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हिंदी दिवस : हमारी एकता की पहचान है हिंदी, समझ लो हमारी जान है हिंदी ...
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कासगंज के पटियाली में वर्चुअल कवि गोष्ठी में शामिल कविगण।
- फोटो : KASGANJ
पटियाली। तुलसी-खुसरो साहित्य संगम मंच के तत्वावधान में हिंदी दिवस पर वर्चुअल काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। काव्य गोष्ठी का शुभारंभ अहमदाबाद की कवियत्री रजिया अकबर अली मिर्जा ने वंदना के साथ किया। उन्होंने पढ़ा कि हमारी एकता की तो बड़ी पहचान है हिंदी, समझ लो हमारी जान है हिंदी।
इसी के साथ काव्य पाठ का दौर शुरु हुआ। कवि शायर शरद मिश्र ने कविता पढ़ी कि शोहरत हिंदी की कुछ इस कदर फैली शरद, एक कलंदर क्या वतन के हर सिकंदर तक गई। दीप्ति दीप ने पढ़ा कि हिंदी मिली कोख से मां की, हिंदी हमको भाती है। कोटा के कवि व शायर कमर आब्दी ने नज्म पढ़ी कि सब जुबानों की मान है हिंदी, सारे आलम की जान है हिंदी। कवि बलराम सरस ने हिंदी की शान गीत प्रस्तुत किया कि करें हम हिंदी का सत्कार, जगत में हो इसका विस्तार। मशहूर शायर मंजर गोरखपुरी ने पढ़ा है कि बचपन के सुनहरे दिन हमेशा याद आते हैं, वो लम्हें बीत कर निशानी छोड़ जाते हैं। अंत मे सोनिया अक्स ने मातृ भाषा का अंदाज-ए-बयां कुछ इस तरह किया कि मेरी भाषा अभिलाषा तुलसी की मानव परिभाषा, रसखान की कान्हा भक्ति मेरी हिंदी भाषा।
मुख्य अतिथि डॉ. सतीन देसाई ने कहा कि हम हिंदी के विश्व पटल के माध्यम से एक दूसरे के निकट आए हैं। साहित्यकारों की प्रस्तुति सार्थक पहल हैं। कौशिक शाह ने सभी आगंतुकों का आभार प्रकट किया। अध्यक्षता कविक कौशिक शाह ने की। संचालन कवियत्री सोनिया अक्स ने किया।
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निर्झर साहित्य संस्था ने आयोजित की काव्य संध्या
कासगंज। हिंदी दिवस पर मंगलवार की देर शाम निर्झर साहित्यिक संस्था के द्वारा काव्य संध्या काव्यानंद साहित्यिक पटल कार्यालय पर आयोजित की गई। कार्यक्रम के शुभारंभ अतिथियों ने मां सरस्वती का पूजन कर व दीप प्रज्ज्वलित कर किया। डॉ. अखिलेश चंद्र गौड ने सरस्वती वंदना भारती वागेश्वरी श्वेताम्बरा मां शारदे के साथ कविता पाठ का शुभारंभ किया।
कवि मनोज शर्मा शलभ ने पढा़ कि मात्र भाषा नहीं, भारत की आशा है हिंदी। दिनेश उपाध्याय जीवन ने पढा़ा कि तन से वंदन मन से वंदन, हिंदी भाषा का है अभिनंदन। संस्थाध्यक्ष डॉ. राम प्रकाश पथिक ने कविता पढ़ी हों पुष्ट विधाएं हिंदी की, रखना गरिमाएं हिंदी की। कार्यक्रम के संचालक अखिलेश सक्सेना ने प्रस्तुति ने दी कि हिंदी है अपनों की भाषा, हिंदी अपना गान है, चहुंदिश हिंदी गूंजती रहती, ऐसा हिंदुस्तान है। काव्यानंद पटल के संस्थापक तथा कार्यक्रम संयोजक डीपी शर्मा भ्रमर ने पढा़ भाषाओं में नेक है, हिंदी का उपहार।
कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. अखिलेशचंद्र गौड ने पढ़ा कि महलों से झोपड़ पट्टी तक, भारत मां का स्वर है हिंदी। मुख्य अतिथि डॉ. सुभाष चंद्र दीक्षित ने कविता पढ़ी हिंदी परम समृद्ध, मधुर ललित भाषा है। डॉ. वीके सिंह, नीरज कुमार ने भी अपनी प्रस्तुतियां दी। इस दौरान डॉ. अजय कुलश्रेष्ठ, आदर्श सक्सेना एडवोकेट, चिराग शर्मा, आलोक सक्सेना, अमित शर्मा, अतुल सक्सेना, कृष्णा शर्मा, लव उपाध्याय, प्रियंका, आयुशी, कुश, किशोर शर्मा आदि मौजूद रहे।
राष्ट्रीय कवि संगम ने आयोजित की काव्य गोष्ठी, देर रात तक वही काव्य सरिता
सोरों। हिंदी दिवस पर राष्ट्रीय कवि संगम ब्रज प्रांत के द्वारा काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। अध्यक्षता रामप्रकाश महेरे ने की। कवि डा. लालाराम पल्लव ने काव्य पाठ किया आदमी मरते सदा जिंदादिली मरती नहीं है। हिंदी प्रोफेसर डा. राधाकृष्ण दीक्षित ने कविता पढ़ी कौन देश की मर्यादा को छूकर आज कसम खाता है।
कवि संगम संयोजक कवि मनोज मधुवन ने पढ़ा कि समता और सद्भाव की भाषा है हिंदी। बीजेपी महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष डा. सांत्वना पाराशर ने काव्य पाठ किया जब हुई रोशनी से नफरत अंधेरा ही दामन चुराने लगा। नीरज सक्सेना ने कविता पढ़ी हिंद की भाषा है हिंदी, सबसे प्यारी विश्व व्यापी भाषा है हिंदी। उमेश पाठक, राधामोहन महेरे, अमरदीप वार्ष्णेय, आदित्य कांकोरिया ने भी कविता पाठ किया। संचालन विवेक महेरे ने किया। कार्यक्रम में डा. एनपी सिंह हल्दिया, महेशचंद्र त्रिवेदी, यशोधर रावत, पंकज पाराशरी, दिलीप शास्त्री, नरेश वरवारिया, अरविंद तिवारी, संजय दुवे आदि मौजूद रहे।
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इसी के साथ काव्य पाठ का दौर शुरु हुआ। कवि शायर शरद मिश्र ने कविता पढ़ी कि शोहरत हिंदी की कुछ इस कदर फैली शरद, एक कलंदर क्या वतन के हर सिकंदर तक गई। दीप्ति दीप ने पढ़ा कि हिंदी मिली कोख से मां की, हिंदी हमको भाती है। कोटा के कवि व शायर कमर आब्दी ने नज्म पढ़ी कि सब जुबानों की मान है हिंदी, सारे आलम की जान है हिंदी। कवि बलराम सरस ने हिंदी की शान गीत प्रस्तुत किया कि करें हम हिंदी का सत्कार, जगत में हो इसका विस्तार। मशहूर शायर मंजर गोरखपुरी ने पढ़ा है कि बचपन के सुनहरे दिन हमेशा याद आते हैं, वो लम्हें बीत कर निशानी छोड़ जाते हैं। अंत मे सोनिया अक्स ने मातृ भाषा का अंदाज-ए-बयां कुछ इस तरह किया कि मेरी भाषा अभिलाषा तुलसी की मानव परिभाषा, रसखान की कान्हा भक्ति मेरी हिंदी भाषा।
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मुख्य अतिथि डॉ. सतीन देसाई ने कहा कि हम हिंदी के विश्व पटल के माध्यम से एक दूसरे के निकट आए हैं। साहित्यकारों की प्रस्तुति सार्थक पहल हैं। कौशिक शाह ने सभी आगंतुकों का आभार प्रकट किया। अध्यक्षता कविक कौशिक शाह ने की। संचालन कवियत्री सोनिया अक्स ने किया।
