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अब होटल इंडस्ट्री पर भी निशाना
अब होटल इंडस्ट्री पर भी निशाना
Updated Mon, 24 Oct 2016 12:54 AM IST
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प्रीति ने पति संग किया ताज का दीदार 7
- फोटो : PTI
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व्हाइट कैटेगरी के मुद्दे पर ताज ट्रिपेजियम जोन में आगरा, मथुरा और फीरोजाबाद के उद्यमियों ने एकजुट होकर संघर्ष करने का एलान किया। होटल इंडस्ट्री को भी इस कैटेगरी में शामिल करने का पर्यटन उद्यमियों ने कड़ा एतराज जताया। उनका कहना है कि आगरा में होटल इंडस्ट्री ही बची थी, अब वह भी निशाने पर आ गई। ऐसे में आगरा में कोई उद्योग ही नहीं बच सकेगा।
संजय प्लेस स्थित होटल में रविवार की शाम को आयोजित बैठक में वक्ताओं ने कहा कि टीटीजेड के अंतर्गत तदर्थ रूप से नए उद्योगों की स्थापना व विस्तार पर प्रतिबंध वायु प्रदूषण के आधार पर लगाया गया है, लेकिन इसमें कोल्ड स्टोरेज और होटल उद्योग को भी शामिल किया गया है, जोकि किसी प्रकार का वायु प्रदूषण नहीं फैला रहे हैं। आगरा डेवलपमेंट फाउंडेशन के सचिव केसी जैन ने बताया कि आगरा में सल्फर डाई आक्साइड और नाइट्रोजन डाई आक्साइड के स्तर मानकों के अनुरूप पाए गए। महज पार्टिकुलेटेड मैटर (पीएम) को मानक से अधिक 10 पाया गया। ये पीएम (धूल के कण) को बढ़ाने में इंडस्ट्री का कोई योगदान नहीं है।
प्रदूषण बढ़ने के पीछे आगरा की खस्ता सड़कें, हजारों प्रदूषणकारी वाहन, हरियाली की कमी, सूखी यमुना, कूड़ा निस्तारण की सही योजना आदि हैं। इसके लिए एडीए, नगर निगम, लोक निर्माण जैसे विभाग जिम्मेदार हैं। इंजीनियर उमेश शर्मा का कहना था कि आगरा लंबे समय से टीटीजेड की मार झेल रहा है। तर्कसंगत कारणों के आधार पर ही कोई निर्णय होना चाहिए।
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अमर मित्तल ने कहा कि केवल उद्योगपतियों को ही साफ्ट टारगेट मानकर फैसले किए जा रहे हैं। सभी संगठन एकजुट होकर इस संघर्ष को आगे आएं। मथुरा के व्यवसायी कृष्ण बिहारी ने कहा कि टीटीजेड के कई अव्यवहारिक निर्णयों को चुनौती देनी होगी।
होटल आनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रमेश बाधवा ने कहा कि ताजनगरी में होटल इंडस्ट्री ही बची है, इसे भी निशाने पर ले लिया गया। ताजमहल पर प्रोजेक्ट के कार्यों में हो रहा प्रदूषण नीरी को नहीं दिखाई दिया। अध्यक्षता करते हुए एफमैक के अध्यक्ष पूरन डावर ने उद्योगों के लिए की गई लाल, नारंगी, हरा और सफेद के वर्गीकरण को गलत बताया। सांसद प्रतिनिधि प्रमोद गुप्ता गांधी ने सांसद रामशंकर कठेरिया की ओर से समर्थन का वायदा किया। इस मौके पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डा. रामकरन ने भी तर्क दिए। कहा कि अब नए उद्योगों को एनओसी पर रोक रहेगी। संचालन राकेश गर्ग ने किया। इस मौके पर प्रहलाद अग्रवाल, भुवेश अग्रवाल, नितिन वार्ष्णेय, अरुण डंग, अशोक गोयल, अवनीश शिरोमणि, अनुज सिंघल, विजय गुप्ता, डा. राजीव अग्रवाल, मनोज कुमार अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
