Chambal : 'सुल्ताना बुलबुल' के शिकार का अंदाज देख अचंभित हो जाते हैं लोग, जानिए इस पक्षी की विशेषता
चंबल नदी में इंडियन पैराडाइज फ्लाई कैचर की अठखेलियां देख लोग दंग रह जाते हैं। इस पक्षी का लोग दूधराज या सुल्ताना बुलबुल भी कहते हैं।
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चंबल में इंडियन पैराडाइज फ्लाई कैचर की लंबी पूंछ और शिकार पकड़ने का अंदाज लोगों को अंचभित कर देता है। ग्रामीण इसे दूधराज या सुल्ताना बुलबुल कहते हैं। वर्ष 1985 में इसे मध्य प्रदेश का राज्य पक्षी घोषित किया गया था।
रेंजर आरके सिंह राठौड़ ने बताया कि दूधराज पक्षी का भोजन छोटे-छोटे कीट पतंगे, मक्खियां और तितलियां हैं। कीटभक्षी दूधराज कीड़ों को हवा में नीचे की ओर उड़ते हुए पकड़ लेते हैं। करीब छह वर्ष तक जीवित रहने वाले इस पक्षी का वजन 20 से 25 ग्राम होता है। नर की पूंछ मादा की अपेक्षा लंबी होती है। ये लाल, भूरे और सफेद होते हैं। श्रीलंका, तुर्की, मलेशिया आदि मुल्कों से चंबल आती हैं।
अप्रैल से जुलाई तक है प्रजनन काल
इंडियन पैराडाइज का प्रजनन काल अप्रैल से जुलाई तक रहता है। नर मादा घोंसले बनाने में घास के तिनकों और टहनियों का इस्तेमाल करते हैं। इनमें मादा ने 3-4 अंडे दिए थे। घोंसले में 12-15 दिन तक अंडे सेते हैं।
शरीर से चार गुना लंबी होती है पूंछ
दूधराज पक्षी की आंखें काली होती हैं। आंखों के पास गहरे नीले और काले रंग की रिंग बनी होती है। वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत संकटग्रस्त प्रजातियों की सूची में दूधराज को कम चिंता वाले पक्षियों की श्रेणी में रखा गया है। इनकी पूंछ शरीर की लंबाई से चार गुना तक होती है।