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धक्के खाउंगा, आर्थिक भार सह लूंगा, लेकिन रिश्वत नहीं दूंगा
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कासगंज। रिश्वतखोरों को आइना दिखाने वालों की कमी नहीं है। जिले के शेरवानी इंटर कालेज से 9 वर्ष पूर्व सेवानिवृत हुए लिपिक मूलरूप से देश के प्रथम राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद के गांव के रहने वाले हैं। सेवानिवृति के बाद अपने बकाया देयकों के लिए 9 साल से बिहार से कासगंज के चक्कर लगा रहे हैं। राह में दिक्कतों के साथ अतिरिक्त खर्च भी वहन कर रहे हैं, लेकिन संकल्प है कि दिक्कतें और आर्थिक भार सह लूंगा लेकिन रिश्वत नहीं दूंगा।
बिहार प्रांत के जिला सीवान के गांव जिरादेई निवासी शिवनारायन वर्ष 2012 में शेरवानी इंटर कालेज न्यौली से लिपिक के पद से सेवानिवृत हुए हैं। इनका आरोप है कि सामूहिक बीमा की राशि एवं सातवें वेतन का अवशेष पाने के लिए अधिकारियों से लेकर लिपिकों से संपर्क कर चुके हैं, लेकिन भुगतान नहीं हो रहा है। कहते हैं उन्होंने आजतक भुगतान के एवज में किसी को सुविधा शुल्क नहीं दिया। लिपिक का कहना है कि प्रथम राष्ट्रपति के गांव का होने के नाते मैं यह संदेश देना चाहता हूं कि रिश्वतखोरी को कहीं जगह नहीं मिलनी चाहिए।
कहते हैं नौ वर्ष से हर साल बिहार से कासगंज आते हैं। सफर में दिक्कतें तो होती ही हैं और लगभग 5000 रुपये एक बार आने में खर्च होता है। कुछ लोगों ने समझाया कि जितना किराये पर खर्च कर रहे हो उतना सुविधा शुल्क दे देते तो अब तक काम हो जाता। लिपिक का कहना है कि उन्होंने संकल्प लिया है कि सुविधा शुल्क नहीं दूंगा। उन्होंने जिलाधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, शेरवानी इंटर कालेज न्यौली के प्रधानाचार्य को प्रार्थना पत्र देकर बकाया देयकों के भुगतान की मांग की है।
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जनपद में लगभग 7 महीने से मैं तैनात हूं। यह प्रकरण मेरे संज्ञान में नहीं आया है। पूरे मामले की जानकारी करूंगा और समस्या का समाधान कराया जाएगा। किसी भी सेवानिवृत कर्मी को परेशान नहीं होने दिया जाएगा। - एसपी सिंह, डीआईओएस।
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बिहार प्रांत के जिला सीवान के गांव जिरादेई निवासी शिवनारायन वर्ष 2012 में शेरवानी इंटर कालेज न्यौली से लिपिक के पद से सेवानिवृत हुए हैं। इनका आरोप है कि सामूहिक बीमा की राशि एवं सातवें वेतन का अवशेष पाने के लिए अधिकारियों से लेकर लिपिकों से संपर्क कर चुके हैं, लेकिन भुगतान नहीं हो रहा है। कहते हैं उन्होंने आजतक भुगतान के एवज में किसी को सुविधा शुल्क नहीं दिया। लिपिक का कहना है कि प्रथम राष्ट्रपति के गांव का होने के नाते मैं यह संदेश देना चाहता हूं कि रिश्वतखोरी को कहीं जगह नहीं मिलनी चाहिए।
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कहते हैं नौ वर्ष से हर साल बिहार से कासगंज आते हैं। सफर में दिक्कतें तो होती ही हैं और लगभग 5000 रुपये एक बार आने में खर्च होता है। कुछ लोगों ने समझाया कि जितना किराये पर खर्च कर रहे हो उतना सुविधा शुल्क दे देते तो अब तक काम हो जाता। लिपिक का कहना है कि उन्होंने संकल्प लिया है कि सुविधा शुल्क नहीं दूंगा। उन्होंने जिलाधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, शेरवानी इंटर कालेज न्यौली के प्रधानाचार्य को प्रार्थना पत्र देकर बकाया देयकों के भुगतान की मांग की है।
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जनपद में लगभग 7 महीने से मैं तैनात हूं। यह प्रकरण मेरे संज्ञान में नहीं आया है। पूरे मामले की जानकारी करूंगा और समस्या का समाधान कराया जाएगा। किसी भी सेवानिवृत कर्मी को परेशान नहीं होने दिया जाएगा। - एसपी सिंह, डीआईओएस।