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राहत: कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए कारगर साबित हुआ होम आइसोलेशन, ठीक हुए 2917 मरीज
Fri, 16 Oct 2020 11:13 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 16 Oct 2020 11:13 AM IST
सार
- 332 मरीज अभी होम आइसोलेशन में हैं
- 692 मरीज निजी अस्पताल में कराया इलाज
- 46 मरीज अभी निजी अस्पताल में हैं भर्ती
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स्वास्थ्य की जांच करती टीम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
संक्रमित मरीजों के लिए होम आइसोलेशन कारगर साबित हो रहा है। मानसिक सेहत तो ठीक है ही आयुर्वेद और बुखार-खांसी की दवा से मर्ज ठीक हो रहा है। हालत यह है कि कुल मरीजों में से आधे से ज्यादा मरीज घर में ही ठीक हो गए हैं।
अभी तक कोरोना के 6459 मरीज मिल चुके हैं। इसमें से 3249 मरीज होम आइसोलेशन में रहे। इनमें से 2917 मरीजों ने ठीक होकर कामकाज संभाल लिया है। 332 मरीज अभी भी होम आइसोलेशन में हैं।
घर में रहकर गुनगुना पानी, दूध, हर्बल चाय, फल, च्यवनप्राश, दाल, चपाती, रोग प्रतिरोधक दवाएं खा रहे हैं। बुखार-खांसी और गले में दिक्कत होने पर चिकित्सक की ओर से लिखी गईं दवाएं ले रहे हैं। दोबारा जांच कराने पर पांच से सात दिन में ही पहली रिपोर्ट निगेटिव आ रही है।
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अभी तक कोरोना के 6459 मरीज मिल चुके हैं। इसमें से 3249 मरीज होम आइसोलेशन में रहे। इनमें से 2917 मरीजों ने ठीक होकर कामकाज संभाल लिया है। 332 मरीज अभी भी होम आइसोलेशन में हैं।
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घर में रहकर गुनगुना पानी, दूध, हर्बल चाय, फल, च्यवनप्राश, दाल, चपाती, रोग प्रतिरोधक दवाएं खा रहे हैं। बुखार-खांसी और गले में दिक्कत होने पर चिकित्सक की ओर से लिखी गईं दवाएं ले रहे हैं। दोबारा जांच कराने पर पांच से सात दिन में ही पहली रिपोर्ट निगेटिव आ रही है।
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घर में रहना मानसिक रूप से बेहतर
होम आइसोलेशन में रहने से मरीज को मानसिक रूप से भी बेहतर प्रभाव पड़ता है। तय समय पर पौष्टिक भोजन शरीर में पहुंचने पर रोग प्रतिरोधक क्षमता तेजी से बढ़ती है। अभी तक मिले कुल संक्रमित मरीजों में से आधे से ज्यादा मरीज होम आइसोलेशन में रहे और ठीक हुए। - डॉ. आरसी पांडेय, सीएमओ
काउंसिलिंग की जरूरत नहीं पड़ी
होम आइसोलेशन में रहने से मरीज को पारिवारिक माहौल रहा। बीमार होने से मानसकि स्थिति भी ठीक रही। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के प्रभारी डॉ. पीके शर्मा ने बताया कि होम आइसोलेशन के मरीजों की मानसिक सेहत सामान्य मिली। उनकी काउंसिलिंग की जरूरत नहीं पड़ी।
एल-टू मरीजों का निजी अस्पताल में ढाई लाख से ज्यादा खर्च
निजी अस्पतालों में संक्रमित मरीजों के इलाज का खर्च काफी महंगा है। एल-टू मरीजों का निजी अस्पतालों में ढाई लाख रुपये से भी अधिक खर्च हो रहे हैं। एल-तीन के मरीजों का तो बिल पांच से सात लाख रुपये तक है। एसएन मेडिकल कॉलेज में समेत सरकारी अस्पताल में मरीजों का इलाज निशुल्क हो रहा है। होम आइसोलेशन वाले मरीजों में पौष्टिक आहार और आयुर्वेद दवाओं का खर्च मिलाकर तीन से पांच हजार रुपये खर्च हो रहे हैं।
41 एसएन और 46 मरीज निजी अस्पताल में भर्ती
अभी कुल 87 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, इसमें से 41 मरीज एसएन कॉलेज और 46 मरीज निजी अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। एसएन में 41 में से 20 आईसीयू में भर्ती हैं।
होम आइसोलेशन में रहने से मरीज को मानसिक रूप से भी बेहतर प्रभाव पड़ता है। तय समय पर पौष्टिक भोजन शरीर में पहुंचने पर रोग प्रतिरोधक क्षमता तेजी से बढ़ती है। अभी तक मिले कुल संक्रमित मरीजों में से आधे से ज्यादा मरीज होम आइसोलेशन में रहे और ठीक हुए। - डॉ. आरसी पांडेय, सीएमओ
काउंसिलिंग की जरूरत नहीं पड़ी
होम आइसोलेशन में रहने से मरीज को पारिवारिक माहौल रहा। बीमार होने से मानसकि स्थिति भी ठीक रही। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के प्रभारी डॉ. पीके शर्मा ने बताया कि होम आइसोलेशन के मरीजों की मानसिक सेहत सामान्य मिली। उनकी काउंसिलिंग की जरूरत नहीं पड़ी।
एल-टू मरीजों का निजी अस्पताल में ढाई लाख से ज्यादा खर्च
निजी अस्पतालों में संक्रमित मरीजों के इलाज का खर्च काफी महंगा है। एल-टू मरीजों का निजी अस्पतालों में ढाई लाख रुपये से भी अधिक खर्च हो रहे हैं। एल-तीन के मरीजों का तो बिल पांच से सात लाख रुपये तक है। एसएन मेडिकल कॉलेज में समेत सरकारी अस्पताल में मरीजों का इलाज निशुल्क हो रहा है। होम आइसोलेशन वाले मरीजों में पौष्टिक आहार और आयुर्वेद दवाओं का खर्च मिलाकर तीन से पांच हजार रुपये खर्च हो रहे हैं।
41 एसएन और 46 मरीज निजी अस्पताल में भर्ती
अभी कुल 87 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, इसमें से 41 मरीज एसएन कॉलेज और 46 मरीज निजी अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। एसएन में 41 में से 20 आईसीयू में भर्ती हैं।