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ये है पाकिस्तान के छक्के छुड़ाने वाले ‘हीरो ऑफ नौशेरा’ की वीरगाथा
ब्यूरो/अमर उजाला आगरा
Updated Mon, 03 Jul 2017 11:05 PM IST
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श्रद्धांजलि
- फोटो : अमर उजाला
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महावीर चक्र विजेता बिग्रेडियर मोहम्मद उसमान की 69 वीं पुण्यतिथि पर पैराब्रिगेड के जवानों और भूतपूर्व सैनिकों ने आगरा कैंट के युद्ध स्मारक पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। पूर्व सैनिकों ने जवानों को ‘हीरो आफ नौशेरा’ की वीरगाथा सुनाई।
बिग्रेडियर मोहम्मद उसमान का जन्म 15 जुलाई 1912 को आजमगढ़ जिले के बीबपुर में हुआ था। उसमान को सैंडहर्ट में प्रतिष्ठित रायल सैन्य एकेडमी में प्रवेश पाने का मौका मिला। प्रशिक्षण के उपरांत उन्हें बलूच रेजीमेंट में नियुक्ति मिली।
पाकिस्तान की सेना में शामिल होने के विकल्प के बावजूद वे अपनी मातृभूमि के आदर्शों के लिए प्रतिबद्ध रहे और अपनी जन्मभूमि तथा देश की सेवा करने में दृढ़ संकल्प पर अटल रहे। बिग्रेडियर मोहम्मद उसमान 77 पैराब्रिगेड की अगुवाई करते हुए दिसंबर 1947 में झांजर में तैनात थे। तभी उनको 50 पैरा में नियुक्ति मिली।
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उन्होंने 6-7 फरवरी 1948 की महत्वपूर्ण लड़ाई के दौरान नौशेरा क्षेत्र को सुरक्षित बनाए रखा। अधिक संख्या, भारी साजो सामान से लैस पाकिस्तानी सेना को हराया। यह युद्ध निर्णायक साबित हुआ। उन्हें महावीर चक्र के अलावा दो खिताब ‘हीरो आफ नौशेरा’ और ‘नौशेरा का रक्षक’ से सम्मानित किया गया।
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बिग्रेडियर मोहम्मद उसमान का जन्म 15 जुलाई 1912 को आजमगढ़ जिले के बीबपुर में हुआ था। उसमान को सैंडहर्ट में प्रतिष्ठित रायल सैन्य एकेडमी में प्रवेश पाने का मौका मिला। प्रशिक्षण के उपरांत उन्हें बलूच रेजीमेंट में नियुक्ति मिली।
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पाकिस्तान की सेना में शामिल होने के विकल्प के बावजूद वे अपनी मातृभूमि के आदर्शों के लिए प्रतिबद्ध रहे और अपनी जन्मभूमि तथा देश की सेवा करने में दृढ़ संकल्प पर अटल रहे। बिग्रेडियर मोहम्मद उसमान 77 पैराब्रिगेड की अगुवाई करते हुए दिसंबर 1947 में झांजर में तैनात थे। तभी उनको 50 पैरा में नियुक्ति मिली।
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उन्होंने 6-7 फरवरी 1948 की महत्वपूर्ण लड़ाई के दौरान नौशेरा क्षेत्र को सुरक्षित बनाए रखा। अधिक संख्या, भारी साजो सामान से लैस पाकिस्तानी सेना को हराया। यह युद्ध निर्णायक साबित हुआ। उन्हें महावीर चक्र के अलावा दो खिताब ‘हीरो आफ नौशेरा’ और ‘नौशेरा का रक्षक’ से सम्मानित किया गया।