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नौ ग्राम पंचायतों के अभिलेख जांचेंगे डीएम
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डीपीआरओ कार्यालय में निरीक्षण करते डीएम पीके उपाध्याय व मौजूद सीडीओ कपिल सिंह
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। डीएम पीके उपाध्याय ने मंगलवार को डीपीआरओ कार्यालय का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्हें कई खामियां मिलीं। इस पर उन्होंने कुछ मामलों में जांच करने और कुछ मामलों में रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने नौ ग्राम पंचायतों के अभिलेख जांच के लिए तलब किए हैं।
डीपीआरओ कार्यालय में डीएम ने सबसे पहले ग्राम पंचायतों की शिकायतों की पत्रावली देखीं। रजिस्टर देखने पर पता चला कि कुल 39 ग्राम पंचायतों में जांच के आदेश दिए गए हैं, लेकिन अब तक केवल पांच की ही जांच रिपोर्ट आई है। इस पर जिलाधिकारी ने सभी जांच अधिकारियों की बैठक बुलाने के निर्देश दिए।
वहीं सचिवों के स्थानांतरण के बाद अब तक नए खाते न खोले जाने पर उन्होंने रिपोर्ट मांगने के आदेश दिए हैं। साथ ही ग्राम पंचायत सचिवों और ग्राम विकास अधिकारियों के स्थानांतरण के मामले में ब्लॉकवार स्वीकृत पद, तैनाती और आवंटित ग्राम पंचायतों की संख्या की रिपोर्ट डीपीआरओ और जिला विकास अधिकारी से मांगी है। इस दौरान सीडीओ कपिल सिंह, परियोजना निदेशक सुरेश चंद्र मिश्रा, जिला विकास अधिकारी प्रवीण कुमार राय मौजूद रहे।
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लेखा जोखा प्रस्तुत न करने पर लगाई फटकार
डीएम ने ग्राम पंचायतों में भेजी गई धनराशि व खर्च का लेखा-जोखा प्रस्तुत न करने पर फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विकास खंड से एक ग्राम पंचायत के समस्त अभिलेख परिवार रजिस्टर के साथ उन्हें तीन अगस्त तक उपलब्ध कराए जाएं। इनकी वे स्वयं जांच करेंगे। इतना ही नहीं इसी तरह सभी ब्लाकों से एक-एक ग्राम पंचायत के अभिलेखों की जांच सीडीओ, पीडी और डीडीओ भी करेंगे। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने आईजीआरएस की शिकायतें व उनके निस्तारण में की गई कार्रवाई के अभिलेख भी देखे।
राज्य वित्त आयोग की धनराशि रोकने के निर्देश
ग्राम पंचायतों की ओर से उपभोग प्रमाणपत्र और अन्य अभिलेख न देने पर राज्य वित्त आयोग की धनराशि रुकवाने के लिए डीएम ने डीपीआरओ को निर्देशित किया।
डीएम ने पूछा, कौन है रतन सिंह?
डीपीआरओ कार्यालय में निरीक्षण के लिए पहुंचे डीएम ने अमर उजाला में प्रकाशित खबर का हवाला देते हुए कहा कि आखिर ये रतन सिंह कौन है? अब तक उन्हें इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई? इस पर डीपीआरओ ने उन्हें रतन सिंह की पत्रावली दिखाई। जिस पर डीएम ने कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
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डीपीआरओ कार्यालय में डीएम ने सबसे पहले ग्राम पंचायतों की शिकायतों की पत्रावली देखीं। रजिस्टर देखने पर पता चला कि कुल 39 ग्राम पंचायतों में जांच के आदेश दिए गए हैं, लेकिन अब तक केवल पांच की ही जांच रिपोर्ट आई है। इस पर जिलाधिकारी ने सभी जांच अधिकारियों की बैठक बुलाने के निर्देश दिए।
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वहीं सचिवों के स्थानांतरण के बाद अब तक नए खाते न खोले जाने पर उन्होंने रिपोर्ट मांगने के आदेश दिए हैं। साथ ही ग्राम पंचायत सचिवों और ग्राम विकास अधिकारियों के स्थानांतरण के मामले में ब्लॉकवार स्वीकृत पद, तैनाती और आवंटित ग्राम पंचायतों की संख्या की रिपोर्ट डीपीआरओ और जिला विकास अधिकारी से मांगी है। इस दौरान सीडीओ कपिल सिंह, परियोजना निदेशक सुरेश चंद्र मिश्रा, जिला विकास अधिकारी प्रवीण कुमार राय मौजूद रहे।
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लेखा जोखा प्रस्तुत न करने पर लगाई फटकार
डीएम ने ग्राम पंचायतों में भेजी गई धनराशि व खर्च का लेखा-जोखा प्रस्तुत न करने पर फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विकास खंड से एक ग्राम पंचायत के समस्त अभिलेख परिवार रजिस्टर के साथ उन्हें तीन अगस्त तक उपलब्ध कराए जाएं। इनकी वे स्वयं जांच करेंगे। इतना ही नहीं इसी तरह सभी ब्लाकों से एक-एक ग्राम पंचायत के अभिलेखों की जांच सीडीओ, पीडी और डीडीओ भी करेंगे। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने आईजीआरएस की शिकायतें व उनके निस्तारण में की गई कार्रवाई के अभिलेख भी देखे।
राज्य वित्त आयोग की धनराशि रोकने के निर्देश
ग्राम पंचायतों की ओर से उपभोग प्रमाणपत्र और अन्य अभिलेख न देने पर राज्य वित्त आयोग की धनराशि रुकवाने के लिए डीएम ने डीपीआरओ को निर्देशित किया।
डीएम ने पूछा, कौन है रतन सिंह?
डीपीआरओ कार्यालय में निरीक्षण के लिए पहुंचे डीएम ने अमर उजाला में प्रकाशित खबर का हवाला देते हुए कहा कि आखिर ये रतन सिंह कौन है? अब तक उन्हें इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई? इस पर डीपीआरओ ने उन्हें रतन सिंह की पत्रावली दिखाई। जिस पर डीएम ने कार्रवाई करने के निर्देश दिए।