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यूपी: एचआईवी पीड़ित प्रसूता का डॉक्टर ने नहीं किया प्रसव, जिला अस्पताल से निकाला बाहर
Fri, 18 Jan 2019 11:53 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 18 Jan 2019 11:53 AM IST
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महिला जिला अस्पताल, फिरोजाबाद
फिरोजाबाद के जिला महिला अस्पताल में शर्मनाक मामला सामने आया है। यहां प्रसव कराने आई एचआईवी पीड़ित महिला को अस्पताल से बाहर निकाल दिया गया। रिपोर्ट में एचआईटी पॉजिटिव देखकर चिकित्सकों ने महिला का प्रसव करने से इंकार कर दिया।
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प्राइवेट अस्पताल में परिजन पहुंचे तो वहां रिपोर्ट आने से पूर्व ही नार्मल डिलेवरी से स्वस्थ बच्चे को जन्म हो गया। निजी अस्पताल संचालक ने भी रिपोर्ट में एचआईवी देखकर फीस चार गुना अधिक बढ़ा दी। संस्था की पहल पर पीड़िता को न्याय मिल सका।
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एक महिला को प्रसव पीड़ा होने पर बुधवार रात साढ़े नौ बजे जिला महिला अस्पताल लाया गया। पहले तो महिला को भर्ती कर लिया बाद में जांच रिपोर्ट देखी तो रात 12.30 बजे महिला का प्रसव करने से इंकार कर दिया।
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अस्पताल स्टाफ से नोकझोंक
इस पर एनजीओ आहना परियोजना की फील्ड ऑफिसर सरिता की अस्पताल कर्मचारियों से नोकझोंक हो गई। जबकि जिला महिला अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में एचआईवी किट उपलब्ध है।
बाद में परिजन महिला को जलेसर रोड स्थित एक निजी नर्सिंग होम में लेकर पहुंचे। वहां पहुंचते ही स्टाफ ने महिला की जांच कराई। जांच रिपोर्ट आने से पूर्व महिला की नार्मल डिलीवरी हो गई।
जांच रिपोर्ट देखते ही अस्पताल संचालक ने फीस बढ़ाकर 30 हजार कर दी। तर्क दिया कि एचआईवी महिला की डिलीवरी होने के बाद पलंग, औजार सभी बदलने पड़ेंगे। बाद में एनजीओ के लोगों का हस्तक्षेप होने के बाद फीस 14 हजार रुपये ली।
'मेरे संज्ञान में यह मामला गुरुवार की शाम आया है। अगर ऐसा किया गया है तो बहुत गलत है। हमारे यहां किट भी उपलब्ध है। मैं कमेटी गठित करूंगी और स्वयं भी जांच करूंगी जो भी दोषी होगा, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।'
डॉ. साधना राठौर, सीएमएस जिला महिला अस्पताल
बाद में परिजन महिला को जलेसर रोड स्थित एक निजी नर्सिंग होम में लेकर पहुंचे। वहां पहुंचते ही स्टाफ ने महिला की जांच कराई। जांच रिपोर्ट आने से पूर्व महिला की नार्मल डिलीवरी हो गई।
जांच रिपोर्ट देखते ही अस्पताल संचालक ने फीस बढ़ाकर 30 हजार कर दी। तर्क दिया कि एचआईवी महिला की डिलीवरी होने के बाद पलंग, औजार सभी बदलने पड़ेंगे। बाद में एनजीओ के लोगों का हस्तक्षेप होने के बाद फीस 14 हजार रुपये ली।
'मेरे संज्ञान में यह मामला गुरुवार की शाम आया है। अगर ऐसा किया गया है तो बहुत गलत है। हमारे यहां किट भी उपलब्ध है। मैं कमेटी गठित करूंगी और स्वयं भी जांच करूंगी जो भी दोषी होगा, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।'
डॉ. साधना राठौर, सीएमएस जिला महिला अस्पताल