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मैनपुरी षडयंत्र के नायक से प्रेरित होकर क्रांति की धारा से जुड़े थे दस्यु
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मैनपुरी षडयंत्र केस के हीरोसे प्रेरित होकर क्रांति की धारा से जुडे थे चंबल के दस्यु, दूसरे दिन भी ?
- फोटो : Agra Dehat
बाह। आजादी के अमृत महोत्सव में मई गांव के क्रांतिकारी गेंदालाल दीक्षित के स्मृति स्थल की उपेक्षा से आहत उनकी जीवनीकार शाह आलम का अनशन सोमवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। उन्होंने बताया कि मैनपुरी षडयंत्र केस के नायक रहे गेंदालाल ने पंचम सिंह आदि दस्युओं को क्रांति की मुख्यधारा से जोड़ा था। आज मंगलवार को चबूतरे के निर्माण के साथ उनका शिलालेख लगेगा।
बताया कि सरकार आजादी के अमृत महोत्सव में क्रांतिकारियों और शहीदों की कीर्ति पताका फहराने का अभियान चला रही है। पर, गेंदालाल दीक्षित से जुडे़ स्मृति स्थल उपेक्षित पडे़ हैं। अनशन के दौरान गेंदालाल दीक्षित के वंशज विजेंद्र दीक्षित के अलावा डॉ. रिपुदमन सिंह, राम सिंह आजाद, पवन टाइगर, विजेंद्र पाराशर, विमलेश यादव, रिंकल दीक्षित आदि ने भी विचार व्यक्त किए। इस मौके पर गोवा क्रांति दिवस की 75वीं एवं गोवा मुक्ति के 60 वर्ष पूरे होने पर मुक्ति संघर्ष के नायकों को नमन किया गया।
गेंदालाल दीक्षित ने अलग-अलग प्रांतों में काम कर रहे क्रांतिकारी संगठनों को एकीकृत कर विप्लवी महानायक रास बिहारी बोस की सन 1915 की क्रांति योजना का खाका खींचा था। पं. गेंदालाल दीक्षित का जन्म 30 नवंबर 1890 को बटेश्वर के पास मई गांव में हुआ था। वर्ष 1905 में बंग-भंग के विरोध में देशव्यापी आंदोलन के दौरान वह पढ़ाई छोड़कर औरैया चले गए। उन्होंने पंजाब, महाराष्ट्र, दिल्ली, राजपूताना और बंगाल के क्रांतिकारी संगठनों को एक सूत्र में पिरोया। मातृवेदी के कमांडर स्वयं गेंदालाल दीक्षित थे और अध्यक्ष दस्युराज पंचम सिंह को बनाया गया। दल को चलाने के लिए 40 लोगों की केंद्रीय समिति बनी जिसमें 30 चंबल के बागी और 10 क्रांतिकारी थे। इन 10 क्रांतिकारियों में पंडित राम प्रसाद बिस्मिल और पत्रकार शिवचरण लाल शर्मा भी थे। दिल्ली के एक अस्पताल में 21 दिसंबर 1920 को मात्र 30 वर्ष की अवस्था में उनका देहांत हो गया।
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बताया कि सरकार आजादी के अमृत महोत्सव में क्रांतिकारियों और शहीदों की कीर्ति पताका फहराने का अभियान चला रही है। पर, गेंदालाल दीक्षित से जुडे़ स्मृति स्थल उपेक्षित पडे़ हैं। अनशन के दौरान गेंदालाल दीक्षित के वंशज विजेंद्र दीक्षित के अलावा डॉ. रिपुदमन सिंह, राम सिंह आजाद, पवन टाइगर, विजेंद्र पाराशर, विमलेश यादव, रिंकल दीक्षित आदि ने भी विचार व्यक्त किए। इस मौके पर गोवा क्रांति दिवस की 75वीं एवं गोवा मुक्ति के 60 वर्ष पूरे होने पर मुक्ति संघर्ष के नायकों को नमन किया गया।
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गेंदालाल दीक्षित ने अलग-अलग प्रांतों में काम कर रहे क्रांतिकारी संगठनों को एकीकृत कर विप्लवी महानायक रास बिहारी बोस की सन 1915 की क्रांति योजना का खाका खींचा था। पं. गेंदालाल दीक्षित का जन्म 30 नवंबर 1890 को बटेश्वर के पास मई गांव में हुआ था। वर्ष 1905 में बंग-भंग के विरोध में देशव्यापी आंदोलन के दौरान वह पढ़ाई छोड़कर औरैया चले गए। उन्होंने पंजाब, महाराष्ट्र, दिल्ली, राजपूताना और बंगाल के क्रांतिकारी संगठनों को एक सूत्र में पिरोया। मातृवेदी के कमांडर स्वयं गेंदालाल दीक्षित थे और अध्यक्ष दस्युराज पंचम सिंह को बनाया गया। दल को चलाने के लिए 40 लोगों की केंद्रीय समिति बनी जिसमें 30 चंबल के बागी और 10 क्रांतिकारी थे। इन 10 क्रांतिकारियों में पंडित राम प्रसाद बिस्मिल और पत्रकार शिवचरण लाल शर्मा भी थे। दिल्ली के एक अस्पताल में 21 दिसंबर 1920 को मात्र 30 वर्ष की अवस्था में उनका देहांत हो गया।
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