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38 घंटे घुटनभरी यात्रा करके पहुंच पाया हंगरी बॉर्डर
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कासगंज। यूक्रेन से भारत लौटी गर्विता माहेश्वरी अपने माता पिता के साथ
- फोटो : KASGANJ
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कासगंज। रूस के हमले के बाद यूक्रेन में फंसे जिले के छात्र शिवकुमार की सोमवार को घर वापसी हो गई है। वह रविवार को दिल्ली आ गए थे। शिवकुमार ने बताया कि हमले के बाद से पूरे यूक्रेन में लगातार दहशत का माहौल बना हुआ है। हर किसी के चेहरे पर भय, दहशत, तनाव साफ दिखाई देता है। शिवकुमार ने बताया कि वे काफी मुश्किल से यूक्रेन से बाहर जाने के लिए निकल पाए। 38 घंटे तक हंगरी बॉर्डर पर पहुंचने के लिए घुटनभरी यात्रा की। तब हंगरी बॉर्डर पहुंचे।
घर वापसी होने पर वह काफी खुश नजर आ रहा था। शिवकुमार ने बताया कि वह यूक्रेन के जापोरिज्ज्या में मेडिकल के छात्र हैं। वहां से निकलने के लिए जिस ट्रेन से वह हंगरी बॉर्डर पर पहुंच पाए उस ट्रेन इतनी भीड़ थी कि सांस लेना भी मुश्किल हो रहा था। दम घुट रहा था। ट्रेन में कई यात्रियों की तबीयत बिगड़ी। जिन्हें एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया गया। क्योंकि वहां ट्रेन के अलावा कोई और ट्रांसपोर्ट संचालित नहीं था। यूक्रेन के हर शहर से लोग आश्रय के लिए पड़ोसी देशों में जा रहे हैं। ट्रेन की भीड़ से बचने का कोई रास्ता नहीं था और हर हाल में यात्रा करना मजबूरी थी। उन्होंने बताया कि गनीमत रही कि बाहर निकल आए। चूंकि जापोरिज्जया में रूस ने परमाणु संयत्र पर ही हमला कर दिया। जापोरिज्ज्या में भी हालत संवेदनशील थे और लगातार बने हुए हैं। शिवकुमार बोला कि अब वह अपने घर पहुंचकर काफी खुश है। परिवार के लोगों ने शिवकुमार की आरती उतारी, तिलक किया।
दो दिन की यात्रा करके गर्विता पहुंची हंगरी बॉर्डर
कासगंज। जिले के यूक्रेन में फंसे सभी छात्र छात्राएं भारत वापस आ चुके हैं। अंतिम छात्रा के रूप में गर्विता माहेश्वरी की हंगरी के रास्ते से भारत पहुंची हैं। उनके परिजन दिल्ली एयरपोर्ट से रिसीव करके गर्विता को लेकर सोमवार की शाम घर पर पहुंचे। गर्विता ने कहा कि दहशत और भय के बीच दो दिन मुश्किल भरी यात्रा करते हुए वह हंगरी बॉर्डर पर पहुंची। उसने बताया कि यूक्रेन में हालात इतने बिगड़े हुए थे कि खाने पीने की चीजें भी नहीं मिल रहीं थीं और कहीं मिल रहीं थी तो उनकी कीमतें ऊंची थीं।
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गर्विता ने बताया कि यूक्रेन के विनीसिया से मेडिकल तृतीय वर्ष की छात्रा है। रूस के हमले के बाद से पूरे यूक्रेन में बुरे हालात हैं। अफरा तफरी और दहशत का माहौल बना हुआ है। लगातार बमबारी, रॉकेट और मिसाइल के हमले हो रहे हैं। इन धमाकों के बीच बंकर में छिपकर रहना पड़ा और खाने पीने के सामान की किल्लत का सामना करना पड़ा। बिगड़े हालात के बीच जैसे तैसे एक गाड़ी करके हंगरी बॉर्डर के लिए निकले। साथी छात्राएं भी साथ थीं। दो दिन की थका देने वाली यात्रा के बाद हंगरी बॉर्डर पर पहुंच पाए। जहां तीन दिन टिकट के लिए इंतजार करना पड़ा। रविवार की रात हंगरी से भारतीय छात्र-छात्राओं की अंतिम फ्लाइट रवाना की गई। जिसमें वह शामिल थी। सोमवार को वह घर पहुंची है। पिता प्रियदर्शन माहेश्वरी, मां अनु माहेश्वरी, भाई समर्थ माहेश्वरी उसे लेने एयरपोर्ट पहुंचे।
