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#हिंदीहैंहमः हिंदी की महत्ता समझ रहे लोग, भाषा से ही संभव है समाज और देश की उन्नति
Fri, 04 Sep 2020 12:30 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज-एटा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज-एटा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 04 Sep 2020 12:30 AM IST
सार
हिंदी भाषा समाज और देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण है। भारतेंदु हरिशचंद्र ने कहा था कि निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल, बिन निज भाषा ज्ञान के मिटत न हिय को सूल।
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hindi hai hum
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
निज भाषा की उन्नति से ही समाज की उन्नति हो सकती है। अब यह सभी के समझ में आ रहा है। इसके चलते अब हिंदी भाषा के प्रति लोगों का रुझान बढ़ रहा है। हिंदी की महत्ता को लोग समझ रहे हैं। लोगों ने अमर उजाला से व्हाट्सएप पर उनके विचारों को साझा किया।
बढ़ रहा है हिंदी भाषा का चलन
हिंदी की लोकप्रियता अब विदेशों में भी बढ़ रही है। देश ही नहीं दुनिया की भाषा हिंदी बन रही है। यह जन-जन की भाषा है। यह मातृ भाषा है। हिंदी भाषा का महत्व समझना जरूरी है। हिंदी भाषा समाज और देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
भारतेंदु हरिशचंद्र ने कहा था कि निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल, बिन निज भाषा ज्ञान के मिटत न हिय को सूल। बिना मातृभाषा के हम कभी भी वह तरक्की नहीं पा सकते। - रिहान खान, समाजसेवी भरगैन (कासगंज)
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बढ़ रहा है हिंदी भाषा का चलन
हिंदी की लोकप्रियता अब विदेशों में भी बढ़ रही है। देश ही नहीं दुनिया की भाषा हिंदी बन रही है। यह जन-जन की भाषा है। यह मातृ भाषा है। हिंदी भाषा का महत्व समझना जरूरी है। हिंदी भाषा समाज और देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
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भारतेंदु हरिशचंद्र ने कहा था कि निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल, बिन निज भाषा ज्ञान के मिटत न हिय को सूल। बिना मातृभाषा के हम कभी भी वह तरक्की नहीं पा सकते। - रिहान खान, समाजसेवी भरगैन (कासगंज)
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#हिंदीहैंहमः संवाद में वक्ताओं ने हिंदी को लेकर रखे अपने विचार
- फोटो : अमर उजाला
हिंदी हमारी मातृभाषा
हिंदी हमारी मातृभाषा है, लेकिन अभी तक इसे मातृभाषा का दर्जा प्राप्त नहीं हुआ। हिंदी की बढ़ती लोकप्रियता के मध्येनजर केंद्र सरकार को अब इसे मातृभाषा का दर्जा दिया जाना चाहिए। केंद्र सरकार को चाहिए कि अधिकांश कार्य हिंदी भाषा में किए जाने के निर्देश दे। आगे आने वाला भविष्य हिंदी का ही है। हिंदी पूरी तरह से सुदृढ़ भाषा है। हिंदी ऐसी भाषा है जिसे पूरे देश में समझा जाता है। हर कोई हिंदी को जानता है। हिंदी हमारे देश की उन्नति के लिए आवश्यक है। - अमित सक्सेना, कार्यालय सहायक, राजभाषा रेलवे (कासगंज)
वैश्विक स्तर पर बढ़ा हिंदी का प्रयोग
हिंदी बहुआयामी भाषा है। अभिव्यक्ति, साहित्य तक सीमित हिंदी अब कारोबार एवं कारपोरेट जगत की भाषा बन चुकी है। अंग्रेजी भाषा के लंबे वर्चस्व के बाद भी हिंदी तेजी से विश्व में वर्चस्व बना रही है। उदारीकरण शुरू होने पर आलोचनाएं तो हुई, लेकिन वैश्विक स्तर पर हिंदी का प्रयोग बढ़ा है। अंग्रेजी की तुलना में हिंदी के विज्ञापन को देखने वालों की संख्या पांच गुना होती है। यह हिंदी की शक्ति है। -डॉ. सुरेश चंद्र मिश्र, सेवानिवृत्त प्रवक्ता हिंदी (एटा)
दुनिया की शक्तिशाली भाषा बन रही हिंदी
मानसिक दासता का शिकार रही हिंदी आज दुनिया की शक्तिशाली भाषा बन रही है। आसान, प्रभावी एवं आकर्षक अभिव्यक्ति के चलते अन्य देशों में भी इसके प्रशंसक बढ़े हैं। चीनी भाषा के बाद दुनिया में सर्वाधिक बोली जाने वाली हिंदी है। मॉरीसस, मयाना, नेपाल, संयुक्त अरब-अमीरात की तीसरी एवं न्यूजीलैंड में हिंदी चौथी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है। अबू धाबी में हिंदी न्यायालय की भाषा है। -डॉ डीके सिंह, प्रधानाचार्य (एटा)
हिंदी हमारी मातृभाषा है, लेकिन अभी तक इसे मातृभाषा का दर्जा प्राप्त नहीं हुआ। हिंदी की बढ़ती लोकप्रियता के मध्येनजर केंद्र सरकार को अब इसे मातृभाषा का दर्जा दिया जाना चाहिए। केंद्र सरकार को चाहिए कि अधिकांश कार्य हिंदी भाषा में किए जाने के निर्देश दे। आगे आने वाला भविष्य हिंदी का ही है। हिंदी पूरी तरह से सुदृढ़ भाषा है। हिंदी ऐसी भाषा है जिसे पूरे देश में समझा जाता है। हर कोई हिंदी को जानता है। हिंदी हमारे देश की उन्नति के लिए आवश्यक है। - अमित सक्सेना, कार्यालय सहायक, राजभाषा रेलवे (कासगंज)
वैश्विक स्तर पर बढ़ा हिंदी का प्रयोग
हिंदी बहुआयामी भाषा है। अभिव्यक्ति, साहित्य तक सीमित हिंदी अब कारोबार एवं कारपोरेट जगत की भाषा बन चुकी है। अंग्रेजी भाषा के लंबे वर्चस्व के बाद भी हिंदी तेजी से विश्व में वर्चस्व बना रही है। उदारीकरण शुरू होने पर आलोचनाएं तो हुई, लेकिन वैश्विक स्तर पर हिंदी का प्रयोग बढ़ा है। अंग्रेजी की तुलना में हिंदी के विज्ञापन को देखने वालों की संख्या पांच गुना होती है। यह हिंदी की शक्ति है। -डॉ. सुरेश चंद्र मिश्र, सेवानिवृत्त प्रवक्ता हिंदी (एटा)
दुनिया की शक्तिशाली भाषा बन रही हिंदी
मानसिक दासता का शिकार रही हिंदी आज दुनिया की शक्तिशाली भाषा बन रही है। आसान, प्रभावी एवं आकर्षक अभिव्यक्ति के चलते अन्य देशों में भी इसके प्रशंसक बढ़े हैं। चीनी भाषा के बाद दुनिया में सर्वाधिक बोली जाने वाली हिंदी है। मॉरीसस, मयाना, नेपाल, संयुक्त अरब-अमीरात की तीसरी एवं न्यूजीलैंड में हिंदी चौथी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है। अबू धाबी में हिंदी न्यायालय की भाषा है। -डॉ डीके सिंह, प्रधानाचार्य (एटा)