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आगरा जमीन कांड: दर्ज कराए थे फर्जी मुकदमे, वादी से लेकर गवाह तक बने पुलिसकर्मी; एसआईटी जांच की आंच से भी दूर

Thu, 08 Feb 2024 01:13 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Thu, 08 Feb 2024 01:13 PM IST
सार

आगरा में जमीन कब्जाने के लिए फर्जी मुकदमे दर्ज कराए थे। वादी से लेकर गवाह तक पुलिसकर्मी बने थे। मामले में 30 पुलिसकर्मी एसआईटी जांच की आंच से भी दूर हैं। 

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heat of SIT investigation did not reach policemen in land grabbing case in Agra
आगरा: बोदला जमीन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश के आगरा में करोड़ों की जमीन को कब्जाने के लिए दो फर्जी मुकदमे दर्ज किए गए। एनडीपीएस के मुकदमे में दरोगा वादी बने। आबकारी अधिनियम के मुकदमे की फर्द में थाने के दरोगा सहित अन्य पुलिसवाले शामिल रहे। प्रकरण की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया। मगर, 30 दिन में भी जांच की आंच पुलिसवालों तक नहीं पहुंच सकी।

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जगदीशपुरा थाना क्षेत्र में बोदला मार्ग पर करोड़ों की जमीन पर पुलिस की मिलीभगत से रातोंरात कब्जा हुआ था। तीन कमरों में रहने वाले रवि कुशवाह, उनके भाई शंकरिया और चौकीदार ओमप्रकाश को 26 अगस्त 2023 को पुलिस ने गांजा बेचने में जेल भेज दिया था। 9 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया था। 4 महीने से अधिक तक जेल में रहे।

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एनडीपीएस एक्ट का मुकदमा एसआई विकास कुमार ने लिखाया था। मामले में दरोगा आशीष कुमार ने विवेचना की थी। उन्होंने 17 सितंबर को तीनों के खिलाफ चार्जशीट लगा दी थी। चार्जशीट में साक्ष्य के तौर पर खेत में गांजे के साथ खींचे फोटो लगाए गए। इसमें तीन कट्टा गांजा और स्कूटर बरामद दिखाया था। रवि को जेल भेजने के बाद उसकी पत्नी पूनम ने अपर पुलिस आयुक्त केशव चौधरी से गुहार लगाई थी। बताया था कि उन्हें जमीन खाली न करने पर जेल भेजने की धमकी मिल रही हैं।

पांच दिन बाद 9 अक्तूबर को पुलिस ने पूनम, उसकी ननद पुष्पा को अवैध शराब बेचने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसके बाद जमीन पर कब्जा किया गया था। मुकदमा आबकारी निरीक्षक ने लिखाया था। उन्हें निलंबित किया गया। हालांकि फर्द में थाना जगदीशपुरा के दरोगा सहित अन्य पुलिसवाले भी शामिल थे। उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

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तत्कालीन पुलिस आयुक्त डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था। फर्जी मुकदमों से लेकर पूरे खेल में शामिल लोगों पर कार्रवाई की जानी थी। मगर, तत्कालीन एसओ की गिरफ्तारी के बाद दो और लोग पकड़े गए। मुकदमे लिखाने और विवेचना करने वाले पुलिसवालों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

मुनादी के बाद भी पुलिस की दबिश

जमीन प्रकरण में 25-25 हजार के इनामी बिल्डर कमल चौधरी और उसका बेटा धीरू चौधरी पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं। हालांकि पुलिस अब भी दबिश का दावा कर रही है। दोनों के पूर्वांचल में छिपे होने की जानकारी पुलिस को मिली है। इस पर टीम कार्य कर रही हैं। इसके अलावा परिचितों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। आरोपियों को शरण देने वालों पर भी कार्रवाई की जाएगी।

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