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Agra News: प्रदूषण और फास्टफूड से बढ़ रहा बांझपन, संतान को तरस रहे दंपती

Sat, 08 Aug 2026 02:36 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sat, 08 Aug 2026 02:36 AM IST
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Infertility on the rise due to pollution and fast food; couples longing for children.
कार्यशाला में डॉक्टर।
आगरा। अधिक उम्र में शादी, बढ़ता प्रदूषण, फास्टफूड का सेवन और खेती में कीटनाशक का प्रयोग बांझपन की बड़ी वजह बनता जा रहा है। शुक्राणु-अंडाणुओं की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है। 15-20 फीसदी दंपती संतान के लिए तरस रहे हैं। फतेहाबाद रोड स्थित होटल में शुक्रवार को एकेडमी ऑफ क्लीनिकल एंब्रियोलॉजिस्ट की तीन दिवसीय कार्यशाला के पहले दिन डॉक्टरों ने चिंता जताते हुए ये बातें कहीं।
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आयोजन समिति की अध्यक्ष डॉ. सुजाता रामाकृष्णनन ने बताया कि हवा में कार्बन तत्व समेत अन्य हानिकारक गैसों की प्रतिशतता बढ़ रही है। फास्टफूड का चलन भी तेजी से बढ़ा है। खेती में कीटनाशक और रासायनिक खाद के उपयोग से होने वाले फल-सब्जियाें के सेवन से शुक्राणु और अंडाणुओं पर असर पड़ रहा है। बांझपन से जूझ रहे 15-20 फीसदी दंपतियों के रक्त और यूरिन की जांच में इसका पता चला है।
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आयोजन समिति के सचिव डॉ. केशव मल्होत्रा ने बताया कि शुक्राणु-अंडाणुओं की संख्या कम होने के साथ डीएनए भी प्रभावित हो रहा है। इतना ही नहीं गर्भस्थ शिशु में विकार की आशंका भी बढ़ी है। अब आईवीएफ में एआई का भी उपयोग किया जा रहा है जिससे बेहतर गुणवत्ता के शुक्राणु-अंडाणुओं को चिह्नित करने में आसानी हो रही है।
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निर्वाचित अध्यक्ष डॉ. गौरव मजूमदार और डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा ने बताया कि देर रात तक जागना, अधूरी नींद, तनाव, पौष्टिक आहार की कमी, धूम्रपान-शराब से भी प्रजनन क्षमता पर असर पड़ रहा है। कार्यशाला में डॉ. राजीव शर्मा, डॉ. परशुराम गोपीनाथ, डॉ. रीता वासेना, डॉ. सुधा बंसल, डॉ. रजनी पचौरी, डॉ. रिचा सिंह, डॉ. मीनल जैन, डॉ. नीरजा सचदेवा, डॉ. अनुपम गुप्ता, डॉ. कृष्णा चैतन्य आदि ने भी व्याख्यान दिए।

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भ्रूण विज्ञानियों की कमी, नई तकनीक पर मंथन
पहले दिन हुई कार्यशाला में आधुनिक तकनीक, मशीनों के जरिये आईवीएफ की विधि के बारे में बताया गया। संस्था के निर्वाचित अध्यक्ष ने बताया कि देश में भ्रूण विज्ञानियों की कमी है। देश में करीब छह हजार आईवीएफ सेंटर हैं और इनमें करीब ढाई हजार ही विशेषज्ञ हैं। ऐसे में विशेषज्ञ बढ़ाने की जरूरत है।
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इन बातों का रखें ध्यान

धूम्रपान-शराब समेत अन्य नशा न करें।

फास्टफूड सिर्फ स्वाद के लिए खाएं-पीएं।

जैविक खेती अपनाएं। फल-सब्जी को बेहतर ढंग से धोएं।

6-8 घंटे की स्वस्थ नींद लें, देर रात तक जागने-मोबाइल देखने से बचें।

धूल-धुएं वाले क्षेत्र में जाने से पहले मास्क लगाएं।
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