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UP: लंबाई कम है तो 6 इंच तक बढ़ाएं, खर्च करनी होगी इतनी रकम; हैंडसम दिखने के लिए इस ऑपरेशन के दीवाने हुए युवा

Mon, 23 Feb 2026 02:21 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Mon, 23 Feb 2026 02:21 PM IST
सार

लड़के हों या लड़कियां सभी को अच्छी लंबाई पसंद होती है, लेकिन पसंद के हिसाब से हाइट मिल पाना सभी के लिए संभव नहीं होता है। ऐसे में अब इलिजारोव तकनीक का चलन तेज हो गया है, जिससे युवा छह इंच तक लंबाई बढ़ा सकते हैं। 
 

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Height Increase up to 6 Inches Possible with Ilizarov Surgery Experts Reveal
लंबाई - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लंबाई कम है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। सर्जरी से छह इंच तक लंबाई आसानी से बढ़ाई जा सकती है। मेट्रो शहरों में इसका चलन तेजी से बढ़ा है। बड़ी संख्या में युवतियां सर्जरी करा रही हैं। माल रोड स्थित होटल में तीन दिवसीय यूपीआर्थोकॉन के अंतिम दिन विशेषज्ञों ने केस स्टडी के साथ इलिजारोव तकनीक पर व्याख्यान दिए।
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नई दिल्ली के डॉ. रवि चौहान ने बताया कि इलिजारोव तकनीक से आसानी से छह इंच तक लंबाई बढ़ाई जा सकती है। इसमें जोड़ की हड्डी के अंदर रॉड डालते हैं और इसके ऊपर विशेष रिंग लगाई जाती है। एक दिन में एक मिमी. लंबाई बढ़ाई जाती है। इसके करीब 10 दिन बाद फिर से इस प्रक्रिया को किया जाता है। इस बीच प्राकृतिक रूप से मांसपेशियां विकसित होकर गैप भर देती हैं। इस तरह से चार से छह महीने में मरीज की छह इंच तक लंबाई बढ़ जाती है। इसके बाद रिंग निकाल दी जाती है।
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उन्होंने बताया कि पूरी प्रक्रिया में करीब 10 से 12 लाख रुपये खर्च होते हैं। ये सर्जरी दिल्ली, मुंबई समेत मेट्रो शहरों में अधिक हो रही है। सर्जरी कराने वालों में 90 फीसदी युवतियां हैं, जो शादी-नौकरी, मॉडलिंग के लिए इसे अपनाती हैं। इसके अलावा टूटी हुई हड्डियों को जोड़ने, टेढ़ी-मेढ़ी हड्डियों को सीधा करने, संक्रमण से हड्डी अविकसित होने पर आकार बराबर करने में भी ये तकनीक उपयोग की जा रही है। ये तकनीक रूस के डॉ. गैवरिल इलिजारोव ने विकसित की थी, उनके नाम से ही इसे जाना जाता है। आयोजन अध्यक्ष डॉ. अरुण कपूर, सचिव डॉ. अमृत गोयल, डॉ. बृजेश शर्मा, डॉ. संजय धवन, डॉ. अशोक विज, डॉ. अतुल अग्रवाल, डॉ. अतुल कुलश्रेष्ठ, डॉ. संजय चतुर्वेदी, डॉ. रजत कपूर, डॉ. विवेक मित्तल आदि ने भी व्याख्यान दिए।
 

बच्चों-किशोरों की हड्डियों में कैंसर-टीबी का ट्यूमर
राम मनोहर लोहिया संस्थान के हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. दीप कुमार ने बताया कि दो फीसदी बच्चों की हड्डियों में कैंसर मिल रहा है। 10-20 साल की उम्र में ये सामने आ रहा है। ये जन्मजात है। इसमें हड्डियों में दर्द, सूजन और मामूली चोट से फ्रैक्चर हो जाता है। नई दिल्ली के डॉ. दिवेश जालान ने बताया कि 18 फीसदी बच्चों में हड्डी की टीबी भी मिल रही है। 10-20 साल की उम्र में हड्डी में टीबी के ज्यादा मरीज मिल रहे हैं।
 
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15 फीसदी युवाओं में गर्दन, कमर और रीढ़ की हड्डी में दर्द
एम्स नई दिल्ली के ट्रामा सेंटर प्रभारी डॉ. कामरान फारूक ने बताया कि टेढ़े-मेढ़े बैठने, लंबे समय तक बैठने, लेटकर या फिर बेतरतीब ढंग से लंबे समय तक मोबाइल-लैपटॉप देखने से 15 फीसदी युवाओं में रीढ़ की हड्डी, गर्दन और कमर में दर्द बढ़ रहा है। दो फीसदी की रीढ़ की हड्डी भी टेढ़ी हो रही है।


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