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निर्झर साहित्य संस्था ने आयोजित की काव्य संध्या
कासगंज। हिंदी दिवस पर मंगलवार की देर शाम निर्झर साहित्यिक संस्था के द्वारा काव्य संध्या काव्यानंद साहित्यिक पटल कार्यालय पर आयोजित की गई। कार्यक्रम के शुभारंभ अतिथियों ने मां सरस्वती का पूजन कर व दीप प्रज्ज्वलित कर किया। डॉ. अखिलेश चंद्र गौड ने सरस्वती वंदना भारती वागेश्वरी श्वेताम्बरा मां शारदे के साथ कविता पाठ का शुभारंभ किया।
कवि मनोज शर्मा शलभ ने पढा़ कि मात्र भाषा नहीं, भारत की आशा है हिंदी। दिनेश उपाध्याय जीवन ने पढा़ा कि तन से वंदन मन से वंदन, हिंदी भाषा का है अभिनंदन। संस्थाध्यक्ष डॉ. राम प्रकाश पथिक ने कविता पढ़ी हों पुष्ट विधाएं हिंदी की, रखना गरिमाएं हिंदी की। कार्यक्रम के संचालक अखिलेश सक्सेना ने प्रस्तुति ने दी कि हिंदी है अपनों की भाषा, हिंदी अपना गान है, चहुंदिश हिंदी गूंजती रहती, ऐसा हिंदुस्तान है। काव्यानंद पटल के संस्थापक तथा कार्यक्रम संयोजक डीपी शर्मा भ्रमर ने पढा़ भाषाओं में नेक है, हिंदी का उपहार।
कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. अखिलेशचंद्र गौड ने पढ़ा कि महलों से झोपड़ पट्टी तक, भारत मां का स्वर है हिंदी। मुख्य अतिथि डॉ. सुभाष चंद्र दीक्षित ने कविता पढ़ी हिंदी परम समृद्ध, मधुर ललित भाषा है। डॉ. वीके सिंह, नीरज कुमार ने भी अपनी प्रस्तुतियां दी। इस दौरान डॉ. अजय कुलश्रेष्ठ, आदर्श सक्सेना एडवोकेट, चिराग शर्मा, आलोक सक्सेना, अमित शर्मा, अतुल सक्सेना, कृष्णा शर्मा, लव उपाध्याय, प्रियंका, आयुशी, कुश, किशोर शर्मा आदि मौजूद रहे।
राष्ट्रीय कवि संगम ने आयोजित की काव्य गोष्ठी, देर रात तक वही काव्य सरिता
सोरों। हिंदी दिवस पर राष्ट्रीय कवि संगम ब्रज प्रांत के द्वारा काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। अध्यक्षता रामप्रकाश महेरे ने की। कवि डा. लालाराम पल्लव ने काव्य पाठ किया आदमी मरते सदा जिंदादिली मरती नहीं है। हिंदी प्रोफेसर डा. राधाकृष्ण दीक्षित ने कविता पढ़ी कौन देश की मर्यादा को छूकर आज कसम खाता है।
कवि संगम संयोजक कवि मनोज मधुवन ने पढ़ा कि समता और सद्भाव की भाषा है हिंदी। बीजेपी महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष डा. सांत्वना पाराशर ने काव्य पाठ किया जब हुई रोशनी से नफरत अंधेरा ही दामन चुराने लगा। नीरज सक्सेना ने कविता पढ़ी हिंद की भाषा है हिंदी, सबसे प्यारी विश्व व्यापी भाषा है हिंदी। उमेश पाठक, राधामोहन महेरे, अमरदीप वार्ष्णेय, आदित्य कांकोरिया ने भी कविता पाठ किया। संचालन विवेक महेरे ने किया। कार्यक्रम में डा. एनपी सिंह हल्दिया, महेशचंद्र त्रिवेदी, यशोधर रावत, पंकज पाराशरी, दिलीप शास्त्री, नरेश वरवारिया, अरविंद तिवारी, संजय दुवे आदि मौजूद रहे।

कासगंज के सोरों में काव्य गोष्ठी में काव्य पाठ करते कार्यक्रम संयोजक कवि मनोज मधुवन।- फोटो : KASGANJ