी भरपाई के उपाय सरकार को करने होंगे, तब इस युद्ध के असर से निपटा जा सकता है।