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घर वापसी होने पर वह काफी खुश नजर आ रहा था। शिवकुमार ने बताया कि वह यूक्रेन के जापोरिज्ज्या में मेडिकल के छात्र हैं। वहां से निकलने के लिए जिस ट्रेन से वह हंगरी बॉर्डर पर पहुंच पाए उस ट्रेन इतनी भीड़ थी कि सांस लेना भी मुश्किल हो रहा था। दम घुट रहा था। ट्रेन में कई यात्रियों की तबीयत बिगड़ी। जिन्हें एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया गया। क्योंकि वहां ट्रेन के अलावा कोई और ट्रांसपोर्ट संचालित नहीं था। यूक्रेन के हर शहर से लोग आश्रय के लिए पड़ोसी देशों में जा रहे हैं। ट्रेन की भीड़ से बचने का कोई रास्ता नहीं था और हर हाल में यात्रा करना मजबूरी थी। उन्होंने बताया कि गनीमत रही कि बाहर निकल आए। चूंकि जापोरिज्जया में रूस ने परमाणु संयत्र पर ही हमला कर दिया। जापोरिज्ज्या में भी हालत संवेदनशील थे और लगातार बने हुए हैं। शिवकुमार बोला कि अब वह अपने घर पहुंचकर काफी खुश है। परिवार के लोगों ने शिवकुमार की आरती उतारी, तिलक किया।
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दो दिन की यात्रा करके गर्विता पहुंची हंगरी बॉर्डर
कासगंज। जिले के यूक्रेन में फंसे सभी छात्र छात्राएं भारत वापस आ चुके हैं। अंतिम छात्रा के रूप में गर्विता माहेश्वरी की हंगरी के रास्ते से भारत पहुंची हैं। उनके परिजन दिल्ली एयरपोर्ट से रिसीव करके गर्विता को लेकर सोमवार की शाम घर पर पहुंचे। गर्विता ने कहा कि दहशत और भय के बीच दो दिन मुश्किल भरी यात्रा करते हुए वह हंगरी बॉर्डर पर पहुंची। उसने बताया कि यूक्रेन में हालात इतने बिगड़े हुए थे कि खाने पीने की चीजें भी नहीं मिल रहीं थीं और कहीं मिल रहीं थी तो उनकी कीमतें ऊंची थीं।
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गर्विता ने बताया कि यूक्रेन के विनीसिया से मेडिकल तृतीय वर्ष की छात्रा है। रूस के हमले के बाद से पूरे यूक्रेन में बुरे हालात हैं। अफरा तफरी और दहशत का माहौल बना हुआ है। लगातार बमबारी, रॉकेट और मिसाइल के हमले हो रहे हैं। इन धमाकों के बीच बंकर में छिपकर रहना पड़ा और खाने पीने के सामान की किल्लत का सामना करना पड़ा। बिगड़े हालात के बीच जैसे तैसे एक गाड़ी करके हंगरी बॉर्डर के लिए निकले। साथी छात्राएं भी साथ थीं। दो दिन की थका देने वाली यात्रा के बाद हंगरी बॉर्डर पर पहुंच पाए। जहां तीन दिन टिकट के लिए इंतजार करना पड़ा। रविवार की रात हंगरी से भारतीय छात्र-छात्राओं की अंतिम फ्लाइट रवाना की गई। जिसमें वह शामिल थी। सोमवार को वह घर पहुंची है। पिता प्रियदर्शन माहेश्वरी, मां अनु माहेश्वरी, भाई समर्थ माहेश्वरी उसे लेने एयरपोर्ट पहुंचे।