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इंटर पास सदस्यों के लिए पांचवीं पास ‘हेल्पर’
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Fri, 08 Jan 2016 01:56 AM IST
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जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में अजब-गजब हुआ। इंटर पास सदस्य का वोट डलवाने के लिए पांचवीं पास भरोसेमंद ‘मददगार’ को जिम्मेदारी सौंपी गई। यह था जिले की सरकार के मुखिया के चुनाव में किए गए प्रबंधन का ‘खेल’। उम्मीदवारों के चुनाव प्रबंधकों को इतना भरोसा भी नहीं था कि तमाम तिकड़म से पक्के किए गए उनके वोट उनके खाते में ही जाऐंगे। तभी तो उन्होंने अचूक अस्त्र ‘हेल्पर’ का इस्तेमाल किया।
वार्ड 11 से जीतीं कुसुमा इंटर पास हैं। अभी तक के हर चुनाव में अपने मत का इस्तेमाल खुद ही करती आई हैं। लेकिन इस हाईप्रोफाइल इलेक्शन में इन्हें वोट डालने के लिए हेल्पर की हेल्प दी गई। अकेले कुसुमा ही नहीं, 25 सदस्यों का वोट सहायकों की मदद से डाला गया। वो भी तब जबकि उम्मीदवार सिर्फ दो ही थे। मतलब, बैलेट पेपर देखकर कंफ्यूज होने जैसा कोई डर नहीं था। वार्ड 12 से जीतीं मधु भी इंटर पास हैं। वार्ड 15 के सदस्य राकेश और पांच की उर्मिला देवी दसवीं तक पढ़े हैं।
इन्होंने भी हेल्पर लिए। हेल्परों में से कई सिर्फ पांचवीं तक पढ़े हैं। जिला पंचायत चेयरमैन और ब्लाक प्रमुख चुनाव के जानकारों का कहना है कि जिन वोटरों के ऐन वक्त पर ‘बहककर’ दूसरे पाले में जाने का डर होता है, उनके साथ उम्मीदवार अपने भरोसे के लोगों को हेल्पर बनाकर भेजते हैं। इसके बाद वोट सौ फीसदी पक्का मान लिया जाता है। कलक्ट्रेट में वोटरों के साथ जा रहे हेल्पर देखकर ही सब लोग अंदाजा लगा रहे थे कि किसका पलड़ा कितना भारी है। हालांकि सभी वोटरों ने हेल्पर लेने की वजह वोट डालने में अपनी परेशानी बताई थी।
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इन्होंने लिए सहायक
प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक ,वार्ड छह की राधा, सात की सरवेश, 19 की अंजू, 21 के जनक, 22 के राम सिंह, 25 की कमलेश, 26 की उर्मिला देवी, 27 की रामरती, 28 की जलदेवी, 29 की मुन्नी देवी, 32 की प्रकाशी, 33 के मानिक चंद्र, 34 की सुनीता, 38 के नरेंद्र, 39 के हरिओम सिंह, 40 केनेत्रपाल, 42 के राम सेवक, 44 की अरुणा देवी, 48 की निर्मला, 49 की पार्वती, 50 के रिंगी लाल ने सहायक लिए।
25सदस्य सहायक के साथ पहुंचे
16महिला सदस्यों ने सहायक लिए
09पुरुष सदस्यों के साथ सहायक आए
05सहायक राजपाल के गांव कुआंखेड़ा के
03सहायक बाबूलाल के गांव पनवारी के
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वार्ड 11 से जीतीं कुसुमा इंटर पास हैं। अभी तक के हर चुनाव में अपने मत का इस्तेमाल खुद ही करती आई हैं। लेकिन इस हाईप्रोफाइल इलेक्शन में इन्हें वोट डालने के लिए हेल्पर की हेल्प दी गई। अकेले कुसुमा ही नहीं, 25 सदस्यों का वोट सहायकों की मदद से डाला गया। वो भी तब जबकि उम्मीदवार सिर्फ दो ही थे। मतलब, बैलेट पेपर देखकर कंफ्यूज होने जैसा कोई डर नहीं था। वार्ड 12 से जीतीं मधु भी इंटर पास हैं। वार्ड 15 के सदस्य राकेश और पांच की उर्मिला देवी दसवीं तक पढ़े हैं।
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इन्होंने भी हेल्पर लिए। हेल्परों में से कई सिर्फ पांचवीं तक पढ़े हैं। जिला पंचायत चेयरमैन और ब्लाक प्रमुख चुनाव के जानकारों का कहना है कि जिन वोटरों के ऐन वक्त पर ‘बहककर’ दूसरे पाले में जाने का डर होता है, उनके साथ उम्मीदवार अपने भरोसे के लोगों को हेल्पर बनाकर भेजते हैं। इसके बाद वोट सौ फीसदी पक्का मान लिया जाता है। कलक्ट्रेट में वोटरों के साथ जा रहे हेल्पर देखकर ही सब लोग अंदाजा लगा रहे थे कि किसका पलड़ा कितना भारी है। हालांकि सभी वोटरों ने हेल्पर लेने की वजह वोट डालने में अपनी परेशानी बताई थी।
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इन्होंने लिए सहायक
प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक ,वार्ड छह की राधा, सात की सरवेश, 19 की अंजू, 21 के जनक, 22 के राम सिंह, 25 की कमलेश, 26 की उर्मिला देवी, 27 की रामरती, 28 की जलदेवी, 29 की मुन्नी देवी, 32 की प्रकाशी, 33 के मानिक चंद्र, 34 की सुनीता, 38 के नरेंद्र, 39 के हरिओम सिंह, 40 केनेत्रपाल, 42 के राम सेवक, 44 की अरुणा देवी, 48 की निर्मला, 49 की पार्वती, 50 के रिंगी लाल ने सहायक लिए।
25सदस्य सहायक के साथ पहुंचे
16महिला सदस्यों ने सहायक लिए
09पुरुष सदस्यों के साथ सहायक आए
05सहायक राजपाल के गांव कुआंखेड़ा के
03सहायक बाबूलाल के गांव पनवारी के