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Agra News: आईसीयू के मरीजों को मिलेगा पौष्टिक आहार, दिया प्रशिक्षण

Sat, 16 May 2026 02:40 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sat, 16 May 2026 02:40 AM IST
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ICU patients will get nutritious food, training given
आगरा। आईसीयू में टूटती सांसों के बीच मरीजों को पौष्टिक आहार न मिलने से जान का खतरा अधिक होता है। इसके लिए इंडियन सोसाइटी ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन की ओर से एसएन मेडिकल कॉलेज में कार्यशाला आयोजित कर चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिया गया।
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सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. रणवीर त्यागी ने बताया कि आईसीयू में भर्ती मरीजों के एंटीबायोटिक दवाओं समेत अन्य इलाज पर ही चिकित्सक का ज्यादा ध्यान रहता है। ऐसे में पौष्टिक आहार नहीं मिलने से मरीज कुपोषण का शिकार होने लगता है। शारीरिक क्षमता भी प्रभावित होती है। जैसे कि सिर की चोट का मरीज है तो उसका पाचन तंत्र बेहतर कार्य करता है। ऐसे अन्य मरीजों को नाक में नली के जरिये तरल पौष्टिक भोजन पहुंचाने पर जोर दिया गया। इससे मरीज को आहार मिलता रहेगा और कुपोषण से बचाव होगा।
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सचिव डॉ. अतिहर्ष मोहन अग्रवाल ने बताया कि कई मरीज को आहार नहीं मिलने से आंत का संचालन रुक जाता है। इससे आंत में संक्रमण होने लगता है और जान का खतरा और बढ़ जाता है। आहार मिलने से मरीज का कुपोषण से बचाव होगा और ठीक होने की दर भी बढ़ेगी। ऐसे में मरीज को कैसे आहार दें, किन परिस्थिति में आहार न दें, इन तमाम बिंदुओं पर कार्यशाला में जानकारी दी गई। इस दौरान डॉ. तरुण सिंघल, डॉ. दीप्तिमाला अग्रवाल, डॉ. अनुपम शर्मा, डॉ. संजय गुप्ता, डाॅ. रजत अरोड़ा, डाॅ. अर्चना अग्रवाल, डॉ. लव प्रिया, डॉ. हेमंत बंसल आदि मौजूद रहे।
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सीपैप से बची 1650 नवजातों की जान

- एसएन मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में सीपैप से बीते एक साल में 1650 नवजातों की जान बची है। बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. पंकज कुमार ने बताया कि प्री-मेच्योर नवजात के फेफड़े पूर्ण रूप से कार्य नहीं करते हैं। ऐसी स्थिति में सीपैप से ऑक्सीजन देते हैं। इससे नवजात को सांस लेने में आसानी होती है। ये वेंटिलेटर के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित और कारगर है। बाल रोग विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. नीरज यादव ने बताया कि बाल रोग में 24 बेड का एनआईसीयू है। इसमें साल भर में 1800 नवजात भर्ती हुए, जिसमें से 1650 की जान बचाई गई। यहां तक कि 800 ग्राम से एक किलो वजनी नवजात की भी जान बचाई है।
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