कमेटी का गठन
उद्यमियों ने अपनी लड़ाई लड़ने को कमेटी का गठन किया है। इसमें पूरन डावर, राकेश गर्ग, राकेश अग्रवाल, अरुण डंग समेत अन्य इंड्रस्टीज से जुड़े लोगों को शामिल किया गया है।
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संजय प्लेस स्थित होटल में रविवार की शाम को आयोजित बैठक में वक्ताओं ने कहा कि टीटीजेड के अंतर्गत तदर्थ रूप से नए उद्योगों की स्थापना व विस्तार पर प्रतिबंध वायु प्रदूषण के आधार पर लगाया गया है, लेकिन इसमें कोल्ड स्टोरेज और होटल उद्योग को भी शामिल किया गया है, जोकि किसी प्रकार का वायु प्रदूषण नहीं फैला रहे हैं। आगरा डेवलपमेंट फाउंडेशन के सचिव केसी जैन ने बताया कि आगरा में सल्फर डाई आक्साइड और नाइट्रोजन डाई आक्साइड के स्तर मानकों के अनुरूप पाए गए। महज पार्टिकुलेटेड मैटर (पीएम) को मानक से अधिक 10 पाया गया। ये पीएम (धूल के कण) को बढ़ाने में इंडस्ट्री का कोई योगदान नहीं है।
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प्रदूषण बढ़ने के पीछे आगरा की खस्ता सड़कें, हजारों प्रदूषणकारी वाहन, हरियाली की कमी, सूखी यमुना, कूड़ा निस्तारण की सही योजना आदि हैं। इसके लिए एडीए, नगर निगम, लोक निर्माण जैसे विभाग जिम्मेदार हैं। इंजीनियर उमेश शर्मा का कहना था कि आगरा लंबे समय से टीटीजेड की मार झेल रहा है। तर्कसंगत कारणों के आधार पर ही कोई निर्णय होना चाहिए।
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अमर मित्तल ने कहा कि केवल उद्योगपतियों को ही साफ्ट टारगेट मानकर फैसले किए जा रहे हैं। सभी संगठन एकजुट होकर इस संघर्ष को आगे आएं। मथुरा के व्यवसायी कृष्ण बिहारी ने कहा कि टीटीजेड के कई अव्यवहारिक निर्णयों को चुनौती देनी होगी।
होटल आनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रमेश बाधवा ने कहा कि ताजनगरी में होटल इंडस्ट्री ही बची है, इसे भी निशाने पर ले लिया गया। ताजमहल पर प्रोजेक्ट के कार्यों में हो रहा प्रदूषण नीरी को नहीं दिखाई दिया। अध्यक्षता करते हुए एफमैक के अध्यक्ष पूरन डावर ने उद्योगों के लिए की गई लाल, नारंगी, हरा और सफेद के वर्गीकरण को गलत बताया। सांसद प्रतिनिधि प्रमोद गुप्ता गांधी ने सांसद रामशंकर कठेरिया की ओर से समर्थन का वायदा किया। इस मौके पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डा. रामकरन ने भी तर्क दिए। कहा कि अब नए उद्योगों को एनओसी पर रोक रहेगी। संचालन राकेश गर्ग ने किया। इस मौके पर प्रहलाद अग्रवाल, भुवेश अग्रवाल, नितिन वार्ष्णेय, अरुण डंग, अशोक गोयल, अवनीश शिरोमणि, अनुज सिंघल, विजय गुप्ता, डा. राजीव अग्रवाल, मनोज कुमार अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
कमेटी का गठन
उद्यमियों ने अपनी लड़ाई लड़ने को कमेटी का गठन किया है। इसमें पूरन डावर, राकेश गर्ग, राकेश अग्रवाल, अरुण डंग समेत अन्य इंड्रस्टीज से जुड़े लोगों को शामिल किया गया है।