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मां की ममता पर भारी मजबूरी: जन्म देने के बाद अस्पताल में छोड़ गई बिटिया, एक बार पीछे मुड़कर भी न देखा

Sat, 09 Nov 2024 01:41 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sat, 09 Nov 2024 01:41 PM IST
सार

आगरा के एसएन मेडिकल कालेज के प्रसूति विभाग में मुरादाबाद की युवती ने बेटी को जन्म दिया। नवजात को बाल रोग विभाग में भर्ती कराने के बाद मां और नाना गायब हो गए। बेटी को जन्म देने वाली मां ने एक बार मुड़कर भी उसे नहीं देखा।  

 

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Heavy compulsion on mother's love: Daughter left in hospital after giving birth did not look back even once
नवजात - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

ममता की मूर्ति कहलाने वाली मां इतनी निष्ठुर हो गई कि जन्म देने के बाद नन्हीं परी का चेहरा देखने भी नहीं आई। अपनी दुधमुंही बच्ची को एसएन मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में छोड़कर चली गई। बच्ची का कथित नाना भी तीन दिन तक देखभाल करने के बाद गायब हो गया। पता तस्दीक किया तो फर्जी निकला। करीब एक माह से बच्ची की चिकित्सक व नर्सिंग स्टाफ देखभाल करता रहा। अब उसे शिशु गृह भेजा गया है।
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एसएन मेडिकल कालेज के प्रसूति विभाग मे 13 अक्तूबर को निशा उपाध्याय निवासी डिप्टी जगन्नाथ प्रसाद, गोविंद नगर, मुरादाबाद को प्रसव के लिए भर्ती कराया गया था। आधार कार्ड में भी यही पता था। निशा ने बेटी को जन्म दिया, नवजात को सांस लेने में दिक्कत होने पर उसे बाल रोग विभाग में एनआईसीयू में भर्ती कराया गया था। देखभाल के लिए बच्ची के नाना महेशचंद वार्ड में तीन दिन तक रहे थे। इसके बाद नाना ने आना बंद कर दिया। बाल रोग विभाग के स्टाफ ने प्रसूति विभाग में नवजात की मां के बारे में जानकारी की ताे पता चला कि वह भी बिना बताए वहां से चली गई है।
 
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इंस्पेक्टर एमएम गेट अजब सिंह ने बताया कि मेडिकल कालेज प्रशासन ने 21 अक्तूबर को थाने में सूचना दी। इसके बाद मुरादाबाद पुलिस से संपर्क कर निशा का पता लगाया तो मुरादाबाद में नाम-पता सही नहीं निकला। मेडिकल कालेज प्रशासन और पुलिस ने नवजात को बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया। बाल कल्याण समिति ने नवजात को शिशु गृह में रखने के निर्देश दिए। इस पर बच्ची को भेज दिया गया।

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डॉक्टर भी करने लगे थे दुलार
 बाल रोग विभाग में करीब एक माह से भर्ती बच्ची की देखभाल करने वाले डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को भी बच्ची से खासा लगाव हो गया था। चिकित्सक दिन में कई बार बच्ची को दुलारने पहुंचते थे। नर्स भी बच्ची की साफ सफाई और बोतल से दूध पिलाने में कोई कमी नहीं छोड़ रही थीं। वार्ड में भर्ती अन्य मरीजों के परिजन भी बच्ची को देखने आते थे। चिकित्सकीय स्टाफ बच्ची को शिशु गृह भेजते वक्त भावुक हो गया।
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