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होली के धधकते अंगारों के बीच निकलेंगे मोनू पंडा, पूजा पर बैठकर शुरू हुआ गायन
Mon, 10 Feb 2020 11:03 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Mon, 10 Feb 2020 11:03 AM IST
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मोनू पंडा
- फोटो : अमर उजाला
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मथुरा के फालैन में होली के धधकते अंगारों के मध्य निकलने वाला मोनू पंडा पहली बार इस हैरतअंगेज कारनामे को दिखाएगा। रविवार को विधिवत रूप से पूजा-अर्चना के बाद गांव में मेले की तैयारियां जोरशोर से शुरू कर दी गई हैं। इस मौके पर जमकर होली गायन भी हुआ। ग्रामीणों ने जमकर नृत्य किया।
गांव के मध्य में स्थित प्रहलाद जी मंदिर पर प्रात: मोनू पंडा ने सैकड़ों ग्रामीणों के साथ वहां पूजा-अर्चना कर गांव की परिक्रमा की। इस दौरान मोनू ने नियम संयम से भी रहना शुरू कर दिया। मोनू की यह पूजा लगातार एक महीने तक चलेगी।
मंदिर पर आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीणों ने ढोल नगाड़ों के साथ होली के रसिया, धमार गायन और पारंपरिक गीतों का गायन किया। जिस पर ग्रामीणों ने जमकर नृत्य किया। मोनू पंडा द्वारा घोषणा करने के साथ ही पंडित द्वारा पूजा कराई गई और परिक्रमा के लिए रवाना किया गया।
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गांव के मध्य में स्थित प्रहलाद जी मंदिर पर प्रात: मोनू पंडा ने सैकड़ों ग्रामीणों के साथ वहां पूजा-अर्चना कर गांव की परिक्रमा की। इस दौरान मोनू ने नियम संयम से भी रहना शुरू कर दिया। मोनू की यह पूजा लगातार एक महीने तक चलेगी।
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मंदिर पर आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीणों ने ढोल नगाड़ों के साथ होली के रसिया, धमार गायन और पारंपरिक गीतों का गायन किया। जिस पर ग्रामीणों ने जमकर नृत्य किया। मोनू पंडा द्वारा घोषणा करने के साथ ही पंडित द्वारा पूजा कराई गई और परिक्रमा के लिए रवाना किया गया।
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बड़ी संख्या में लोगों ने परिक्रमा में भाग लिया। जगह-जगह लोगों ने पंडा का स्वागत किया। पूरे गांव का भ्रमण करते हुए पंडा ग्रामीणों के साथ प्रहलादजी के मंदिर पर पहुंचा। जहां उसने एक माह के कठोर तपस्या का प्रण किया और घर बार त्याग कर मंदिर सेवा को ही ध्येय बनाया है।
प्रहलादजी की माला धारण करने वाले पंडा को एक माह तक कठोर नियमों का पालन करते हुए पूजा-अर्चना करनी होती है। जिसके तहत वह घर से संपर्क एवं वहां जा नहीं सकेगा। जबकि जमीन पर वह विश्राम कर सकेगा। पूरे माह उसे व्रत भी रखकर अग्निपरीक्षा के काबिल बनाना होता है।
प्रहलादजी की माला धारण करने वाले पंडा को एक माह तक कठोर नियमों का पालन करते हुए पूजा-अर्चना करनी होती है। जिसके तहत वह घर से संपर्क एवं वहां जा नहीं सकेगा। जबकि जमीन पर वह विश्राम कर सकेगा। पूरे माह उसे व्रत भी रखकर अग्निपरीक्षा के काबिल बनाना होता है।