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हिंदी हैं हम: बाबू गुलाब राय ने दुनियाभर में पहुंचाया हिंदी का संदेश, इटावा में जन्मे, आगरा को बनाया कर्मभूमि

Wed, 11 Aug 2021 11:06 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Wed, 11 Aug 2021 11:06 AM IST
सार

अधिकांश लोग उनको बाबूजी कहते थे। प्रारंभिक शिक्षा मैनपुरी में प्राप्त करने के बाद बाबूजी उच्च शिक्षा ग्रहण करने आगरा आए। वर्ष 1913 में सेंट जोंस कॉलेज से दर्शनशास्त्र से एमए किया।

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Hindi hain hum: Babu Gulab Rai Send Message Delivered Across The World
गुलाब राय का घर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिंदी साहित्य के क्षितिज का ध्रुव तारा हैं बाबू गुलाब राय। इटावा में जन्मे और आगरा को अपनी कर्मस्थली बनाया। आधुनिक हिंदी के तमाम लेखकों के लिए वह आज भी प्रेरणास्रोत हैं। उनका जन्म 17 जनवरी, 1888 को हुआ था। वह अपना जन्मदिन बसंत पंचमी से एक दिन पूर्व मनाते थे। हिंदी लेखन और लेखों में मानवतावादी विचारधारा उनका परमप्रिय विषय था। सत्य की असत्य पर जीत, उनके कई लेखों में परिलक्षित होती है। साहित्य संदेश पत्रिका के माध्यम से उन्होंने दुनियाभर में हिंदी को पहुंचाया।

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अधिकांश लोग उनको बाबूजी कहते थे। प्रारंभिक शिक्षा मैनपुरी में प्राप्त करने के बाद बाबूजी उच्च शिक्षा ग्रहण करने आगरा आए। वर्ष 1913 में सेंट जोंस कॉलेज से दर्शनशास्त्र से एमए किया। इसी वर्ष उन्होंने अपनी पहली कृति ‘शांतिधर्म’ साहित्य जगत को दी। वर्ष 1917 में आगरा कॉलेज से एलएलबी की डिग्री प्राप्त की। दो दशक तक छतरपुर राज्य के महाराजा विश्वनाथ सिंह के दार्शनिक सलाहकार, दीवान, निजी सचिव और प्रधान न्यायाधीश की जिम्मेदारी निभाई।
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इसके बाद आगरा आए और ताजनगरी को अपनी कर्मभूमि बनाया। जैन बोर्डिंग स्कूल के वार्डन बने और साल 1934 में सेंट जोंस कॉलेज के हिंदी के प्राध्यापक बन गए। वर्ष 1935 से उन्होंने साहित्य संदेश नामक पत्रिका का संपादन शुरू किया। इस पत्रिका ने हिंदी की पताका को देश ही नहीं विदेशों तक फहराया।
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नवरस, तर्कशास्त्र, ठलुआ क्लब, मेरी असफलताएं, विज्ञान वार्ता, बाल प्रबोध, मन की बातें, विद्यार्थी जीवन जैसी उनकी अनेकों कृतियां, स्तंभ आज भी लोगों के जहन में हैं। आगरा विवि ने उन्हें डीलिट की उपाधि से भी सम्मानित किया। 13 अप्रैल, 1963 को दिल्ली गेट पर स्थित निवास पर उनका निधन हुआ।

Hindi hain hum: Babu Gulab Rai Send Message Delivered Across The World
गुलाब राय की प्रतिमा और उनके प्रपोत्र संजय राय - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली गेट पर स्थापित है प्रतिमा
दिल्ली गेट चौराहे पर बाबू गुलाब राय की प्रतिमा स्थापित है। नगर निगम की ओर से स्थापित प्रतिमा से पूर्व भी इस सड़क को बाबू गुलाब राय मार्ग के नाम से जाना जाता था। दिल्ली गेट में उनका निवास भी रहा। आज भी वहां उनके परिवारीजन रहते हैं।
तमाम यादें संजो कर रखी हैं (फोटो)
बाबूजी की तमाम यादें हमने संजो कर रखी हैं। वह एक आदर्श पुरुष थे। सार्वजनिक जीवन जीने में विश्वास रखते थे। गरीबों और शोषितों की सहायता को सदैव तत्पर रहते थे। उनके लेखों से मानवतावादी विचारधारा पल्लवित होती है। उन्होंने सदैव सत्य का साथ दिया। बाबूजी साइकिल भी बहुत तेज चलाते थे। मीलों लंबा सफर एक ही दिन में तय कर लेते। उनकी लेखन क्षमता भी अलग थी। परिवार के बुजुर्ग बताते हैं कि एक बार जिस निबंध को लिखने बैठते थे, पूरा करके ही उठते थे। -संजय राय, प्रपौत्र
बहुआयामी निबंधकार थे बाबूजी 
हिंदी के सच्चे सेवक बाबू गुलाब राय उत्कृष्ट श्रेणी के निबंधकार थे। उनका निबंध लेखन बहुआयामी था। प्रबंध प्रभाकर, निबंध रत्नाकर, निबंध माला, जीवन रश्मियां, मेरे निबंध, कुछ उथले-कुछ गहरे शीर्षकों के साथ उनके तमाम निबंध संग्रह प्रकाशित हुए। वह शांत स्वभाव के थे। मृदु और अल्पभाषी थे। सभी से आदरभाव के साथ बात करते थे। पहले दूसरे की बात सुनते थे फिर जरूरी होने पर ही अपना मत देते थे।

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