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इंसानियत की मिसाल- मुस्लिम युवक ने विसर्जित कीं हिंदू वृद्धा की अस्थियां, सौहार्द का संदेश
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कासगंज के सोरों की हरिपदी गंगा में हिंदू वृद्घा की अस्थियां विसर्जित करता भरतपुर का मुस्लिम युव?
- फोटो : KASGANJ
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सोरों(कासगंज)। पति की मौत के बाद बेघर हुई हिंदू महिला को उसकी सहेली ने पहले तो अपने घर में पनाह दी, और उसकी मौत के बाद नाती ने सोरों जाकर अस्थियां गंगा नदी में प्रवाहित कर गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल कायम की है। युवक के इस कारनामें की चारों ओर चर्चा हो रही है। लोगों का कहना है कि वह लॉकडाउन में भरतपुर से सोरों तक मुंहबोली दादी की अस्थियां प्रवाहित करने चला आया।
भरतपुर के कमलारोड निवासी त्रिवेणी देवी के पति गौरीशंकर की 45 साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी। गरीबी में वह अपने पांच साल के बेेटे को लेकर भटक रहीं थी। तब उनकी तंगहाली देख पड़ोस में रहने वाली उनकी मुस्लिम सहेली उम्मीदी बेगम ने उन्हें अपने घर में पनाह दी। महिला अपने बेटे के साथा मुस्लिम परिवार में रहने लगी।
बेटे की शादी के बाद भी वे लोग साथ ही रहते थे। लेकिन कुछ ही माह में उनका तलाक भी हो गया। करीब पांच साल पहले बेटे की भी मौत हो गई। 15 अप्रैल को 84 वर्षीय वृद्धा त्रिवेणी देवी ने दम तोड़ दिया। मुस्लिम महिला के नाती मोहसिन ने हिंदू विधि विधान से उनका अंतिम संस्कार किया।
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इसके बाद महिला की अस्थियां तीर्थनगरी सोरों के हरिपदी में विसर्जित करने का प्रयास किया। लेकिन राजस्थान में कर्फ्यू लगे होने के कारण वह ऐसा नहीं कर सका। काफी प्रयास के बाद बुधवार को राजस्थान प्रशासन से अनुमति लेकर मोहसिन अस्थि विसर्जन के लिए सोरों हरि की पदी पहुंचा। यहां तीर्थपुरोहित भोला बिहारी, सतीश भारद्वाज ने विधि विधान से अस्थियां गंगा में विसर्जित कराईं।
मुझे नाती मानती थीं, मैंने इच्छा पूरी की
अस्थि विसर्जन के लिए आए मोहसिन ने बताया कि त्रिवेणी देवी को मैं दादी कहता था और वह भी मुझे नाती जैसा प्यार देती थीं। वह मेरी दादी की सहेली थीं। वह कई बार मुझसे कह चुकी थीं कि बेटा मेरी मौत के बाद मुझे गंगा जी जरूर ले जाना और मेरी अस्थियों सोरों में विसर्जित करना। मैंने दादी की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए अपने आस पड़ोसी हिंदू भाईयों के जरिए सोरों के पुरोहितों से संपर्क किया। गोत्र के आधार पर पुरोहित मिल गए। अस्थियां विसर्जित कर दी हैं।
गंगाजल लेकर गया युवक
पुरोहितों ने वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ अस्थियों का विसर्जन कराया। उसके बाद मुस्लिम युवक को हरि की पदी से गंगा जल दिया और बताया कि यह गंगाजल भरतपुर पहुंचकर वहां मंदिर में चढ़ाना। तब ही मृतका की आत्मा को पूर्ण शांति मिलेगी।
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भरतपुर के कमलारोड निवासी त्रिवेणी देवी के पति गौरीशंकर की 45 साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी। गरीबी में वह अपने पांच साल के बेेटे को लेकर भटक रहीं थी। तब उनकी तंगहाली देख पड़ोस में रहने वाली उनकी मुस्लिम सहेली उम्मीदी बेगम ने उन्हें अपने घर में पनाह दी। महिला अपने बेटे के साथा मुस्लिम परिवार में रहने लगी।
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बेटे की शादी के बाद भी वे लोग साथ ही रहते थे। लेकिन कुछ ही माह में उनका तलाक भी हो गया। करीब पांच साल पहले बेटे की भी मौत हो गई। 15 अप्रैल को 84 वर्षीय वृद्धा त्रिवेणी देवी ने दम तोड़ दिया। मुस्लिम महिला के नाती मोहसिन ने हिंदू विधि विधान से उनका अंतिम संस्कार किया।
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इसके बाद महिला की अस्थियां तीर्थनगरी सोरों के हरिपदी में विसर्जित करने का प्रयास किया। लेकिन राजस्थान में कर्फ्यू लगे होने के कारण वह ऐसा नहीं कर सका। काफी प्रयास के बाद बुधवार को राजस्थान प्रशासन से अनुमति लेकर मोहसिन अस्थि विसर्जन के लिए सोरों हरि की पदी पहुंचा। यहां तीर्थपुरोहित भोला बिहारी, सतीश भारद्वाज ने विधि विधान से अस्थियां गंगा में विसर्जित कराईं।
मुझे नाती मानती थीं, मैंने इच्छा पूरी की
अस्थि विसर्जन के लिए आए मोहसिन ने बताया कि त्रिवेणी देवी को मैं दादी कहता था और वह भी मुझे नाती जैसा प्यार देती थीं। वह मेरी दादी की सहेली थीं। वह कई बार मुझसे कह चुकी थीं कि बेटा मेरी मौत के बाद मुझे गंगा जी जरूर ले जाना और मेरी अस्थियों सोरों में विसर्जित करना। मैंने दादी की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए अपने आस पड़ोसी हिंदू भाईयों के जरिए सोरों के पुरोहितों से संपर्क किया। गोत्र के आधार पर पुरोहित मिल गए। अस्थियां विसर्जित कर दी हैं।
गंगाजल लेकर गया युवक
पुरोहितों ने वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ अस्थियों का विसर्जन कराया। उसके बाद मुस्लिम युवक को हरि की पदी से गंगा जल दिया और बताया कि यह गंगाजल भरतपुर पहुंचकर वहां मंदिर में चढ़ाना। तब ही मृतका की आत्मा को पूर्ण शांति मिलेगी।