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रात में घर से कुछ दूर नहीं उतरी प्रसूता तो एंबुलेंस ने फिर अस्पताल छोड़ा
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किशनी (मैनपुरी)। सरकारी एंबुलेंस के चालक ने प्रसूता को घर तक नहीं छोड़ा। रात के समय बारिश के बीच घर से एक किलोमीटर दूर प्रसूता ने उतरने से मना कर दिया तो चालक ने उसे फिर से अस्पताल ले जाकर छोड़ दिया। अफसरों से शिकायत हुई तो चालक ने रास्ता खराब होने का तर्क दिया। जांच में लापरवाही उजागर होने पर 108 एंबुलेंस के चालक और ईएमटी को निलंबित कर दिया है।
शनिवार दोपहर तीन बजे प्रसव पीड़ा होने पर मरियार निवासी रोशनी शाक्य पत्नी अमन कुमार को किशनी सीएचसी पर भर्ती कराया गया था। डेढ़ घंटे बाद साढ़े चार बजे रोशनी ने सीएचसी पर बेटी को जन्म दिया। शाम साढ़े छह बजे आशा नीरज ने जच्चा-बच्चा को गांव मरियार ले जाने के लिए एंबुलेंस को कॉल किया।
अस्पताल की 102 एंबुलेंस न होने के कारण शाम करीब सात बजे जच्चा-बच्चा को 108 एंबुलेंस से घर भेजा गया। आरोप है कि गांव से करीब एक किलोमीटर पहले नैगवां तिराहे पर गांव के मोड़ के पास एंबुलेंस चालक योगेंद्र कुमार प्रसूता को उतारने लगा। महिला ने बारिश होने और रात का हवाला दिया, लेकिन चालक घर तक छोड़ने के लिए तैयार नहीं हुआ।
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वह रास्ते खराब होने की बात कहकर वहीं उतरने का दबाव बनाने लगा और रोशनी ने पति अमन शाक्य से दूसरे वाहन का इंतजाम करने को कहा। अमन वाहन की व्यवस्था के लिए गया, तब तक चालक एंबुलेंस को वापस सीएचसी ले पहुंचा और जच्चा-बच्चा को अस्पताल ले जाकर छोड़ दिया। रात करीब साढ़े दस बजे अमन प्राइवेट वाहन लेकर अस्पताल पहुंचा और जच्चा-बच्चा को लेकर घर ले आया। मामले की शिकायत अमन ने उच्चाधिकारियों से की।
इस पर जिला एंबुलेंस सेवा के प्रोग्राम मैनेजर धीरज यादव ने पूरे मामले की जानकारी जुटाई और प्रथम जांच में दोषी पाए जाने पर चालक योगेंद्र कुमार और ईएमटी अवधेश कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। धीरज यादव ने बताया कि दोनों को रविवार को ही एंबुलेंस से हटा दिया गया है। चालक और ईएमटी को निर्देश दिए हैं कि वे सोमवार को लखनऊ पहुंचकर अपनी काउंसलिंग कराते हुए जवाब दें।
एक साल तक निगरानी की है जिम्मेदारी
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जननी सुरक्षा योजना के तहत जच्चा-बच्चा को प्रसव के बाद एक साल तक यदि कोई परेशानी होती है तो 102 एंबुलेंस से घर से लाने और घर तक पहुंचाने की निशुल्क व्यवस्था है। जिस प्रकार से एंबुलेंस चालक मनमानी कर रहे हैं, उससे समस्या पैदा हो रही है और सरकार की योजना प्रभावित हो रही है।
मामला गंभीर है, जानकारी होने पर चालक और ईएमटी को निलंबित करते हुए लखनऊ कार्यालय पर उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।
धीरज कुमार, जिला प्रोग्राम मैनेजर एंबुलेंस सेवा।
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शनिवार दोपहर तीन बजे प्रसव पीड़ा होने पर मरियार निवासी रोशनी शाक्य पत्नी अमन कुमार को किशनी सीएचसी पर भर्ती कराया गया था। डेढ़ घंटे बाद साढ़े चार बजे रोशनी ने सीएचसी पर बेटी को जन्म दिया। शाम साढ़े छह बजे आशा नीरज ने जच्चा-बच्चा को गांव मरियार ले जाने के लिए एंबुलेंस को कॉल किया।
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अस्पताल की 102 एंबुलेंस न होने के कारण शाम करीब सात बजे जच्चा-बच्चा को 108 एंबुलेंस से घर भेजा गया। आरोप है कि गांव से करीब एक किलोमीटर पहले नैगवां तिराहे पर गांव के मोड़ के पास एंबुलेंस चालक योगेंद्र कुमार प्रसूता को उतारने लगा। महिला ने बारिश होने और रात का हवाला दिया, लेकिन चालक घर तक छोड़ने के लिए तैयार नहीं हुआ।
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वह रास्ते खराब होने की बात कहकर वहीं उतरने का दबाव बनाने लगा और रोशनी ने पति अमन शाक्य से दूसरे वाहन का इंतजाम करने को कहा। अमन वाहन की व्यवस्था के लिए गया, तब तक चालक एंबुलेंस को वापस सीएचसी ले पहुंचा और जच्चा-बच्चा को अस्पताल ले जाकर छोड़ दिया। रात करीब साढ़े दस बजे अमन प्राइवेट वाहन लेकर अस्पताल पहुंचा और जच्चा-बच्चा को लेकर घर ले आया। मामले की शिकायत अमन ने उच्चाधिकारियों से की।
इस पर जिला एंबुलेंस सेवा के प्रोग्राम मैनेजर धीरज यादव ने पूरे मामले की जानकारी जुटाई और प्रथम जांच में दोषी पाए जाने पर चालक योगेंद्र कुमार और ईएमटी अवधेश कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। धीरज यादव ने बताया कि दोनों को रविवार को ही एंबुलेंस से हटा दिया गया है। चालक और ईएमटी को निर्देश दिए हैं कि वे सोमवार को लखनऊ पहुंचकर अपनी काउंसलिंग कराते हुए जवाब दें।
एक साल तक निगरानी की है जिम्मेदारी
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जननी सुरक्षा योजना के तहत जच्चा-बच्चा को प्रसव के बाद एक साल तक यदि कोई परेशानी होती है तो 102 एंबुलेंस से घर से लाने और घर तक पहुंचाने की निशुल्क व्यवस्था है। जिस प्रकार से एंबुलेंस चालक मनमानी कर रहे हैं, उससे समस्या पैदा हो रही है और सरकार की योजना प्रभावित हो रही है।
मामला गंभीर है, जानकारी होने पर चालक और ईएमटी को निलंबित करते हुए लखनऊ कार्यालय पर उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।
धीरज कुमार, जिला प्रोग्राम मैनेजर एंबुलेंस सेवा।