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इनर रिंग रोड घोटाला: विजिलेंस जांच कराने और धाराएं बढ़ाने की सिफारिश, इनकी पाई गई मिलीभगत

Thu, 02 Mar 2023 11:12 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Thu, 02 Mar 2023 11:12 PM IST
सार

84 खरीदारों को सड़क के किनारे की जमीन दर्शाकर दोगुना ज्यादा धनराशि दिलाकर जमीन अधिग्रहण का फायदा उठाया गया है। यह दुरभिसंधि को दर्शाता है।

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inner ring road scam police recommended in investigation report
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

आगरा इनर रिंग रोड के लिए छलेसर से रोहता और जखौदा गांव तक 938 हेक्टेयर जमीन लैंड पार्सल और इंटरचेंज (अदला-बदली) के लिए अधिग्रहण की गईं, जिसमें 126 करोड़ रुपये का घोटाला होने के आरोप है। इस घोटाले में एडीएम प्रशासन और एडीएम सिटी की जांच रिपोर्ट के बाद पुलिस ने भी अपनी रिपोर्ट में मिलीभगत पाई है। इसके बाद पुलिस ने विजिलेंस जांच कराने और अधिकारियों पर भ्रष्टाचार की धाराएं बढ़ाने की सिफारिश की है।

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किसान नेता श्याम सिंह चाहर और देवप्रकाश की शिकायत पर एसएसपी ने बीते साल तत्कालीन एसपी सिटी विकास कुमार को जांच सौंपी थी, जिन्होंने पुलिस कमिश्नरेट बनने से पहले अपनी रिपोर्ट तत्कालीन एसएसपी को सौंपी। जिसमें उन्होंने कहा है कि 84 खरीदारों को सड़क के किनारे की जमीन दर्शाकर दोगुना ज्यादा धनराशि दिलाकर जमीन अधिग्रहण का फायदा उठाया गया है। यह दुरभिसंधि को दर्शाता है। एडीएम प्रशासन निधि श्रीवास्तव की जांच रिपोर्ट में ऐसे करार दिखाए गए, जिनमें न करार की तारीख थी और न ही दरें अंकित थीं।

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सीबीआई जांच की मांग

इनर रिंग रोड घोटाले में अधिग्रहण से लेकर अब तक जांच की मांग कर रहे किसान नेता श्याम सिंह चाहर ने कहा कि 126 करोड़ रुपये के इस घोटाले में बड़े-बड़े अधिकारी शामिल हैं, जिन्हें जांच रिपोर्ट में दोषी माना जा चुका है। वह अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके जांच रिपोर्ट दबाए हुए हैं और कार्रवाई नहीं होने दे रहे। ऐसे में पूरी जांच सीबीआई को सौंपी जाए।

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ऐसे पहुंचाया गया था फायदा

तीन साल पहले एडीएम प्रशासन निधि श्रीवास्तव की जांच रिपोर्ट में जमीन अधिग्रहण के समय बताया गया कि रहनकलां के गाटा संख्या 621 और रायपुर के गाटा संख्या 933 सड़क किनारे नहीं है। पर रहनकलां में सड़क किनारे की दर 1902 और रायपुर में 1268 रुपये प्रति वर्ग मीटर से भुगतान किया गया। इससे कुल 22 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। यह जगह सड़क के काफी अंदर थी। तहसील स्तर पर तत्कालीन लेखपाल को गलत आख्या भेजने का जिम्मेदार माना गया। जांच रिपोर्ट में ऐसे सात बैनामों का उदाहरण दिया गया है।

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