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क्रांतिकारियों ने जान देकर थाने पर फहराया था तिरंगा, याद में आज भी यहां लगता है शहीद मेला
Wed, 14 Aug 2019 12:20 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैनपुरी
Published by: मुकेश कुमार
Updated Wed, 14 Aug 2019 12:20 AM IST
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शहीद कृष्ण कुमार, सीताराम गुप्ता, जमुना प्रसाद त्रिपाठी
- फोटो : अमर उजाला
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भले ही देश को आजादी 15 अगस्त 1947 को मिली हो, लेकिन क्रांतिकारियों ने बेवर को 14 अगस्त 1942 को एक दिन के लिए स्वतंत्र करा लिया था। क्रांतिकारियों ने अंग्रेज पुलिस को खदेड़ कर थाने पर तिरंगा फहराया। 15 अगस्त को अंग्रेज पुलिस और सेना की ओर से की गई गोलीबारी में बेवर के एक छात्र सहित तीन क्रांतिकारी शहीद हो गए थे।
अगस्त 1942 की राष्ट्रीय क्रांति में महात्मा गांधी की ओर से ‘करो या मरो’ और ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ के आह्वान पर बेवर क्षेत्र की जनता आजादी की लड़ाई में दीवानी होकर उमड़ पड़ी थी। 14 अगस्त 1942 को बेवर थाने पर कब्जा कर तिरंगा फहरा दिया गया।
15 अगस्त को बाहर से आई अंग्रेज पुलिस और सेना ने बेवर थाने पर मौजूद क्रांतिकारियों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। अंग्रेज पुलिस और सेना का मुकाबला करते हुए बेवर के छात्र कृष्ण कुमार, सीताराम गुप्ता, जमुना प्रसाद त्रिपाठी सीने पर गोलियां खाकर शहीद हो गए। उनको आज भी बेवर में हर मौके पर याद किया जाता है।
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अगस्त 1942 की राष्ट्रीय क्रांति में महात्मा गांधी की ओर से ‘करो या मरो’ और ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ के आह्वान पर बेवर क्षेत्र की जनता आजादी की लड़ाई में दीवानी होकर उमड़ पड़ी थी। 14 अगस्त 1942 को बेवर थाने पर कब्जा कर तिरंगा फहरा दिया गया।
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15 अगस्त को बाहर से आई अंग्रेज पुलिस और सेना ने बेवर थाने पर मौजूद क्रांतिकारियों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। अंग्रेज पुलिस और सेना का मुकाबला करते हुए बेवर के छात्र कृष्ण कुमार, सीताराम गुप्ता, जमुना प्रसाद त्रिपाठी सीने पर गोलियां खाकर शहीद हो गए। उनको आज भी बेवर में हर मौके पर याद किया जाता है।
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शहीद स्मारक में स्थापित हैं तीन शहीदों की प्रतिमाएं
बेवर को अंग्रेजों की दासता से मुक्त कराने वाले अमर शहीदों की याद में बेवर में शहीद स्मारक का निर्माण कराया गया। शहीद स्मारक में तीनों शहीदों की प्रतिमाएं और अंग्रेजों से लड़ते हुए शहादत को प्राप्त हुए शहीदों की तस्वीरें जिलेभर के लगाए गए हैं।
बेवर में शहीदों के बलिदान स्थल पर वर्ष 1948 से 15 अगस्त को बलिदान दिवस मनाने का सिलसिला शुरू हो गया। वर्ष 1986 में 23 जनवरी नेता जी सुभाष चंद्र बोस के जन्म दिन से मेले की शुरूआत हो चुकी है। शहीद मेला में देशभर के स्वतंत्रता सेनानियों के वंशज आ चुके हैं।
बेवर में शहीदों के बलिदान स्थल पर वर्ष 1948 से 15 अगस्त को बलिदान दिवस मनाने का सिलसिला शुरू हो गया। वर्ष 1986 में 23 जनवरी नेता जी सुभाष चंद्र बोस के जन्म दिन से मेले की शुरूआत हो चुकी है। शहीद मेला में देशभर के स्वतंत्रता सेनानियों के वंशज आ चुके हैं।