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Budget: घाटे में चल रही रेलवे को उबारने के लिए इंदिरा गांधी ने उठाया था ये कदम, जनता की जेब पर पड़ा बोझ
Sun, 02 Feb 2025 11:19 AM IST
अरुन पाराशर
संजीव जूरैल, आगरा
संजीव जूरैल, आगरा
Published by: अरुन पाराशर
Updated Sun, 02 Feb 2025 11:19 AM IST
सार
1975 तक रेल किराया में बढ़ोत्तरी जारी रही। इसके बाद पेश किए बजट में घाटे से उबरने के आंकड़े पेश किए गए। यात्री किराया और माल भाड़ा बढ़ाने का सिलसिला थम गया।
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- फोटो : istock
विस्तार
देश में परिवहन का सबसे सस्ता और सुलभ साधन रेलवे है। यह अर्थव्यवस्था को भी संबल देता है। आयरन लेडी के नाम से मशहूर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सर्वाधिक बार रेल भाड़ा बढ़ाया था। वर्ष 1976 को छोड़ दिया जाए तो उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान इसमें हर साल वृद्धि की।
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अमर उजाला में प्रकाशित खबर।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इंदिरा गांधी पहली बार 1966 में सत्ता में आईं। जब बजट पेश हुआ तो उन्होंने रेल भाड़े में इजाफा किया। उस समय रेलवे घाटे में थी। इससे उबरने के लिए उन्होंने यह प्रयोग 1975 तक किया। रेलवे किसी भी बजट में खुद को संभाल न सकी। माल भाड़े ने आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को प्रभावित किया।
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इस दौरान जनता को रेल किराया वृद्धि भी झेलनी पड़ी।अमर उजाला के 12 मार्च, 1976 के अंक में प्रकाशित खबर के अनुसार, रेल मंत्री कमलापति त्रिपाठी ने अपना दूसरा रेल बजट 1976-77 पेश किया। इसमें नाै करोड़ की बचत दिखाई गई। इसका असर यह हुआ कि पिछले 10 वर्षों से यात्री किराये और माल भाड़े में निरंतर चली आ रही वृद्धि और बजट घाटे का अध्याय समाप्त हो गया।
इस बजट में 87.35 करोड़ की वृद्धि हुई। खाद्यान्नों में नमक, खाद्य तेल, गुड़, शक्कर और उर्वरक जैसी आवश्यक वस्तुओं पर अधिभार नहीं बढ़ाया। हालांकि इनके अतिरिक्त अन्य माल भाड़े पर 5 से 10 प्रतिशत अधिभार लगाया।
इस बजट में 87.35 करोड़ की वृद्धि हुई। खाद्यान्नों में नमक, खाद्य तेल, गुड़, शक्कर और उर्वरक जैसी आवश्यक वस्तुओं पर अधिभार नहीं बढ़ाया। हालांकि इनके अतिरिक्त अन्य माल भाड़े पर 5 से 10 प्रतिशत अधिभार लगाया।