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पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा, पुलिस हिरासत में राजू के साथ किया गया अमानवीय सलूक

Tue, 27 Nov 2018 11:45 AM IST
चंद्रमोहन शर्मा/आशीष शर्मा, अमर उजाला, आगरा
चंद्रमोहन शर्मा/आशीष शर्मा, अमर उजाला, आगरा Updated Tue, 27 Nov 2018 11:45 AM IST
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inhuman treatment with Raju gupta in police custody in agra
रोती बिलखती मृतक राजू की मां - फोटो : अमर उजाला

आगरा के सिकंदरा थाना में की गई राजू गुप्ता की हत्या के मामले में केस दर्ज हो जाने के चार दिन बाद भी जांच एक कदम आगे नहीं बढ़ सकी है। इस बीच राजू की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जो बात सामने आई है, उससे पुलिस का अमानवीय सलूक उजागर हुआ है। 

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राजू को अवैध हिरासत में लेकर सिर्फ पीटा ही नहीं गया बल्कि थाने में भूखा भी रखा गया। उसे खाने के लिए कुछ नहीं दिया गया। इसका पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट से चलता है। उसके पेट में अन्न का एक दाना भी नहीं था। रिपोर्ट में लिखा है कि अमाशय में सिर्फ पानी था।
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर विशेषज्ञ डॉक्टरों का कहना है कि अमाशय में भोजन चार से पांच घंटे रहता है। अगर इतने घंटे तक कोई कुछ न खाए तो ही अमाशय खाली आएगा। छोटी आंत में भोजन कई घंटे रहता है। कई बार दस घंटे से भी ज्यादा रहता है। यह इस पर निर्भर करता है कि भोजन के बाद इंसान शौच के लिए कब गया? 

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बगैर रिपोर्ट से पूछताछ तक नहीं कर सकती पुलिस

वहीं राजू की मां रेनूलता गुप्ता पहले से कह रहीं है कि उसके बेटे को भूखा रखा गया था। उन्होंने थाने के स्टाफ से कहा था कि उसे खाने के लिए कुछ दे दो। स्टाफ ने जवाब दिया था कि जब तक यह चोरी की बात कुबूल नहीं कर लेगा, तब तक इसे भूखा ही रहना होगा।

कानून के जानकारों का कहना है कि बगैर एफआईआर के किसी को हिरासत में लेना तो दूर, पुलिस को पूछताछ करने तक का हक नहीं है। जिस केस की रिपोर्ट ही दर्ज नहीं है या तहरीर ही नहीं मिली है, उसकी जांच भी नहीं की जा सकती है। 

डीजीसी (जिला शासकीय अधिवक्ता) क्रिमिनल बसंत गुप्ता ने बताया कि मानवाधिकार आयोग का नियम है कि पुलिस किसी को पूछताछ के नाम पर टॉर्चर नहीं कर सकती है। अगर केस दर्ज होने की सूरत में किसी को हिरासत में लिया जाए या गिरफ्तार किया जाए तो तुरंत उसके परिवार को इसकी सूचना देनी होती है। हिरासत में लिए गए व्यक्ति के लिए भोजन का इंतजाम करना पुलिस की जिम्मेदारी है। 

देर करो, मामला दब जाएगा

inhuman treatment with Raju gupta in police custody in agra
थाना सिकंदरा - फोटो : अमर उजाला
उधर, पुलिस देर करो, मामला दब जाएगा की थ्योरी पर चल रही है। रिपोर्ट दर्ज हो जाने के बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। जबकि राजू की मां चश्मदीद हैं। वो कह रही हैं एक बार थाने के स्टाफ की शिनाख्त करा दो, एक मिनट में बता देंगी कि उनके जिगर के टुकड़े को किस-किस पुलिसकर्मी ने थर्ड डिग्री दी थी, लेकिन पुलिस ऐसा नहीं कर रही है। जाहिर है, दाल में कुछ काला है।

पुलिस बुरी तरह से फंसी हुई है। गवाह और सुबूत खिलाफ हैं, हंगामा हो रहा है, बर्बरता पर लोग भड़के हुए हैं। ऐसे में पुलिस को यही रास्ता दिख रहा है कि जांच के नाम पर देरी करने से ही कुछ बात बन सकती है। 

राजू की मौत के मामले में हत्या का केस दर्ज कराया गया है। इसमें उसके पड़ोसी कारोबारी अंशुल, उसका बेटा विवेक नामजद हैं। पुलिसकर्मी अज्ञात में है। नामजद आरोपी भी अभी तक पकड़े नहीं गए हैं। अंशुल और विवेक ने ही आरोप लगाया था कि उनके घर में सात लाख के गहने चोरी हुए हैं। राजू पर शक जाहिर किया था।

पीट पीटकर मार डाला

इसका न कोई केस दर्ज था, न कोई तहरीर थी। इसके बावजूद पुलिस ने कारोबारी के इशारे पर काम करते हुए राजू और उसकी मां को न केवल हिरासत में लिया बल्कि राजू को तो इतना टार्चर किया कि उसकी जान ही चली गई। राजू का परिवार मूल रूप से मथुरा का है। उसके पिता की मृत्यु के बाद 15 साल पहले उसकी मां रेनू लता आगरा के गैलाना रोड पर नरेंद्र एंक्लेव में आ गई थी। अंशुल पड़ोस में रहता है।

राजू के चाचा अशोक कुमार ने राजू की हत्या के मुकदमे की जांच लोहामंडी थाना के इंस्पेक्टर राजेश पांडेय को दिए जाने पर सवाल उठाए हैं। पहला सवाल यह है कि राजेश पांडेय पंचायतनामा भरे जाते समय मौजूद थे। 

अशोक कुमार का आरोप है कि पंचायतनामा में खेल किया गया। चोट नहीं लिखी गई। इस खेल में राजेश पांडेय शामिल रहे। दूसरा, राजेश पांडेय कुछ समय पहले उस सिकंदरा थाना केप्रभारी निरीक्षक रहे हैं जिसकी हिरासत में राजू की जान गई। जाहिर है, थाने का स्टाफ उनका परिचित है। ऐसे में उन्हें जांच दिया जाना ठीक नहीं।

राजू को इंसाफ दिलाने के लिए प्रदर्शन

सिकंदरा पुलिस की हिरासत में पिटाई से राजू की मौत के मामले में कार्रवाई न होने से नाराज लोगों ने सोमवार को कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। इनमें राजू की मां, चाचा और अन्य परिजन भी शामिल रहे। प्रदर्शनकारियों ने राजू की हत्या की न्यायिक जांच की मांग उठाई। साथ ही कहा कि  मथुरा जनपद का जो विधायक हत्यारोपियों को बचा रहा है, उसे भी गिरफ्तार किया जाए।

वहीं एसएसपी अमित पाठक का कहना है कि राजू की मौत के मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। जो आरोपी नामजद हैं, वे घरों से भागे हुए हैं। उनकी तलाश में पुलिस टीम लगी है। पुलिसकर्मियों पर पिटाई का आरोप लगा है। पुलिसकर्मी भी चिन्हित किए जा रहे है। जिन पर शक है, वे गैरहाजिर चल रहे हैं। उनकी भी तलाश की जा रही है। इस मामले में कड़ी कार्रवाई होगी।
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