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जीएसटी: एक दिन पहले इलेक्ट्रानिक्स बाजार में रही बूम
ब्यूरो/अमर उजाला आगरा
Updated Sat, 01 Jul 2017 11:26 AM IST
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जीएसटी
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा में जीएसटी लागू होने से एक दिन पहले आटो मोबाइल्स, इलेक्ट्रानिक्स दुकानदार पुराना स्टॉक खत्म करने की जद्दोजहद में लगे रहे। कई स्थानों पर उत्पादों पर छूट भी दी जा रही थी। शाह मार्केट के मोबाइल बाजार में भी आफरों की भरमार थी। पुराना स्टॉक खत्म करने के लिए दुकानदार उतावले थे तो ग्राहकों ने भी इस मौके को जमकर भुनाया। एलईडी, लैपटाप, टीवी, एसी, वाशिंग मशीन जैसे इलेक्ट्रानिक उत्पादों की खरीदारी का सिलसिला देर शाम तक चलता रहा।
एक जुलाई से लागू होने वाले वस्तु एवं सेवाकर से पहले थोक दुकानदारों की कोशिश अपने पुराने स्टॉक को खत्म करने की रही। इसका असर इलेक्ट्रानिक के उत्पाद पर सबसे ज्यादा दिखाई दिया। इन उत्पादों को जीएसटी में 28 फीसदी टैक्स के दायरे में रखा गया है।
यही कारण रहा कि संजय प्लेस, भगवान टाकीज, कमला नगर, किनारी बाजार, सदर बाजार, शाहगंज, बोदला, कारगिल मार्केट सभी जगह दुकानदार इन उत्पादों की बिक्री पर छूट दे रहे थे। लोगों को भी छूट का इंतजार था। यही कारण था कि शुक्रवार को छुट्टी का दिन नहीं होने पर भी बाजारों में रोजाना की अपेक्षा ज्यादा भीड़ उमड़ी।
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शाह मार्केट में मोबाइल खरीदने वालों की भीड़ लगी रही। आईपैड, लैपटाप आदि की भी बिक्री की गई। शाह मार्केट के दुकानदार लोकेंद्र ने बताया कि बाजार में आफरों की धूम रही। दूरदराज से भी छोटे दुकानदार मोबाइल खरीदने के लिए आए।
आटो मोबाइल डीलरों ने भी जीएसटी की पूर्व संध्या पर वाहनों की बिक्री की। नगद छूट से लेकर एक्सचेंज आफर, मुफ्त बीमा, बढ़ी हुई वारंटी जैसे आफर दिए। बिग बाजार में जीएसटी शुभारंभ सेल के नाम पर शुक्रवार की मध्य रात्रि से दो से 22 फीसदी तक की छूट दी गई।
ज्यादातर इलेक्ट्रानिक्स के दुकानदारों का कहना था कि उनका मकसद जीएसटी की जटिल प्रणाली से बचने के लिए पुराने स्टाक को खत्म करके नये सिरे से शुरुआत करना है। ताकि एक जुलाई से जीएसटी के मुताबिक खरीद और बिक्री की जा सके।
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एक जुलाई से लागू होने वाले वस्तु एवं सेवाकर से पहले थोक दुकानदारों की कोशिश अपने पुराने स्टॉक को खत्म करने की रही। इसका असर इलेक्ट्रानिक के उत्पाद पर सबसे ज्यादा दिखाई दिया। इन उत्पादों को जीएसटी में 28 फीसदी टैक्स के दायरे में रखा गया है।
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यही कारण रहा कि संजय प्लेस, भगवान टाकीज, कमला नगर, किनारी बाजार, सदर बाजार, शाहगंज, बोदला, कारगिल मार्केट सभी जगह दुकानदार इन उत्पादों की बिक्री पर छूट दे रहे थे। लोगों को भी छूट का इंतजार था। यही कारण था कि शुक्रवार को छुट्टी का दिन नहीं होने पर भी बाजारों में रोजाना की अपेक्षा ज्यादा भीड़ उमड़ी।
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शाह मार्केट में मोबाइल खरीदने वालों की भीड़ लगी रही। आईपैड, लैपटाप आदि की भी बिक्री की गई। शाह मार्केट के दुकानदार लोकेंद्र ने बताया कि बाजार में आफरों की धूम रही। दूरदराज से भी छोटे दुकानदार मोबाइल खरीदने के लिए आए।
आटो मोबाइल डीलरों ने भी जीएसटी की पूर्व संध्या पर वाहनों की बिक्री की। नगद छूट से लेकर एक्सचेंज आफर, मुफ्त बीमा, बढ़ी हुई वारंटी जैसे आफर दिए। बिग बाजार में जीएसटी शुभारंभ सेल के नाम पर शुक्रवार की मध्य रात्रि से दो से 22 फीसदी तक की छूट दी गई।
ज्यादातर इलेक्ट्रानिक्स के दुकानदारों का कहना था कि उनका मकसद जीएसटी की जटिल प्रणाली से बचने के लिए पुराने स्टाक को खत्म करके नये सिरे से शुरुआत करना है। ताकि एक जुलाई से जीएसटी के मुताबिक खरीद और बिक्री की जा सके।
सराफा बाजार में छाई रौनक
जीएसटी
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किनारी बाजार, फव्वारा, चौबेजी का फाटक आदि में चांदी सोने के बाजारों में जीएसटी लागू होने का असर नहीं दिखाई दिया। हालांकि रिटेल बाजार में लोगों ने स्वर्णाभूषणों की खूब खरीदारी की। देर शाम तक ज्वैलरी शोरूम पर भीड़ रही। ब्रांडेड ज्वैलरी खरीदने को भी लोग उमड़ते रहे। आगरा सराफा मैन्यूफैक्चर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पवन दौनेरिया का कहना है कि जीएसटी लागू होने पर टैक्स की दर एक से तीन फीसदी हो गई है। इससे भार तो पड़ेगा मगर हम सरकार का समर्थन कर रहे हैं। इस कर प्रणाली के लागू होने की अभी व्यापारियों को बहुत अधिक जानकारी नहीं है। किसी तरह की जानकारी के अभाव में अगर कोई तकनीकी दिक्कत आती है तो अधिकारी उत्पीड़न नहीं करें।
कपड़ा व्यापारियों ने काली पट्टी बांध जताया विरोध
जीएसटी
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कपड़े को जीएसटी के दायरे में रखने का विरोध कर रहे कपड़ा व्यापारियों ने शुक्रवार को बांह पर काली पट्टी बांधकर कारोबार किया। कपड़ा बाजार में भी खासी चहल पहल थी। व्यापारियों की कोशिश भी यहां ज्यादा से ज्यादा पुराना स्टाक खत्म करने की थी। शिवाजी मार्केट, सुभाष बाजार में कपड़ा व्यापारियों ने बांह पर काली पट्टी बांधकर विरोध जताया। व्यापारी नेता टीएन अग्रवाल ने बताया कि कपड़े को जीएसटी से बाहर रखा जाना जरूरी है, क्योंकि यह आम जरूरत की चीज है। अगर सरकार ने मांग नहीं मानी तो कपड़ा व्यापारी आंदोलन को व्यापक रूप देंगे।