वृंदावन: फिर से सुर्खियों में रूसी दंपती और सात मंजिला रशियन बिल्डिंग, पुलिस कर रही मुकदमों की जांच
रूसी दंपती ने वृंदावन धाम नाम से सात मंजिला अपार्टमेंट का निर्माण कराया है। यह अपार्टमेंट शुरू से विवादों में है। आरोप है कि सीलिंग की कार्रवाई के बाद भी रूसी दंपती ने इसका सात मंजिला तक निर्माण करा दिया। इसके अलावा भी कई आरोप लग रहे हैं।
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मथुरा के वृंदावन में वीजा संबंधी जानकारी करने गई पुलिस पर हमला करने वाले रूसी दंपती बीते कई वर्ष से विवादों में घिरे रहे हैं। चाहे वह रशियन बिल्डिंग का निर्माण हो या विदेशी महिला की छत से गिरकर मौत। पुलिस कई मामलों में जांच कर रही है। बिल्डिंग के निर्माण की जांच में मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण, अग्निशमन व अन्य विभाग के कई अधिकारी भी फंस सकते हैं।
शुरू से ही विवादों में यह बिल्डिंग
मूलरूप से रूस के रहने वाले नतालिया क्रिवोनोसावा और रोमानोमा योरोस्व्लोव 2013 में टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे। इसके बाद उन्होंने रमनरेती पुलिस चौकी क्षेत्र के तहत राधा टीला के निकट स्थित वृंदावन धाम अपार्टमेंट (रशियन बिल्डिंग) का निर्माण कार्य शुरू कराया। इस बिल्डिंग का निर्माण शुरू होने के बाद ही विवाद शुरू हो गया।
स्थानीय लोगों की शिकायत पर मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण ने बिल्डिंग का निर्माण अवैध बताते हुए सीलिंग की कार्रवाई कर दी। इसके बाद सीलिंग को दरकिनार करते हुए सात मंजिला इमारत को खड़ा कर दिया गया। 26 सिंतबर 2020 को उस समय पुन: सीलिंग की कार्रवाई अमल में लाई गई, जब बिल्डिंग के जेनरेटर रूम में आग की घटना हो गई। इसके बाद अग्निशमन विभाग एवं विप्रा के अधिकारी हरकत में आए।
अग्निशमन नियमों का नहीं हुआ था पालन
विकास प्राधिकरण ने अपार्टमेंट की ऊपरी तीन मंजिल को अवैध बताते हुए हुए सीलिंग की कार्रवाई की। अग्निशमन विभाग ने बिल्डिंग में अग्निशमन के नियमों का अनुपालन न किए जाने पर ट्रस्टियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। विभाग ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि वृंदावन धाम अपार्टमेंट (रशियन बिल्डिंग) के जेनरेटर रूम में शार्ट सर्किट के कारण आग लग गई थी।गनीमत रही समय रहते आग पर काबू पाए जाने के कारण कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। सीलिंग की कई बार हुई कार्रवाई के बाद भी बिल्डिंग बनकर तैयार हो गई। इस बिल्डिंग में करीब 163 फ्लैट हैं, जिनमें अधिकांश विदेशी भक्त निवास करते हैं। कोतवाली प्रभारी अजय कौशल ने बताया कि इमारत के निर्माण को लेकर हुए मुकदमों की जांच फिर से की जाएगी। कागजों का अध्ययन करने के बाद अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा।