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Agra News: डॉ. अनिलमान की काव्य कृति प्रणय पंथ पर का लोकार्पण
Mon, 30 Oct 2023 06:54 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Mon, 30 Oct 2023 06:54 PM IST
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डॉ. अनिलमान की काव्य कृति प्रणय पंथ पर का लोकार्पण
- साहित्यकारों ने कहा, कवि की परिपक्व सोच का परिणाम यह पुस्तक है
संवाद न्यूज एजेंसी
मैनपुरी। नगर के एक मैरिज होम में गीतकार एवं कवि डॉ. अनिलमान मिश्रा की काव्य कृति प्रणय पंथ पर का लोकार्पण वरिष्ठ साहित्यकारों के सानिध्य में हुआ। मुख्य वक्ता समालोचक श्रीकृष्ण मिश्र ने संकलन की अनेक पंक्तियों के द्वारा बताया कि यह संग्रह कवि की परिपक्व सोच का परिणाम है।
गीतकार बलराम श्रीवास्तव ने यह संकलन डॉ. अनिलमान को बधाई दी। कवि दीन मोहम्मद दीन ने कविता की शाश्वत संवेदना की चर्चा की। पूर्व प्रधानाचार्य सत्य सेवक मिश्रा ने प्रणय पंथ पर कृति को मानवीय मूल्यों एवं सुंदर भावों की कृति कहा। गीतकार रविंद्र रंजन (शिकोहाबाद) ने इस संकलन की रचनाओं को भावमंजरी बताया।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ कुश चतुर्वेदी (इटावा) ने कहा की आज हिंदी कविता के सामने चुनौतियां हैं। पुस्तक लिखना, छपना सब चुनौतीपूर्ण है। पुस्तक पढ़ने की संस्कृति का विकास होना चाहिए। भिवानी हरियाणा से आए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रमाकांत शर्मा ने पुस्तक की समीक्षा करते हुए कहा कि पुस्तक में भाव एवं शिल्प का अद्भुत समन्वय है।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता साहित्यकार लाखन सिंह भदौरिया ने की। संचालन कवि तारेश अग्निहोत्री ने किया। कार्यक्रम में श्री चंद्र वर्मा, जगदीश चंद्र त्रिपाठी पूर्व प्रधानाचार्य, ओम प्रकाश वर्मा, आशा सक्सेना, मुकेश नादान, जय प्रकाश मिश्रा, सतीश दुबे, देवांशी महेश्वरी।
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- साहित्यकारों ने कहा, कवि की परिपक्व सोच का परिणाम यह पुस्तक है
संवाद न्यूज एजेंसी
मैनपुरी। नगर के एक मैरिज होम में गीतकार एवं कवि डॉ. अनिलमान मिश्रा की काव्य कृति प्रणय पंथ पर का लोकार्पण वरिष्ठ साहित्यकारों के सानिध्य में हुआ। मुख्य वक्ता समालोचक श्रीकृष्ण मिश्र ने संकलन की अनेक पंक्तियों के द्वारा बताया कि यह संग्रह कवि की परिपक्व सोच का परिणाम है।
गीतकार बलराम श्रीवास्तव ने यह संकलन डॉ. अनिलमान को बधाई दी। कवि दीन मोहम्मद दीन ने कविता की शाश्वत संवेदना की चर्चा की। पूर्व प्रधानाचार्य सत्य सेवक मिश्रा ने प्रणय पंथ पर कृति को मानवीय मूल्यों एवं सुंदर भावों की कृति कहा। गीतकार रविंद्र रंजन (शिकोहाबाद) ने इस संकलन की रचनाओं को भावमंजरी बताया।
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कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ कुश चतुर्वेदी (इटावा) ने कहा की आज हिंदी कविता के सामने चुनौतियां हैं। पुस्तक लिखना, छपना सब चुनौतीपूर्ण है। पुस्तक पढ़ने की संस्कृति का विकास होना चाहिए। भिवानी हरियाणा से आए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रमाकांत शर्मा ने पुस्तक की समीक्षा करते हुए कहा कि पुस्तक में भाव एवं शिल्प का अद्भुत समन्वय है।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता साहित्यकार लाखन सिंह भदौरिया ने की। संचालन कवि तारेश अग्निहोत्री ने किया। कार्यक्रम में श्री चंद्र वर्मा, जगदीश चंद्र त्रिपाठी पूर्व प्रधानाचार्य, ओम प्रकाश वर्मा, आशा सक्सेना, मुकेश नादान, जय प्रकाश मिश्रा, सतीश दुबे, देवांशी महेश्वरी।