आगरा: बढ़ते तापमान के 'तनाव' ने बिगाड़ा दिमाग का मिजाज, गर्मी से युवाओं में बढ़ रहा गुस्सा-चिड़चिड़ापन
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के डॉ. दिनेश राठौर ने बताया कि सामान्य दिनों में 160 से 180 मरीज ओपीडी में रोज आ रहे थे, लेकिन जून की बात करें तो पारा बढ़ने पर फिजियोलॉजिकल स्ट्रेस के रोजाना 225 से 250 तक मरीज आ रहे हैं। इनमें 15 से 20 मरीज नए होते हैं।
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विस्तार
भीषण गर्मी से लोगों में गुस्सा और चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है। नींद पूरी नहीं होने से समस्या अधिक बढ़ गई है। वहीं मानसिक रोगियों की मर्ज गंभीर हो गई है। मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में बीते 20 दिनों से 25 फीसदी मरीज बढ़ गए हैं।
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के डॉ. दिनेश राठौर ने बताया कि सामान्य दिनों में 160 से 180 मरीज ओपीडी में रोज आ रहे थे, लेकिन जून की बात करें तो पारा बढ़ने पर फिजियोलॉजिकल स्ट्रेस के रोजाना 225 से 250 तक मरीज आ रहे हैं। इनमें 15 से 20 मरीज नए होते हैं। इनमें चिड़चिड़ापन, बात-बात पर गुस्सा करना, भूख न लगना, सिर भारी रहना, सिर के दर्द की परेशानी मिली। इसके अलावा वे मरीज हैं जिनमें मानसिक विकार ठीक हो गए थे लेकिन गर्मी के कारण मर्ज की पुनरावृत्ति हो गई। ऐसे मरीजों को दवा देने के साथ पर्याप्त नींद लेने की सलाह दी जा रही है।
केस 1
सिकंदरा निवासी 42 साल के युवक के कमीशन एजेंट में विगत दिनों में गुस्सा अधिक होने की समस्या बढ़ गई। रास्ते में करीब रोजाना झगड़ा कर लेते थे। घर पर भी छोटी बातों पर चिल्लाना, सामान फेंक देने की परेशानी होने लगी। मामला बढ़ने पर मनोचिकित्सक से परामर्श लिया।
नींद उड़ी, बेचैन रहते हैं
राजपुर चुंगी के 36 साल के युवक मानसिक रूप से परेशान थे। तीन साल इलाज के बाद हालत ठीक थी, लेकिन इस बार की भीषण गर्मी में मानसिक परेशानी फिर से शुरू हो गई। पूछताछ में परिजनों से बताया कि नींद नहीं आती, दिन में भी बैचेन रहता है।
नींद पूरी न होने से परेशानी: डॉ. गुरनानी
वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. केसी गुरनानी ने बताया कि गर्मी के कारण लोगों को नींद पूरी नहीं होती, इससे दिन भर फिजियोलॉजिकल स्ट्रेस बना रहता है। भूख कम लगती है, इससे सिर दर्द, कमजोरी, थकान होने लगती है। लंबे समय तक ऐसा होने पर लोगों में तेज आवाज में बोलना, बात-बात पर गुस्सा करना, झगड़ा करने जैसी परेशानी होने लगती है लेकिन यह अस्थायी है।
कामकाजी युवाओं की संख्या अधिक है
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में 25 से 45 साल के कामकाजी युवाओं की संख्या अधिक है। इन पर काम के दबाव अधिक है और रात में भी नींद प्रभावित होती है।
ये बरतें सावधानी
- हर आधा घंटे में थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें।
- रात को गरिष्ठ भोजन न करें, पौष्टिक खाना खाएं।
- फोन, कंप्यूटर, टीवी पर समय कम बिताएं।
- सुबह और शाम को काम निबटाने पर जोर दें।
- मानसिक रोगी दवाएं बंद न करें।
- खुद को व्यस्त रखें और जल्दी सोएं।