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आगरा: स्कूलों की हवा बच्चों के लिए कितनी मुफीद, परख रही विश्वविद्यालय की टीम
Fri, 17 Sep 2021 04:13 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 17 Sep 2021 04:13 PM IST
सार
विश्वविद्यालय के डीन रिसर्च व रसायन विज्ञान विभाग के प्रो. अजय तनेजा की ओर से शासन को मेजर प्रोजेक्ट ‘इंडोर एयर क्वालिटी ऑफ डिफरेंट स्कूल्स’ का प्रस्ताव भेजा गया था। इसको मंजूरी दे दी गई है।
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आगरा: स्कूलों की हवा परखने के लिए आई मशीन
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
विद्यार्थियों के लिए स्कूल उनका दूसरा घर होता है। यहां वह छह से सात घंटे बिताते हैं। बच्चों के सांस लेने की दर भी अधिक होती है। ऐसे में स्कूल के अंदर (कक्षों) की हवा विद्यार्थियों के लिए कितनी मुफीद है, यह पता करने के लिए डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग की टीम अध्ययन कर रही है। जिले के आठ स्कूलों का चयन किया गया है। एक वर्ष तक प्रोजेक्ट पर काम किया जाएगा।
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विश्वविद्यालय के डीन रिसर्च व रसायन विज्ञान विभाग के प्रो. अजय तनेजा की ओर से शासन को मेजर प्रोजेक्ट ‘इंडोर एयर क्वालिटी ऑफ डिफरेंट स्कूल्स’ का प्रस्ताव भेजा गया था। इसको मंजूरी दे दी गई है। एक वर्ष के इस प्रोजेक्ट के लिए पांच लाख रुपये का बजट दिया गया है। प्रमुख जांचकर्ता (प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर) प्रो. अजय तनेजा के निर्देशन में तीन सहायक प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। इसमें स्तुति दुबे, रिनी जॉन, शैलेंद्र प्रताप सिंह हैं। सड़क के किनारे स्थित, आबादी में स्थिति और ग्रामीण क्षेत्र में स्थित आठ स्कूलों का चयन अध्ययन के लिए किया गया है।
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प्रो. तनेजा ने बताया कि पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) कंस्ट्रेशन के जरिये हवा की गुणवत्ता की जांच की जा रही है। मशीन नौ लीटर प्रति मिनट हवा खींचती है। इसके जरिये स्कूल की कक्षाओं में पीएम की स्थिति का पता किया जाएगा। इसमें बेहद सूक्ष्म कणों पीएम 2.5 से 10 माइक्रोन मीटर, 01-2.5 माइक्रोन मीटर, 0.5 से 01 माइक्रोन मीटर, .25 से .5 माइक्रोन मीटर व .25 से नीचे की उपस्थिति की जानकारी की जाएगी।
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शासन को दी जाएगी रिपोर्ट दी जाएगी
प्रोजेक्ट प्रमुख जांचकर्ता प्रो. अजय तनेजा ने बताया कि अध्ययन पूरा होने के बाद पेपर प्रकाशित किया जाएगा। इसके साथ ही शासन को रिपोर्ट भेजकर वस्तुस्थिति से अवगत कराया जाएगा। स्कूलों के अंदर वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए उपाय भी बताए जाएंगे। विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिहाज से स्कूल प्रबंधन खुद भी उन उपायों को अपना सकेगा। शासन स्तर से भी नीति निर्धारित की जा सकती है।
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