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'लंदन से अमेरिका तक हिंदी के प्रति बढ़ रहा लगाव, विदेशी छात्र बड़े चाव से बोलते हैं यह भाषा'
Mon, 14 Sep 2020 12:11 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Mon, 14 Sep 2020 12:11 AM IST
सार
- हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में केएमआई ने ऑनलाइन माध्यम से किया आयोजन
- नार्वे के मूल निवासियों का भी हिंदी से बहुत लगाव है: सुरेश चंद्र
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अंतरराष्ट्रीय गोष्टी में मौजूद हिंदी भाषाविद्
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी एवं भाषा विज्ञान विद्यापीठ (केएमआई) की ओर से रविवार को हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में ऑनलाइन अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। इसका विषय ‘हिंदी का वैश्विक परिदृश्य: दशा और दिशा’ था।
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संगोष्ठी में नार्वे के साहित्यकार सुरेश चंद्र शुक्ल ने कहा कि नार्वे के मूल निवासियों का भी हिंदी से बहुत लगाव है। हिंदी शिक्षण के लिए यहां विद्यालय चल रहे हैं। सरकार विद्यालयों को खोलने के लिए नि:शुल्क स्थान उपलब्ध कराती है।
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लंदन के ऑक्सफोर्ड शहर में रहने वाले डॉ. पद्मेश गुप्त ने कहा कि लंदन में भारतीय विद्या भवन और अन्य स्वैच्छिक संस्थाएं हिंदी शिक्षण के लिए साप्ताहिक कक्षाएं लगाती हैं। विदेशी मूल के जो विद्यार्थी यहां हिंदी पढ़ने आते हैं, वह दिल से हिंदी को सीखना चाहते हैं। वह भारत से और भारतीय संस्कृति से प्रेम करते हैं।
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'सोशल मीडिया से भी हिंदी का विकास हो रहा है'
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया से भी हिंदी का विकास हो रहा है। अमेरिका की वरिष्ठ कथा लेखिका अनिल प्रभा कुमार ने कहा कि अमेरिकी स्कूलों और विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जाती है। अमेरिकी मूल के विद्यार्थी बड़े चाव से हिंदी में बोलने का और उसे समझने का प्रयास करते हैं।
केएमआई के निदेशक प्रोफेसर प्रदीप श्रीधर ने संगोष्ठी का संचालन किया। उन्होंने कहा कि हिंदी पूरे विश्व में अपने पैर पसार रही है। विश्व में हिंदी की स्वीकारोक्ति बढ़ रही है।
प्रवासी साहित्यकार हिंदी के ब्रांड एंबेसडर: प्रो. अशोक मित्तल
संगोष्ठी के अध्यक्ष कुलपति प्रो. अशोक मित्तल ने कहा कि प्रवासी साहित्यकार विदेशों में हिंदी के ब्रांड एंबेसडर हैं। ये विदेशी सरजमीं पर हिंदी की महक फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि विदेशों में हिंदी के प्रचार-प्रसार में हिंदी सिनेमा की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया से भी हिंदी का विकास हो रहा है। अमेरिका की वरिष्ठ कथा लेखिका अनिल प्रभा कुमार ने कहा कि अमेरिकी स्कूलों और विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जाती है। अमेरिकी मूल के विद्यार्थी बड़े चाव से हिंदी में बोलने का और उसे समझने का प्रयास करते हैं।
केएमआई के निदेशक प्रोफेसर प्रदीप श्रीधर ने संगोष्ठी का संचालन किया। उन्होंने कहा कि हिंदी पूरे विश्व में अपने पैर पसार रही है। विश्व में हिंदी की स्वीकारोक्ति बढ़ रही है।
प्रवासी साहित्यकार हिंदी के ब्रांड एंबेसडर: प्रो. अशोक मित्तल
संगोष्ठी के अध्यक्ष कुलपति प्रो. अशोक मित्तल ने कहा कि प्रवासी साहित्यकार विदेशों में हिंदी के ब्रांड एंबेसडर हैं। ये विदेशी सरजमीं पर हिंदी की महक फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि विदेशों में हिंदी के प्रचार-प्रसार में हिंदी सिनेमा की महत्वपूर्ण भूमिका है।